
AAP विधायक के केस से हटीं जस्टिस स्वर्ण कांता, नई बेंच करेगी सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब नीति मामले में AAP के पूर्व विधायक नरेश बालियान से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है
दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की याचिका पर आदेश सुनाने से पहले एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करने से खुद को पीछे हटा लिया है।
मकोका (MCOCA) मामले में खुद को किया अलग
दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व विधायक नरेश बालियान से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। गौरतलब है कि नरेश बालियान के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।
पूर्व विधायक ने इस मामले में जमानत प्राप्त करने के उद्देश्य से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति शर्मा ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और खुद को इस केस से अलग कर लिया।
जस्टिस शर्मा द्वारा केस छोड़ने के बाद अब यह मामला आगामी 23 अप्रैल को किसी अन्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (लिस्ट) किया जाएगा। हालांकि, न्यायमूर्ति शर्मा ने इस मामले से खुद को अलग करने के पीछे किसी विशिष्ट कारण का खुलासा नहीं किया है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जस्टिस शर्मा ही अरविंद केजरीवाल और शराब नीति से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई कर रही हैं।
आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया और तंज
जस्टिस शर्मा के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के प्रवक्ता अनुराग ढांढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए अदालत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
"पूर्व विधायक नरेश बालियान की जमानत का मामला एक साल से भी अधिक समय से लंबित पड़ा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि वर्तमान या पूर्व विधायकों और सांसदों के मामलों को 'डे टू डे हियरिंग' (प्रतिदिन सुनवाई) के माध्यम से जल्द से जल्द निपटाया जाए। उम्मीद है कि अब जल्द न्याय मिलेगा।"
आप प्रवक्ता के इस बयान को कानूनी हलकों में सीधे तौर पर न्यायाधीश पर किए गए एक 'तंज' के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने मामले के लंबे समय तक लटके रहने की ओर इशारा किया है। अब सभी की निगाहें 23 अप्रैल की तारीख पर टिकी हैं, जब नई बेंच इस मामले को सुनेगी।

