
विजय का हमला-डीएमके का विरोध, तमिलनाडु विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा
तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने डीएमके पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और नशे के कारोबार को लेकर हमला बोला, जिसके बाद विपक्ष ने वॉकआउट किया।
तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार (23 जून) को मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए विपक्षी डीएमके पर तीखा हमला बोला। अपने फिल्मी अंदाज की झलक दिखाते हुए विजय ने कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, बिजली संकट, नशे के बढ़ते कारोबार और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पिछली डीएमके सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
विजय के भाषण के दौरान विधानसभा में भारी हंगामा हुआ। डीएमके विधायकों ने उनके आरोपों का विरोध करते हुए नारेबाजी की और अंत में सदन से वॉकआउट कर दिया।
फिल्मों से राजनीति तक का सफर
विजय ने अपने संबोधन में कहा कि वह केवल एक अभिनेता के रूप में राजनीति में नहीं आए हैं, बल्कि पिछले कई दशकों से जनता के बीच काम करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक में शुरू हुए उनके फैन क्लब धीरे-धीरे सामाजिक और जनकल्याण गतिविधियों में बदल गए, जो आगे चलकर ‘विजय मक्कल इयक्कम’ के रूप में विकसित हुए।उन्होंने श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे, जल्लीकट्टू आंदोलन, स्टरलाइट विरोध प्रदर्शन, बाढ़ राहत, कोविड सहायता और स्थानीय निकाय चुनावों में सक्रिय भागीदारी का भी जिक्र किया।
टीवीके सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
मुख्यमंत्री विजय ने अपनी 10 सप्ताह पुरानी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष "सिंगप्पेन" सुरक्षा बल का गठन किया है। इसके अलावा कुरुवई धान किसानों के लिए विशेष पैकेज, बिजली क्षेत्र में सुधार, अवैध खदानों पर कार्रवाई, 717 टास्मैक शराब दुकानों को बंद करना और केंद्र से जल जीवन मिशन की रुकी हुई धनराशि हासिल करना उनकी सरकार की बड़ी उपलब्धियां हैं।उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त और महिलाओं के लिए सुरक्षित प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
डीएमके पर तीखा हमला
विजय ने कहा कि पिछली डीएमके सरकार के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी, बिजली कटौती बढ़ी, नशे का कारोबार फैला और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई।उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके शासन के दौरान तमिलनाडु में 10 महीने तक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पद खाली रहा। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि टास्मैक शराब दुकानों के माध्यम से पार्टी फंड जुटाए जाते थे।
"हमें जनता की सेवा करनी आती है"
अपने भाषण में विजय ने कई तीखे राजनीतिक बयान दिए। उन्होंने कहा,"हमें जनता की सेवा करना आता है, लेकिन जनता का पैसा लूटना नहीं आता। हमें मंदिरों के फंड में गड़बड़ी करना, सरकारी राजस्व को निजी खातों में भेजना या नशे की संस्कृति को बढ़ावा देना नहीं आता।"उन्होंने डीएमके पर तबादलों और पदोन्नति में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।
आलोचनाओं की परवाह नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक पार्टी बनाने से पहले उन्होंने लोगों के बीच जाकर काम किया और घर-घर तक पहुंचे। उन्होंने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि उनका मजाक उड़ाने वालों या व्यंग्य करने वालों की उन्हें कोई परवाह नहीं है।विजय ने अपनी सरकार को "आम आदमी की सरकार" बताते हुए कहा कि 2026 के चुनाव में जनता ने जाति और धर्म की सीमाओं को तोड़कर उन्हें समर्थन दिया है।
"रील नहीं, रियल राजनीति"
अपने संबोधन के अंत में विजय ने कहा कि उनकी सरकार दिखावे की राजनीति नहीं बल्कि वास्तविक जनसेवा में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि उनकी पहचान फिल्मों की "रील" से नहीं बल्कि जनता के लिए किए गए "रियल" कामों से तय होगी।
डीएमके का विरोध और वॉकआउट
मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान डीएमके विधायकों ने विशेष रूप से टास्मैक और पार्टी फंड से जुड़े आरोपों का जोरदार विरोध किया। सदन में नारेबाजी और हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी।विजय के भाषण समाप्त होने के बाद विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर दिया गया, लेकिन डीएमके विधायक विरोध जारी रखते हुए सदन से वॉकआउट कर गए।
वहीं मंत्री आधारव अर्जुना ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के बोलते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया, जबकि इससे पहले वह शांत बैठा हुआ था।

