दिल्ली SIR: मतदाताओं और BLO के सामने 2002 का रिकॉर्ड ढूंढने की चुनौती
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दिल्ली SIR: मतदाताओं और BLO के सामने 2002 का रिकॉर्ड ढूंढने की चुनौती

दिल्ली SIR का पहला दिन: फॉर्म बांटने में जुटे अधिकारी; पिछले राज्यों के तनाव को पीछे छोड़ मजबूत ट्रेनिंग और प्रशासनिक सपोर्ट से कॉन्फिडेंट दिखे BLO.


SIR in Delhi: राजधानी दिल्ली में आज (मंगलवार) से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR - Special Intensive Revision) का काम शुरू हो गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अशोक कुमार के मुताबिक, इस महाभियान के तहत 13,000 से ज्यादा बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का वेरिफिकेशन करेंगे। यह अभियान 29 जुलाई तक चलेगा।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक और पारदर्शी बनाना है। वर्तमान में दिल्ली में कुल 1.45 करोड़ मतदाता हैं।


ग्राउंड रिपोर्ट: वीआईपी इलाकों से लेकर झुग्गियों तक की तैयारी

इस अभियान की जमीनी हकीकत जानने के लिए फ़ेडरल देश की टीम ने दिल्ली के 'एपीजे अब्दुल कलाम लेन' (पूर्व में औरंगज़ेब लेन) का दौरा किया। यहाँ चुनाव आयोग की तरफ से तैनात बीएलओ डॉक्टर चित्तदीप चटर्जी (जो पेशे से दिल्ली सरकार के स्कूल में शिक्षक हैं) कोठियों में जाकर फॉर्म बांटते और लोगों को समझाते नजर आए।

यहाँ पोलिंग स्टेशन संख्या 61 (PS-61, AC-40) में तैनात बीएलओ डॉक्टर चित्तदीप चटर्जी (जो बाय प्रोफेशन दिल्ली सरकार के स्कूल में शिक्षक हैं) कोठियों में जाकर प्रपत्र वितरित कर रहे थे. उन्होंने इस प्रक्रिया की कई व्यावहारिक बारीकियों को सामने रखा:

क्षेत्रवार रणनीति: डॉ. चटर्जी ने बताया, "मेरे पोलिंग स्टेशन क्षेत्र में कुल 785 वोटर हैं. यहाँ बड़े अधिकारियों की कोठियां भी हैं, सरकारी क्वार्टर भी हैं और पास में ही झुग्गी क्लस्टर भी है. हमने तय किया है कि पहले कोठियों का काम निपटाकर झुग्गी बस्तियों और ऑफिसर्स फ्लैट्स की तरफ बढ़ेंगे, ताकि अगले 10-12 दिनों के भीतर सभी फॉर्म बांट दिए जाएं और लोग उन्हें भरना शुरू कर दें."

पारिवारिक लिंकेज की चुनौती: डॉ. चटर्जी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा समय लोगों को 2002 का रिकॉर्ड समझाने में लग रहा है. हालांकि, चुनाव आयोग ने पहले ही दिल्ली में लगभग 40% से अधिक डेटा को पहले से ही मैप (लिंक) कर रखा है, लेकिन बाकी बचे 60% लोगों को रिकॉर्ड ढूंढने में बीएलओ मदद कर रहे हैं. इसके लिए मतदाता ईसीआई की वेबसाइट पर जाकर भी अपना पुराना रिकॉर्ड खोज सकते हैं.

शादीशुदा महिलाओं के लिए विशेष नियम: ग्राउंड रिपोर्ट में एक बड़ी तकनीकी बात यह सामने आई कि जिन महिलाओं की शादी साल 2002 के बाद हुई है और वे किसी दूसरे राज्य या शहर से दिल्ली आई हैं, उनका विवरण उनके पति या बच्चों के नाम से मैच नहीं हो सकता. ऐसी महिलाओं का वेरिफिकेशन उनके माता-पिता या दादा-दादी के पैतृक रिकॉर्ड से ही टैली किया जाएगा. यदि उनके पास दसवीं का सर्टिफिकेट नहीं है, तो माता-पिता के नाम की पुष्टि के लिए पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों का सहारा लिया जा रहा है.

बीएलओ पर काम का दबाव और तनाव: दिल्ली में कितनी बड़ी चुनौती?

इस तरह के गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियानों को लेकर एक बड़ा सवाल बीएलओ (BLO) पर काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव को लेकर भी उठता रहा है. हाल ही में कुछ अन्य राज्यों में जब यह प्रक्रिया चलाई गई थी, तब कई ऐसी घटनाएं और जानकारियां सामने आई थीं कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे बीएलओ भारी मानसिक तनाव और प्रशासनिक दबाव में काम कर रहे थे.

दिल्ली में इस चुनौती और पहले दिन के माहौल पर जब बीएलओ डॉ. चित्तदीप चटर्जी से सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा:

"यह सच है कि कुछ राज्यों से बीएलओ के तनाव में होने की खबरें आई थीं, लेकिन दिल्ली में हमें ऐसा कोई माहौल नहीं दिख रहा है. इस अभियान को लेकर हमारी 20 तारीख से ही लगातार गहन ट्रेनिंग चल रही थी. हर ट्रेनिंग सेशन में हमारे एसडीएम (इलेक्शन) सर, मैडम और चुनाव से जुड़े सभी आला अधिकारी हर छोटी से छोटी चीज को खुद बारीकी से देख रहे थे और हमें समझा रहे थे."

उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली में यह प्रक्रिया तीसरे फेज में चल रही है. चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों ने पिछले दो फेज में सामने आए मुद्दों और तकनीकी दिक्कतों से काफी कुछ सीखा है. उन कमियों को दूर करके इस बार व्यवस्था को बहुत सुधारा गया है. डॉ. चटर्जी ने भरोसा जताते हुए कहा:

"हमारे एईआरओ साहब और हमारे सुपरवाइजर लगातार हमारे साथ सीधे संपर्क में हैं. फील्ड में काम करने के दौरान अगर कोई भी व्यावहारिक या तकनीकी समस्या आती है, तो हम तुरंत उनसे बात करके उसे क्लेरिफाई (सुलझा) कर लेते हैं. आज पहला दिन है, आगे कोठियों और झुग्गियों में काम करते समय अलग-अलग तरह की व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन हमें उन्हें शांति से हैंडल करना आता है. प्रशासनिक सपोर्ट इतना मजबूत है कि मुझे नहीं लगता कि दिल्ली में बीएलओ के ऊपर ऐसा कोई दबाव या तनावपूर्ण माहौल बनेगा."

क्या कहते हैं आम मतदाता?

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान हमारी टीम ने स्थानीय निवासियों से भी बातचीत की, जिन्होंने आज इस प्रक्रिया के तहत अपना फॉर्म प्राप्त किया या भरा।

एपीजे अब्दुल कलाम लेन पर रहने वाले विजय कुमार ने बताया कि वह साल 1996 से यहीं रह रहे हैं और यहीं नौकरी करते हैं। बीएलओ द्वारा फॉर्म दिए जाने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली।

विजय कुमार ने बताया कि "मुझे बीएलओ साहब की तरफ से यह फॉर्म मिला है। अच्छी बात यह रही कि मेरा साल 2002 का पुराना रिकॉर्ड मिल गया है, जिससे फॉर्म भरने में काफी सहूलियत और आराम हो गया है। अधिकारी ने हमें अच्छे से पूरी प्रक्रिया समझा दी है। हमें यह फॉर्म पूरी तरह भरकर दो-चार दिनों में वापस बीएलओ साहब को सौंपना है।"

वहीं दूसरी तरफ, इसी इलाके में रहने वाले एक अन्य मतदाता मदन लाल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मदन लाल काफी लंबे समय से दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस नई प्रक्रिया को समझने और सीखने में थोड़ा वक्त तो जरूर लगेगा, लेकिन उनका विवरण अब मैच हो गया है।

मदन लाल ने बताया कि "मेरा साल 2002 से यहाँ का वोटर आईडी कार्ड नहीं बना हुआ था। ऐसे में मुझसे माता या पिता के गांव के पते या वोटर आईडी कार्ड का विवरण मांगा गया। वो जानकारी देने के बाद ही मेरा यह फॉर्म भरा जा सका है। जो भी जरूरी चीजें चुनाव आयोग की तरफ से मांगी जाएंगी, वो तो देनी ही पड़ेंगी।"

विजय कुमार और मदन लाल जैसे मतदाताओं के अनुभवों से साफ है कि जिन लोगों के पास पुराने रिकॉर्ड नहीं हैं, उनके लिए बीएलओ माता-पिता या पैतृक दस्तावेजों की मदद से प्रक्रिया को पूरा करवा रहे हैं।

अधिकारियों को नहीं है कोई तनाव, ट्रेनिंग है मजबूत

पिछले कुछ राज्यों में जब एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया चली थी, तब बीएलओ के भारी तनाव में होने की खबरें आई थीं। लेकिन दिल्ली में पहले दिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। डॉ. चटर्जी ने बताया कि 20 तारीख से ही उनकी गहन ट्रेनिंग चल रही थी। एसडीएम (इलेक्शन) और सभी वरिष्ठ पदाधिकारी लगातार उनके संपर्क में हैं। दिल्ली में यह अभियान तीसरे फेज में चल रहा है, इसलिए पिछले दो फेज की गलतियों से सीखकर इस बार व्यवस्था को काफी सुधारा गया है।


क्या है यह SIR प्रक्रिया और 2002 का कनेक्शन?

सरल शब्दों में कहें तो यह आम दिनों में होने वाले वोटर आईडी संशोधन से थोड़ा अलग और बेहद महत्वपूर्ण काम है। इस प्रक्रिया के तहत बीएलओ (BLO) हर घर में जाकर गणना प्रपत्र (Enumeration Form) की दो कॉपियां देंगे।

2002 का रिकॉर्ड जरूरी: मतदाताओं को इस फॉर्म में अपनी जानकारी 2002 में हुए पिछले एसआईआर के आधार पर भरनी होगी।

दो कॉपियां मिलेंगी: फॉर्म की एक प्रति (कॉपी) रसीद के तौर पर मतदाता के पास ही रहेगी, जबकि दूसरी प्रति सही-सही भरकर बीएलओ को वापस देनी होगी।

ऑनलाइन सुविधा: यदि कोई चाहे तो अपने इस फॉर्म की जानकारी ऑनलाइन भी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर जमा कर सकता है।

बंद घरों के लिए नियम: अगर सर्वेक्षण के दौरान किसी का घर बंद मिलता है, तो बीएलओ वहां कम से कम तीन बार चक्कर लगाएंगे ताकि कोई छूट न जाए।

अतिक्रमण वाले मामलों पर नजर: मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि हाल ही में जिन इलाकों में अतिक्रमण विरोधी अभियान चला है और लोगों के मकान ध्वस्त हुए हैं, उनके मामलों को भारत निर्वाचन आयोग के सामने अलग से उठाया जाएगा।

दिल्ली के मतदाताओं का पूरा गणित (एक नजर में)

कुल मतदाता: दिल्ली में कुल 1.45 करोड़ वोटर हैं।

पुरुष मतदाता: इनमें से पुरुष वोटरों की संख्या लगभग 77.11 lakh है।

महिला मतदाता: महिला वोटरों की संख्या करीब 67.98 लाख है।

थर्ड जेंडर मतदाता: थर्ड जेंडर के वोटरों की संख्या 1,024 है।

दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) वोटर: दिव्यांग श्रेणी में आने वाले मतदाताओं की संख्या 76,155 है।

युवा वोटर: 18 से 19 साल के बीच के युवा वोटरों की संख्या 3,29,130 है।

बुजुर्ग वोटर: दिल्ली में 100 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या 192 है।

कुल मतदान केंद्र (बूथ): दिल्ली के 7 लोकसभा और 70 विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर कुल 13,033 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।

महत्वपूर्ण तारीखें: डायरी में नोट कर लें

घर-घर जाकर सत्यापन का यह काम पूरा होने के बाद आगे का शेड्यूल इस प्रकार रहेगा:

5 अगस्त 2026: मतदाता सूची के मसौदे (ड्राफ्ट) का प्रकाशन होगा।

5 अगस्त से 4 सितंबर 2026: आम लोग और राजनीतिक दल अपनी आपत्तियां या दावे दर्ज करा सकेंगे।

5 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026: दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर नोटिस जारी होंगे।

7 अक्टूबर 2026: दिल्ली की फाइनल और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा।

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