फंड और प्रोजेक्ट्स पर CM विजय की हुंकार; किया सहकारी संघवाद का समर्थन
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फंड और प्रोजेक्ट्स पर CM विजय की हुंकार; किया सहकारी संघवाद का समर्थन

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने 'समग्र शिक्षा' के 3,284 करोड़ रुपये तुरंत जारी करने की मांग की; कोयंबटूर में दूसरे AIIMS और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की पैरवी.


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Tamil Nadu CM Vijay: तमिलनाडु की कमान संभालने के बाद पहली बार राष्ट्रीय मंच पर पहुंचे नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार (11 जून) को नीति आयोग (NITI Aayog) की 11वीं शासी परिषद की बैठक में हिस्सा लिया. अपने पहले ही संबोधन में सीएम विजय ने एक बेहद परिपक्व और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए जहां एक तरफ केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई, वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु के हक और हितों को लेकर बेहद मजबूती से अपनी मांगें रखीं.


तमिलनाडु की 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) सरकार के मुखिया ने सहयोगात्मक संघवाद और समावेशी विकास का मुद्दा उठाते हुए स्पष्ट किया:

"तमिलनाडु देश की आकांक्षाओं का पूरे दिल से समर्थन करता है. हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि एक विकसित भारत का निर्माण केवल सशक्त राज्यों, मजबूत संघीय ढांचे और हर वर्ग के समावेशी विकास के जरिए ही संभव है."

शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर: सीएम विजय ने केंद्र से मांगी इन 6 मोर्चों पर मदद
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने बैठक में तमिलनाडु के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और लंबित फंडों को लेकर विस्तृत प्रस्ताव रखे:

शिक्षा फंड पर कड़ा रुख: विजय ने केंद्र सरकार से मांग की कि 'समग्र शिक्षा योजना' के तहत राज्य के बकाया 3,284 करोड़ रुपये तुरंत जारी किए जाएं. उन्होंने दोटूक कहा कि इस फंड को 'नई शिक्षा नीति' (NEP) या त्रि-भाषा फॉर्मूले की शर्तों से न जोड़ा जाए, क्योंकि यह छात्रों के भविष्य और संघवाद की भावना के खिलाफ है.

कोयंबटूर में दूसरा AIIMS: उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कोयंबटूर में तमिलनाडु के दूसरे एम्स (AIIMS) को तत्काल मंजूरी देने का आग्रह किया, जिसके लिए राज्य सरकार आवश्यक जमीन देने को पूरी तरह तैयार है.

रोजगार और डीप टेक: युवाओं के लिए हर साल 5 लाख रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से एक 'युवा कौशल और रोजगार मिशन' का प्रस्ताव रखा. साथ ही, हर जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप टेक, साइबर सिक्योरिटी और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजी स्किल सेंटर' बनाने में केंद्र से सहयोग मांगा.

मछुआरों की सुरक्षा: पाक खाड़ी में तमिल मछुआरों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करने और श्रीलंका व पाकिस्तान में हिरासत में लिए गए भारतीय मछुआरों को तुरंत रिहा कराने की पुरजोर अपील की.

गरीबी उन्मूलन और आवास: 'गरीबी मुक्त तमिलनाडु मिशन' और किफायती आवास परियोजनाओं के लिए केंद्रीय सहायता की मांग की, साथ ही ग्रामीण आवास परियोजनाओं (VB-G RAM-G) में रोजगार सृजन की अनुमति मांगी.

हाई-स्पीड रेल और स्पेस हब: चेन्नई-कन्नियाकुमारी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और जीएसटी रोड के छह-लेन चौड़ीकरण को जल्द मंजूरी देने की वकालत की. इसके अलावा, कुलशेखरपट्टनम में बन रहे 'स्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब' को राष्ट्रीय हब घोषित करने की मांग की.

DMK राज से अलग नीति: टकराव के बजाय संवाद का रास्ता; लेकिन 'रेड लाइन्स' तय
राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के इस रुख को पिछली द्रमुक (DMK) सरकार की तुलना में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. द्रमुक के कार्यकाल के दौरान आपदा राहत कोष और जीएसटी राजस्व शेयरिंग को लेकर केंद्र के साथ लगातार तीखा टकराव बना रहता था. इसके विपरीत, विजय की सरकार राज्य के मूल हितों से समझौता किए बिना बातचीत और कूटनीति के जरिए मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रही है.

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जो राज्य वित्तीय जिम्मेदारी निभा रहे हैं और जनसंख्या नियंत्रण (Population Stabilisation) में सफल रहे हैं, उन्हें संसाधनों के आवंटन में किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए. राज्य का लक्ष्य साल 2036 तक तमिलनाडु को $1.5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मशहूर राजनीतिक विश्लेषक सुमंत सी. रमन के अनुसार, "टीवीके सरकार ने केंद्र के साथ टकराव टाला है, लेकिन अपनी 'रेड लाइन्स' (लक्ष्मण रेखा) बहुत स्पष्ट खींच दी हैं. मुख्यमंत्री विजय ने साफ कर दिया है कि तमिलनाडु अपनी 'दो-भाषा नीति' पर कायम रहेगा और आगामी परिसीमन के दौरान राज्य की विधानसभा या लोकसभा सीटों में किसी भी तरह की कटौती उन्हें कतई स्वीकार नहीं होगी."


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