दिल्ली के यमुना बाजार में बुलडोजर एक्शन, 1100 लोगों पर बेघर होने का संकट
x

दिल्ली के यमुना बाजार में बुलडोजर एक्शन, 1100 लोगों पर बेघर होने का संकट

दिल्ली के यमुना बाजार में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई। 310 मकानों के करीब 1100 निवासी विस्थापन और पुनर्वास की चिंता में हैं।


दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में गुरुवार सुबह से अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई। दिल्ली नगर निगम और संबंधित एजेंसियां यमुना बाढ़ क्षेत्र में बने निर्माणों को हटाने में जुटी हैं। कार्रवाई को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।इस कार्रवाई से इलाके के सैकड़ों परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। कई लोग अपने घर छोड़ चुके हैं, जबकि कई परिवार अब भी अनिश्चितता के बीच वहां रहने को मजबूर हैं।

घर खाली करने का अंतिम नोटिस

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार क्षेत्र के निवासियों को नया नोटिस जारी कर घाट नंबर 2 से 32 के बीच रहने वाले लोगों से स्वेच्छा से मकान खाली करने को कहा था।नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जगह खाली नहीं करने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इस क्षेत्र में करीब 310 मकान हैं, जिनमें लगभग 1100 लोग रहते हैं।


लोगों में भय और आक्रोश

तोड़-फोड़ की कार्रवाई को लेकर इलाके में भय और असमंजस का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने पहले ही पानी की आपूर्ति बंद कर दी थी और उन्हें बुधवार रात तक मकान खाली करने का निर्देश दिया गया था।कई परिवार अपना सामान हटाकर अन्य जगहों पर चले गए हैं, जबकि कुछ लोग अब भी अपने घरों में मौजूद हैं और कार्रवाई को लेकर चिंतित हैं।विस्थापित लोगों को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के अस्थायी आश्रयों में रहने का विकल्प दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से बसे लोगों को घरों से हटाकर नाइट शेल्टर में रहने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।

कब-कब जारी हुए नोटिस?

यमुना बाजार क्षेत्र को खाली कराने के लिए प्रशासन की ओर से पिछले कुछ महीनों में कई नोटिस जारी किए गए

13 मई: आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत क्षेत्र खाली करने का नोटिस जारी किया गया।

15 मई: डीडीए ने यमुना डूब क्षेत्र के ओ-जोन में आने वाले इलाके को खाली करने का निर्देश दिया।

2 जून के हाई कोर्ट आदेश के बाद: निवासियों को 23 जून तक मकान खाली करने और 24 जून से कार्रवाई शुरू होने की जानकारी दी गई।

गुरुवार सुबह: प्रशासन ने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।

सरकार ने दिए पुनर्वास के विकल्प

डीडीए ने प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था का दावा किया है।नोटिस के अनुसार, लोगों को दिल्ली शहरी आश्रय विकास बोर्ड के विभिन्न रैन बसेरों और नाइट शेल्टरों में रहने का विकल्प दिया गया है। इनमें राजा गार्डन, सुल्तानपुरी की ए-ब्लॉक जेजेआर कॉलोनी, मुनिरका का सरस्वती पार्क, गीता कॉलोनी जैसे स्थान शामिल हैं। हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि स्थायी घरों की जगह अस्थायी आश्रय देना उनके लिए पर्याप्त समाधान नहीं है।

हाई कोर्ट के निर्देश क्या हैं?

दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने बाढ़ क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों को पर्यावरण और नदी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यमुना बाढ़ क्षेत्र में कुल 91 कॉलोनियां और गांव स्थित हैं। इन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों पर अब विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।

दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि इन कॉलोनियों और गांवों में करीब छह लाख लोग निवास करते हैं। सरकार का कहना है कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन फिलहाल यमुना बाजार में शुरू हुई कार्रवाई ने स्थानीय निवासियों की चिंता और असुरक्षा को बढ़ा दिया है।

Read More
Next Story