राज्यसभा रण से पहले झारखंड में सियासी भूचाल, सहयोगी दलों में ठनी
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राज्यसभा रण से पहले झारखंड में सियासी भूचाल, सहयोगी दलों में ठनी

झारखंड में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और जेएमएम के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे INDIA गठबंधन की एकता पर सवाल उठने लगे हैं।


झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर तनाव खुलकर सामने आ गया है। गुरुवार (4 जून) देर शाम जब कांग्रेस ने झारखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित किया, तब पार्टी को पता था कि जीत का रास्ता आसान नहीं होगा। लेकिन शायद उसे यह अंदाजा नहीं था कि मुश्किलें इतनी जल्दी और अपने ही सहयोगी दल की ओर से सामने आ जाएंगी।

उम्मीदवारी की घोषणा के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कांग्रेस को झटका दे दिया। रांची में अपने आवास पर विधायकों की बैठक के बाद जेएमएम ने संकेत दिया कि वह 18 जून को होने वाले दोनों राज्यसभा सीटों के चुनाव में अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी गठबंधन यानी कि इंडिया गठबंधन पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर डीएमके ने गठबंधन की अहम बैठक से दूरी बना ली है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी के भीतर भी अस्थिरता की खबरें हैं। ऐसे में कांग्रेस और जेएमएम के बीच का यह विवाद विपक्षी खेमे के लिए नई परेशानी बन गया है।

दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारना चाहती है जेएमएम

झारखंड सरकार के वरिष्ठ मंत्री हफीजुल हसन और सुदिव्य कुमार ने बैठक के बाद कहा कि पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि जेएमएम दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अंतिम घोषणा जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे।

हालांकि सोरेन ने अभी तक उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं, लेकिन जेएमएम के महासचिव और प्रवक्ता Supriyo Bhattacharya ने कहा कि नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून है और उससे पहले पार्टी अपना फैसला बता देगी।

भट्टाचार्य ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित करने से पहले हमसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया। अगर वे प्रणव झा को उम्मीदवार बनाना चाहते थे तो उन्हें हेमंत सोरेन से बात करनी चाहिए थी। वे एकतरफा फैसला नहीं कर सकते।”

उन्होंने यह भी कहा कि जेएमएम ने गठबंधन धर्म का पालन तब भी किया था, जब पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और राजद ने पार्टी को कोई सीट नहीं दी थी।

कांग्रेस ने जीत का दावा किया

प्रणव झा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने नई दिल्ली में कहा कि कांग्रेस अपने सभी सात राज्यसभा उम्मीदवारों को जिताने जा रही है और झारखंड की सीट भी जीत लेगी।शुक्रवार शाम कांग्रेस ने अपने 16 सदस्यीय विधायक दल की बैठक बुलाई। बैठक में पार्टी के झारखंड प्रभारी और राहुल गांधी के करीबी सहयोगी के राजू भी मौजूद रहे। बताया गया कि उन्होंने मतभेद दूर करने के लिए हेमंत सोरेन से मुलाकात का समय मांगा है।

भाजपा समर्थित उम्मीदवार का डर

कांग्रेस को पहले से ही आशंका थी कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग हो सकती है और भाजपा समर्थित कोई उम्मीदवार मुकाबले में उतर सकता है।पिछले कई सप्ताह से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही है कि उद्योगपति Mukesh Ambani के करीबी सहयोगी और Reliance Industries Limited में कॉरपोरेट अफेयर्स निदेशक Parimal Nathwani झारखंड से राज्यसभा चुनाव लड़ सकते हैं। नथवानी वर्तमान में YSR Congress Party की ओर से आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे पहले वे भाजपा और आजसू के समर्थन से झारखंड से दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।

कांग्रेस उम्मीदवार की राह मुश्किल

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि प्रणव झा की जीत अब पहले से ज्यादा कठिन हो गई है, खासकर जेएमएम के रुख के बाद।गठबंधन (जेएमएम, कांग्रेस, सीपीआई-एमएल और राजद) के पास कुल 56 विधायक हैं। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 28 प्रथम वरीयता वोट चाहिए। ऐसे में पहली सीट सुरक्षित मानी जा रही थी, लेकिन दूसरी सीट पर जीत तभी संभव है जब सभी वोट एकजुट रहें।कांग्रेस नेताओं को डर है कि भाजपा यदि उम्मीदवार उतारती है तो केवल चार विधायकों की क्रॉस वोटिंग भी चुनावी समीकरण बदल सकती है।

जेएमएम ने पहले ही जताई थी क्रॉस वोटिंग की आशंका

दिलचस्प बात यह है कि करीब दस दिन पहले खुद जेएमएम ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई थी।25 मई को मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को भेजे गए पत्र में सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया था कि भाजपा विधायकों को प्रभावित करने के लिए धनबल और अन्य दबावों का इस्तेमाल कर सकती है।उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद विपक्ष के नेता Babulal Marandi ने राज्यसभा उम्मीदवार उतारने की बात कही थी।

सीट बंटवारे पर आमने-सामने सहयोगी दल

जेएमएम का आरोप है कि कांग्रेस ने उसकी सहमति के बिना उम्मीदवार घोषित किया, जबकि गठबंधन में वह वरिष्ठ साझेदार है।दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष खड़गे और राहुल गांधी दोनों ने हेमंत सोरेन से बातचीत की थी। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि वरिष्ठ सहयोगी दल से चर्चा किए बिना उम्मीदवार घोषित करने का सवाल ही नहीं उठता।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या जेएमएम दूसरी सीट अपने लिए सुरक्षित करने के लिए दबाव की राजनीति कर रही है या फिर हेमंत सोरेन किसी अन्य राजनीतिक दबाव में हैं।

गठबंधन में पहले से थी खटास

झारखंड कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि दोनों दलों के संबंध पिछले कई महीनों से तनावपूर्ण हैं।उनका कहना है कि कैबिनेट बैठकों को छोड़कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस मंत्रियों के बीच संवाद लगभग बंद हो चुका है। पार्टी और जेएमएम नेतृत्व के बीच भी बातचीत कमजोर पड़ गई है।

INDIA गठबंधन के लिए एक और झटका?

कांग्रेस और जेएमएम के बीच बढ़ता तनाव 8 जून को होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक से ठीक पहले सामने आया है।पहले ही डीएमके ने बैठक में शामिल न होने का फैसला कर लिया है, जबकि टीएमसी भी आंतरिक संकट से गुजर रही है। ऐसे में झारखंड का यह विवाद विपक्षी गठबंधन के लिए नई चुनौती बन सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस प्रणव झा की उम्मीदवारी वापस लेकर गठबंधन बचाने की कोशिश करेगी, या फिर हेमंत सोरेन स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता चुनेंगे। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल झारखंड की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की एकता के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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