
वंदे मातरम् विवाद में घिरी विजय सरकार, सहयोगियों ने उठाए सवाल
तमिलनाडु में विजय सरकार के शपथग्रहण में ‘वंदे मातरम्’ पहले बजाने पर CPI और VCK समेत सहयोगी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति सी. जोसेफ विजय के शपथग्रहण समारोह के बाद अब एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को तमिलनाडु के राज्य गीत ‘तमिल थाई वल्थु’ से पहले बजाए जाने पर वामपंथी दलों और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।सबसे पहले इस मुद्दे को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने उठाया था। अब पार्टी के महासचिव डी. राजा ने खुलकर कहा है कि यह तमिलनाडु की स्थापित परंपरा के खिलाफ है और इसी वजह से लोग सवाल उठा रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
10 मई 2026 को हुए थलपति विजय के शपथग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से हुई। इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया गया और आखिर में तमिलनाडु का राज्य गीत ‘तमिल थाई वल्थु’ गाया गया।यही क्रम अब विवाद की वजह बन गया है। विरोध करने वाले दलों का कहना है कि तमिलनाडु में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले ‘तमिल थाई वल्थु’ से होती है। उसके बाद ही राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान बजाया जाता है।
डी. राजा बोले — इससे लोगों में चिंता पैदा हुई
सीपीआई महासचिव डी. राजा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस बदलाव ने लोगों के बीच असहजता और चिंता पैदा की है।उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि यहां हमेशा पहले ‘तमिल थाई वल्थु’ गाया जाता है। यह मां तमिल को समर्पित गीत है और राज्य की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। उसके बाद ही राष्ट्रगीत या अन्य कार्यक्रम होते हैं।”
डी. राजा ने यह भी कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है जब ‘वंदे मातरम्’ को पूरे छंदों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत में गाया गया। उनके मुताबिक, यह सामान्य परंपरा से अलग था और इसलिए लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।उन्होंने कहा कि अब यह स्पष्ट करना सरकार और अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि कार्यक्रम की रूपरेखा इस तरह क्यों तय की गई।
VCK ने भी जताई नाराजगी
विवाद सिर्फ CPI तक सीमित नहीं रहा। विजय सरकार को बाहर से समर्थन दे रही विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर की है।पार्टी प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने मुख्यमंत्री विजय को पत्र लिखकर इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने ‘तमिल थाई वल्थु’ को आखिर में बजाए जाने को “बेहद चौंकाने वाला और परेशान करने वाला” बताया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, थिरुमावलवन ने सवाल उठाया कि क्या यह फैसला तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को खुश करने के लिए लिया गया था।उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या कार्यक्रम का क्रम राज्यपाल के निर्देश पर बदला गया था।
सहयोगी दलों में बढ़ी असहजता
VCK प्रमुख ने यह भी कहा कि टीवीके ने खुद को एक सेक्युलर सरकार के रूप में पेश करते हुए कांग्रेस, वामपंथी दलों, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और VCK जैसे दलों से समर्थन मांगा था।लेकिन शपथग्रहण समारोह में हुई इस घटना ने सहयोगी दलों के बीच असहजता पैदा कर दी है थिरुमावलवन का कहना है कि ऐसे कदम उन पार्टियों को मुश्किल स्थिति में डालते हैं जो विजय सरकार को समर्थन दे रही हैं।
तमिल पहचान बनाम राष्ट्रवाद की बहस
दरअसल, तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय पहचान हमेशा बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। ‘तमिल थाई वल्थु’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि तमिल संस्कृति और गौरव का प्रतीक माना जाता है।इसी वजह से इसे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में प्राथमिकता दिए जाने की परंपरा रही है। अब ‘वंदे मातरम्’ को उससे पहले बजाए जाने को कई दल तमिल पहचान को पीछे रखने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, विजय सरकार की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन शपथग्रहण के तुरंत बाद शुरू हुआ यह विवाद नई सरकार के लिए शुरुआती राजनीतिक चुनौती बनता नजर आ रहा है।

