
पढ़ी-लिखी बेटियां भी नहीं सुरक्षित, दहेज बना मौत की वजह
NCRB रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में दहेज हत्या के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज मौतों पर सख्त जांच की जरूरत बताई।
भारत में सख्त कानूनों और जागरूकता अभियानों के बावजूद दहेज से जुड़ी हिंसा के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, वर्ष 2024 में देश के महानगरों में दहेज हत्या के सबसे अधिक मामले लगातार पाँचवें साल दिल्ली में दर्ज किए गए, जबकि दहेज निषेध अधिनियम के तहत सबसे ज्यादा मामले बेंगलुरु में सामने आए।
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 2024 के दौरान दहेज हत्या के 109 मामले दर्ज किए गए। वहीं बेंगलुरु में दहेज निषेध अधिनियम के तहत 878 मामले दर्ज हुए, जो देश के महानगरों में दर्ज कुल दहेज शिकायतों का लगभग 87 प्रतिशत है।यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक को ऐसे राज्य बताया, जहाँ सख्त कानूनों और महिलाओं में बढ़ती शिक्षा के बावजूद दहेज हत्याओं की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से जुड़े एक दहेज हत्या मामले की सुनवाई के दौरान आई। अदालत ने आरोपी पति को दी गई जमानत रद्द करते हुए कहा कि दहेज हत्या के मामलों में अधिक सख्ती और गहन जांच की आवश्यकता है। इसी बीच उत्तर प्रदेश से जुड़ी दो हालिया मौतों ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा है।
भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत
भोपाल में 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा, जो मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं, 12 मई को कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिलीं। पुलिस के अनुसार, ट्विशा की मुलाकात अपने पति से वर्ष 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी और दोनों ने दिसंबर 2025 में शादी की थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्विशा ने अपनी एक मित्र को चैट में बताया था कि वह शादी में खुद को फंसा हुआ महसूस कर रही थीं। उनके परिवार ने उनके वकील पति और सास पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया। उनकी सास एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं।पुलिस ने दहेज प्रताड़ना और मारपीट के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। हालांकि एम्स भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा की मौत का कारण फांसी बताया गया, लेकिन उनके शरीर पर चोट के निशान भी मिलने की बात सामने आई। परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की और आगे की जांच पूरी होने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
ग्रेटर नोएडा में दीपिका की मौत
ट्विशा मामले के कुछ ही दिनों बाद, 17 मई को ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 इलाके में 24 वर्षीय दीपिका ने कथित रूप से अपने घर की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस के अनुसार, दीपिका की शादी को लगभग 14 महीने हुए थे और उन्हें दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि उनसे टोयोटा फॉर्च्यूनर और 50 लाख रुपये की मांग की जा रही थी।
दीपिका के पिता ने दावा किया कि शादी में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मौत के बाद पुलिस को उनके शरीर पर चोट के निशान मिले और पिता की शिकायत के आधार पर पति ऋतिक और ससुर मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया।
समाज के हर वर्ग में फैली समस्या
ये दोनों मामले दिखाते हैं कि दहेज से जुड़ी हिंसा केवल किसी एक वर्ग, शहर या पेशे तक सीमित नहीं है। यह समस्या समाज के हर स्तर में मौजूद है।
दहेज विरोधी कानून
भारत में दहेज विरोधी कानून कागजों पर बेहद सख्त हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 के तहत, यदि शादी के सात वर्षों के भीतर किसी महिला की असामान्य परिस्थितियों में मौत होती है और मौत से पहले दहेज प्रताड़ना के सबूत मिलते हैं, तो इसे दहेज हत्या माना जाता है।
इस अपराध में न्यूनतम सात साल की सजा का प्रावधान है, जो उम्रकैद तक बढ़ सकती है। वहीं दहेज निषेध अधिनियम के तहत दहेज देना, लेना या मांगना भी दंडनीय अपराध है।
कानून के बावजूद जारी अपराध
कानून, गिरफ्तारियों और जागरूकता अभियानों के बावजूद देशभर में हर साल दहेज से जुड़े अपराध सामने आते रहते हैं। जांच एजेंसियों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक घरेलू हिंसा, ससुराल पक्ष का दबाव और दहेज की सामाजिक स्वीकार्यता ऐसे अपराधों के पीछे प्रमुख कारण हैं।

