Delhi-NCR की हवा हुई जहरीली, बढ़ गया प्रदूषण, GRAP-1 हुआ लागू, जानिए अब क्या-क्या होंगे बदलाव?
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Delhi-NCR की हवा हुई जहरीली, बढ़ गया प्रदूषण, GRAP-1 हुआ लागू, जानिए अब क्या-क्या होंगे बदलाव?

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने तत्काल प्रभाव से ग्रैप-1 (GRAP Stage-I) लागू कर दिया है। 16 अप्रैल को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 226 दर्ज किया गया।


दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के निवासियों के लिए एक बार फिर चिंता की खबर है। बढ़ती गर्मी और धूल भरी हवाओं के बीच दिल्ली की वायु गुणवत्ता एक बार फिर 'खराब' श्रेणी में पहुंच गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने गुरुवार को स्थिति की समीक्षा करने के बाद पूरे दिल्ली-एनसीआर में तत्काल प्रभाव से 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' यानी ग्रैप (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

16 अप्रैल, 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर 226 दर्ज किया गया। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और धूल के बढ़ते गुबार की वजह से प्रदूषण के स्तर में यह उछाल देखा गया है। आईएमडी (IMD) और आईआईटीएम (IITM) के पूर्वानुमानों के अनुसार, अगले दो दिनों तक हवा की गुणवत्ता इसी 'खराब' श्रेणी में रहने की आशंका है। इसी को देखते हुए ग्रैप की उप-समिति ने एहतियाती कदम उठाने का निर्णय लिया है ताकि हालात और न बिगड़ें।

क्या है ग्रैप-1 और अब क्या होगा?

ग्रैप-1 लागू होने का मतलब है कि प्रशासन अब प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर पैनी नज़र रखेगा। इसके तहत कुछ प्रमुख कदम उठाए जाते हैं:

धूल पर नियंत्रण: सड़कों पर पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा और निर्माण स्थलों पर धूल को उड़ने से रोकने के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा।

कूड़ा जलाने पर रोक: खुले में कूड़ा या कचरा जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मैकेनाइज्ड स्वीपिंग: सड़कों की सफाई के लिए मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।

एंटी-स्मॉग गन: भारी निर्माण कार्यों वाली जगहों पर एंटी-स्मॉग गन का उपयोग अनिवार्य होगा।

CAQM ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ग्रैप-1 के नियमों का सख्ती से पालन कराएं और इसकी नियमित समीक्षा करें। साथ ही आम नागरिकों से भी 'सिटिजन चार्टर' का पालन करने की अपील की गई है।

प्रदूषण और माइग्रेन का कनेक्शन

हवा की बिगड़ती गुणवत्ता के बीच एक नई मेडिकल रिसर्च ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। 'न्यूरोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से माइग्रेन (आधा सीसी का दर्द) का खतरा काफी बढ़ जाता है।

इजरायल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इडो पेलेस के अनुसार, माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए पर्यावरण के कारक 'ट्रिगर' का काम करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि जहां गर्मी और उमस माइग्रेन के खतरे को बढ़ाते हैं, वहीं प्रदूषण के स्तर में अचानक होने वाला उछाल माइग्रेन के अटैक को तेज कर सकता है। दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि खराब हवा न केवल फेफड़ों बल्कि नसों और दिमाग पर भी असर डाल रही है।

अब आगे क्या होगा?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उनकी टीम स्थिति पर करीब से नज़र रख रही है। यदि वायु गुणवत्ता और अधिक गिरती है, तो ग्रैप के दूसरे या तीसरे चरण को भी लागू किया जा सकता है। फिलहाल प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि प्रदूषण के स्तर को 'खराब' (Poor) से 'बेहद खराब' (Very Poor) की श्रेणी में जाने से रोका जा सके।

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