सत्ता परिवर्तन की पटकथा तैयार, कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ी हलचल
x

सत्ता परिवर्तन की पटकथा तैयार, कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ी हलचल

कर्नाटक में कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है। सिद्धारमैया पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा, डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं।


कर्नाटक सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने अब आखिरकार अपना मन बना लिया है। यदि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आखिरी समय में कोई बड़ा राजनीतिक दांव नहीं चलते, तो उनसे बहुत जल्द मुख्यमंत्री पद छोड़ने की उम्मीद की जा रही है। माना जा रहा है कि उनकी जगह उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

मंगलवार (26 मई) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के साथ बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य कर्नाटक कांग्रेस के दोनों बड़े नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे सत्ता संघर्ष को समाप्त करना था।

आधिकारिक तौर पर कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह बैठक मुख्यमंत्री बदलने के लिए नहीं, बल्कि आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर थी। हालांकि बैठक के दौरान बने राजनीतिक माहौल और दोनों खेमों के नेताओं द्वारा लगातार दिए जा रहे बयानों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए। वेणुगोपाल ने मीडिया के सवालों से भी दूरी बनाई और सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री बने रहने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जिससे अटकलें और तेज हो गईं।

सूत्रों के मुताबिक सिद्धारमैया ने हाईकमान के साथ कम से कम चार दौर की बातचीत की। पहली बैठक में खड़गे, राहुल गांधी, वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला मौजूद थे। इसके बाद सिद्धारमैया ने खड़गे और राहुल गांधी से अलग बैठक की और फिर राहुल गांधी के साथ लगभग 45 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। राहुल गांधी बाद में 10 जनपथ स्थित अपनी मां और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर गए और लौटने के बाद फिर एक और बैठक हुई, जिसमें डीके शिवकुमार भी मौजूद थे।हालांकि नेतृत्व परिवर्तन की समयसीमा और शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री परिवर्तन का मुद्दा अब और लंबा नहीं खींचा जा सकता।

अब तक राहुल गांधी सिद्धारमैया के पक्ष में थे और चाहते थे कि वे अपना कार्यकाल पूरा करें। इसी कारण उन्हें सिद्धारमैया को मनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को समझाया कि दोनों नेताओं के बीच लगातार चल रही खींचतान के कारण सरकार के खिलाफ माहौल बन रहा है। साथ ही पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व चाहती है, ताकि चुनावी वादों को तेजी से लागू किया जा सके।

राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को यह भरोसा भी दिलाया कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने से पार्टी में उनका महत्व कम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और दलितों के बीच सिद्धारमैया की मजबूत पकड़ कांग्रेस के लिए बेहद अहम है। सिद्धारमैया को पार्टी का सबसे बड़ा ओबीसी चेहरा माना जाता है और AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) वोट बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ है।

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका देने का भी प्रस्ताव रखा। उन्हें कर्नाटक से राज्यसभा भेजने का विकल्प दिया गया, जहां कांग्रेस चार में से तीन सीटें जीतने की स्थिति में मानी जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि राज्यसभा में जाने से सिद्धारमैया राष्ट्रीय नेता के रूप में उभर सकते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को विभिन्न मुद्दों पर चुनौती दे सकते हैं, जैसे केंद्र-राज्य संबंध, आर्थिक नीतियां और पिछड़े वर्गों, दलितों तथा अल्पसंख्यकों के मुद्दे।हालांकि सिद्धारमैया ने इस प्रस्ताव पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं दी। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने बेहद विनम्र लेकिन स्पष्ट शब्दों में उन्हें पद छोड़ने की जरूरत समझाई।

सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया ने एक वैकल्पिक सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी उन्हें हटाना चाहती है तो उनकी जगह गृह मंत्री जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाया जाए, न कि डीके शिवकुमार को। परमेश्वर दलित समुदाय से आते हैं, जबकि शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से हैं। सिद्धारमैया का तर्क था कि कांग्रेस का सबसे मजबूत समर्थन आधार ओबीसी, मुसलमान और दलित हैं, इसलिए किसी ओबीसी मुख्यमंत्री की जगह ऊंची जाति के वोक्कालिगा नेता को लाना राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस ने अतीत में पार्टी अध्यक्ष खड़गे जैसे वरिष्ठ दलित नेता को तीन बार मुख्यमंत्री बनने से वंचित किया था और अब पार्टी उस ऐतिहासिक गलती को सुधार सकती है।हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि मंत्रिमंडल फेरबदल पर सिद्धारमैया की राय ली जाएगी, लेकिन नया मुख्यमंत्री कौन होगा, यह फैसला केवल हाईकमान करेगा।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन अब “अगर” का नहीं बल्कि “कब” का सवाल है। संभव है कि इस सप्ताह के अंत तक या राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के साथ आधिकारिक ऐलान भी कर दिया जाए।हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि हाईकमान ने बड़ा जोखिम उठाया है। उन्हें डर है कि सिद्धारमैया यदि नाराज हो गए तो वे राजस्थान में अशोक गहलोत की तरह बगावत कर सकते हैं। 2022 में जब कांग्रेस नेतृत्व ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश की थी, तब गहलोत समर्थक विधायकों ने विद्रोह कर दिया था।

कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिद्धारमैया को ऐसा क्या प्रस्ताव दिया जाए जिससे वे पद छोड़ने के बाद भी पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा बनाए रखें। सिद्धारमैया हमेशा से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाना चाहते रहे हैं। दिल्ली की राजनीति में एक साधारण सांसद या संगठन पदाधिकारी की भूमिका उन्हें शायद स्वीकार न हो।

कर्नाटक के ही नेता खड़गे पहले से कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं, इसलिए ये दोनों बड़े पद सिद्धारमैया को मिलना संभव नहीं दिखता। यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान ने भले ही उन्हें सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने का संकेत दिया हो, लेकिन सिद्धारमैया इसे किस नजर से देखते हैं, यह अभी साफ नहीं है।फिलहाल कांग्रेस ने फैसला तो कर लिया है, लेकिन अंतिम कदम और उसकी शर्तें अब काफी हद तक सिद्धारमैया के हाथ में हैं। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि कर्नाटक का यह राजनीतिक “नाटक” सचमुच खत्म होने वाला है या फिर इसका अगला अध्याय शुरू होने जा रहा है।

Read More
Next Story