महिला आरक्षण पर BJP के आरोपों को DMK ने किया खारिज, परिसीमन से जोड़ने को बताया राजनीतिक चाल
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महिला आरक्षण पर BJP के आरोपों को DMK ने किया खारिज, परिसीमन से जोड़ने को बताया राजनीतिक चाल

डीएमके (DMK) ने भाजपा के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि विपक्षी 'INDIA' गठबंधन महिला आरक्षण बिल के गिरने के लिए जिम्मेदार है। डीएमके नेताओं ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।


महिला आरक्षण बिल को लेकर देश में छिड़ी राजनीतिक जंग के बीच, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने शनिवार (18 अप्रैल) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा ने आरोप लगाया था कि 'INDIA' गठबंधन के दलों ने महिला आरक्षण बिल के क्रियान्वयन में अड़ंगा डाला है। इसके जवाब में डीएमके ने केंद्र सरकार पर इस संवेदनशील मुद्दे को 'परिसीमन' और 'जनगणना' के साथ जोड़कर इसका राजनीतिकरण करने का गंभीर आरोप लगाया है।

डीएमके नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है, लेकिन वे भाजपा सरकार द्वारा थोपे गए उस "शर्तों वाले ढांचे" (Conditional Framework) के खिलाफ हैं, जो इसके लागू होने को भविष्य की जनगणना और विवादित परिसीमन अभ्यास से जोड़ता है।

पी. विल्सन ने मंशा पर उठाए सवाल

डीएमके के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने केंद्र सरकार के दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि जो काम तुरंत किया जा सकता था, उसे सरकार ने जानबूझकर जटिल बना दिया है। विल्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि उन्होंने शनिवार को एक 'प्राइवेट मेंबर बिल' पेश करने की कोशिश की थी, जिसमें मांग की गई थी कि संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से अलग किया जाए।

हालांकि, विल्सन ने बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत बिल पेश करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा, "जो काम इतनी आसानी से हो सकता था, उसे सिर्फ इसलिए उलझाया गया क्योंकि भाजपा की मंशा महिला आरक्षण लागू करने की है ही नहीं। सरकार का रुख साबित करता है कि वे इसका इस्तेमाल केवल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं, न कि वास्तविक सुधार के लिए।" उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आरक्षण 2029 के आसपास लागू होना है, तो अभी इसे पास करने की इतनी हड़बड़ी क्यों है?

परिसीमन के आधार पर विरोध

विल्सन ने परिसीमन पर डीएमके के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि संसदीय क्षेत्रों के पुनर्गठन के लिए केवल जनसंख्या ही एकमात्र पैमाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि उन राज्यों को सजा नहीं मिलनी चाहिए जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है। डीएमके की मांग है कि परिसीमन के लिए राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP), औद्योगिक विकास और सकल नामांकन अनुपात जैसे कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिए। विल्सन ने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए भी कोटा शामिल किया जाए और परिसीमन पर रोक को 2051 तक बढ़ाया जाए।

"आरक्षण को बंधक नहीं बना सकते" - कनिमोझी सोमू

इसी सुर में सुर मिलाते हुए डीएमके नेता कनिमोझी एनवीएन सोमू ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन का "बंधक" नहीं बनाया जा सकता। 'द फेडरल' से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब 2023 में पहली बार यह बिल लाया गया था, तभी डीएमके ने मांग की थी कि इसे जनगणना या सीमाओं के पुनर्निर्धारण का इंतजार किए बिना मौजूदा सीटों पर ही तुरंत लागू किया जाए।

उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, "आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना केवल यह दिखाता है कि भाजपा इस मुद्दे पर राजनीति करना चाहती है। केंद्र ने 2024 के चुनावों से पहले इसे एक बड़े सुधार के रूप में पेश किया, जबकि वे जानते थे कि इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा।" उन्होंने इसे भाजपा का एक "गिमिक" (Gimmick) करार दिया।

तमिलनाडु का 'द्रविड़ियन मॉडल' और महिला सशक्तिकरण

कनिमोझी सोमू ने भाजपा के उन आरोपों को भी खारिज किया कि डीएमके का विरोध 2026 के विधानसभा चुनावों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि पार्टी का रुख संघवाद और राज्य की स्वायत्तता के प्रति उसकी विचारधारा पर आधारित है। डीएमके के रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "तमिलनाडु में स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण और सरकारी नौकरियों में बढ़ी हुई हिस्सेदारी दिखाती है कि हमने जमीनी स्तर पर कैसे काम किया है। असली सवाल यह है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर इसे तुरंत लागू करने से क्यों कतरा रही है?"

दक्षिण बनाम उत्तर का विवाद

यह बहस केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारतीय राज्यों की उस चिंता से भी जुड़ी है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन उनके प्रतिनिधित्व को कम कर देगा। दक्षिण के राज्यों का मानना है कि परिवार नियोजन और जनसंख्या स्थिरता के उनके प्रयासों के लिए उन्हें संसद में कम सीटें देकर दंडित किया जा रहा है।

जब कनिमोझी से पूछा गया कि डीएमके ने खुद महिलाओं को अधिक टिकट या कैबिनेट में वित्त और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग क्यों नहीं दिए, तो उन्होंने कहा, "हम लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार कर रहे हैं। 'द्रविड़ियन मॉडल 2.0' सरकार महिला सशक्तिकरण पर बड़े पैमाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद जब फिर से हमारी सरकार बनेगी, तो आपको इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा।"

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