गैर-जिम्मेदार बयान क्यों? राहत देते हुए हाईकोर्ट ने अभिषेक से पूछा सवाल
x

गैर-जिम्मेदार बयान क्यों? राहत देते हुए हाईकोर्ट ने अभिषेक से पूछा सवाल

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को एफआईआर मामले में 31 जुलाई तक राहत दी और उनके बयान पर कड़ी टिप्पणी की।


कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को पिछले महीने एक जनसभा में दिए गए बयान से जुड़े एफआईआर मामले में 31 जुलाई तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत दे दी। साथ ही अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी सांसद के लिए इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान देना उचित है।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी द्वारा भेजे गए नोटिसों का पालन करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि बिना अदालत की अनुमति के वह विदेश यात्रा नहीं करेंगे।डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। यह एफआईआर 27 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले आयोजित एक जनसभा में प्रतिद्वंद्वी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दिए गए कथित बयान को लेकर दर्ज की गई थी।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पूछा कि आखिर अभिषेक बनर्जी ने “गैर-जिम्मेदाराना बयान” क्यों दिया। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि अगर तृणमूल कांग्रेस चुनाव जीत जाती तो स्थिति क्या होती।अदालत ने कहा, “इस राज्य का चुनाव बाद हिंसा का इतिहास बहुत काला रहा है।”न्यायाधीश ने यह सवाल भी उठाया कि क्या जनसभा में दिया गया बयान तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव के पद की गरिमा के अनुरूप था।

हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से राहत देते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अभिषेक बनर्जी की याचिका का विरोध किया, लेकिन उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि जांच कानून के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।

Read More
Next Story