
प्रतीक यादव के किस नुकसान की बात कर रहे अखिलेश यादव?
प्रतीक यादव रियल एस्टेट और फिटनेस कारोबार में भारी नुकसान व विवादों से परेशान थे, जिसे लेकर अखिलेश यादव ने भी चिंता जताई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के दूसरे बेटे की मौत फेफड़ों में खून के जमने से हुई थी। लेकिन क्या वो पिछले कई महीनों से तनाव में थे। क्या कारोबार में हुए नुकसान और भारी भरकम कर्जे से परेशान थे। ये दोनों सवाल अब लखनऊ के सियासी गलियारों में सुर्खी बटोर रहे हैं। अपने छोटे भाई प्रतीक यादव की मौत के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि उनकी करीब दो महीने पहले मेरी प्रतीक से मुलाकात हुई थी। तब मैंने उनसे कहा था कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखो और कारोबार पर फोकस करो। बिजनेस में नुकसान इंसान को अंदर से तोड़ देता है।
अखिलेश जिस कारोबारी नुकसान की बात कर रहे थे, उसकी पड़ताल करने पर कई अहम बातें सामने आईं। परिवार और सपा से जुड़े करीबी सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव रियल एस्टेट और फिटनेस इंडस्ट्री में काम कर रहे थे। उनके कारोबार में पत्नी अपर्णा यादव के भाई अमन बिष्ट भी साझेदार थे।
बताया जा रहा है कि पिछले एक साल में अलग-अलग निवेशों में भारी नुकसान हुआ। इसी को लेकर प्रतीक और अमन बिष्ट के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। हालात यहां तक पहुंच गए कि प्रतीक ने गोमतीनगर स्थित अपने जिम ‘आयरन कोर फिट’ के ऑफिस को खाली करने के लिए भी अमन से कह दिया था। इसके बाद से वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगे थे।हालांकि, परिवार में बढ़ती दूरी के बावजूद अमन बिष्ट आखिरी समय तक प्रतीक के साथ दिखाई दिए। सिविल अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस में भी वह मौजूद थे और पोस्टमॉर्टम हाउस में भी नजर आए।
कैसे शुरू हुआ कारोबार?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतीक यादव दो बड़े सेक्टर में सक्रिय थे — रियल एस्टेट और फिटनेस इंडस्ट्री। रियल एस्टेट कारोबार को संभालने में अमन बिष्ट उनकी मदद करते थे। 2012 में उत्तर प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद अमन बिष्ट ने कई कंपनियां रजिस्टर कराईं। 2012 से 2016 के बीच करीब 16 कंपनियों में वह डायरेक्टर या डिजिग्नेटेड डायरेक्टर रहे। ज्यादातर कंपनियां रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ी थीं। हालांकि, इन कंपनियों के संचालन और फैसलों की कमान मुख्य रूप से प्रतीक यादव के हाथ में ही रहती थी।
कारोबार में बढ़ा विवाद
करीबी लोगों का कहना है कि 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद कारोबार में नफा-नुकसान को लेकर प्रतीक और अमन के बीच मतभेद बढ़ने लगे थे।इसी दौरान रियल एस्टेट कारोबारी कृष्णानंद पांडेय के साथ भी प्रतीक का बड़ा विवाद सामने आया। बताया जाता है कि दोनों के बीच करोड़ों रुपए का निवेश हुआ था। जब प्रतीक ने अपना पैसा वापस मांगा, तो विवाद गहरा गया।
13 जुलाई 2025 को लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में प्रतीक यादव की ओर से FIR दर्ज कराई गई। शिकायत में कृष्णानंद पांडेय, उनकी पत्नी वंदना पांडेय और पिता अशोक पांडेय पर करोड़ों की ठगी और 5 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया गया। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।
अमन बिष्ट पर भी केस
20 सितंबर 2025 को अमन बिष्ट के खिलाफ भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ। कारोबारी ठाकुर सिंह ने आरोप लगाया कि अमन ने सरोजनीनगर इलाके में जमीन बेचने के नाम पर करीब 14 करोड़ रुपए लिए, लेकिन सौदा पूरा नहीं किया।शिकायत के मुताबिक, यह रकम अमन की कंपनी मोनाल इंफ्राहाइट्स के खाते में ट्रांसफर की गई थी। इस मामले की जांच भी अभी जारी है।

