बालाजी केस में ED का बड़ा कदम, अब विजय सरकार के फैसले पर नजर
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बालाजी केस में ED का बड़ा कदम, अब विजय सरकार के फैसले पर नजर

ED ने कैश-फॉर-जॉब्स घोटाले में DMK नेता सेंटिल बालाजी पर मुकदमा चलाने के लिए तमिलनाडु की नई विजय सरकार से मंजूरी मांगी है।


प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार से औपचारिक रूप से डीएमके नेता और पूर्व मंत्री वी. सेंटिल बालाजी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। यह मामला कथित “कैश-फॉर-जॉब्स” घोटाले से जुड़ा है, जो 2011 से 2016 के बीच एआईएडीएमके सरकार में परिवहन मंत्री रहते हुए उनके कार्यकाल से संबंधित बताया जा रहा है।

15 मई को मुख्य सचिव एम. साइकुमार को भेजे गए तीन पन्नों के पत्र में ED ने मामले से जुड़े सभी सबूत, गोपनीय जांच रिपोर्ट और चेन्नई की विशेष पीएमएलए अदालत में दायर अभियोजन शिकायत की प्रति एक पेन ड्राइव के माध्यम से सौंपी है।

DMK के लिए पहली बड़ी कानूनी चुनौती

केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली पिछली डीएमके सरकार ने जानबूझकर अभियोजन स्वीकृति देने में देरी की, क्योंकि बालाजी उस समय सरकार में मंत्री और सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता थे। ED ने नई TVK की अगुवाई वाली सरकार से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द अनुमति प्रदान करे ताकि मामले की सुनवाई औपचारिक रूप से शुरू हो सके।मुख्य सचिव कार्यालय ने इस पत्र की प्राप्ति की पुष्टि कर दी है। अप्रैल 2026 विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्ष में पहुंची डीएमके के लिए इसे पहली बड़ी कानूनी चुनौती माना जा रहा है।

क्या है कैश-फॉर-जॉब्स मामला?

यह मामला उन शिकायतों से जुड़ा है जिनमें आरोप लगाया गया था कि राज्य के परिवहन विभाग, विशेष रूप से मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (MTC), में नौकरी दिलाने के नाम पर उम्मीदवारों से रिश्वत ली गई।आरोपों के अनुसार, जयललिता के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके सरकार में परिवहन मंत्री रहते हुए सेंटिल बालाजी के कार्यकाल के दौरान नौकरी चाहने वालों को नियुक्ति के बदले पैसे देने के लिए मजबूर किया गया।

चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर ED ने पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। जांच में बालाजी, उनके भाई आरवी अशोक कुमार और उनके निजी सहायकों—बी. शन्मुगम, एम. कार्तिकेयन सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए।

‘अपराध की कमाई को किया गया सफेद’

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि रिश्वत के जरिए हासिल की गई रकम को अलग-अलग माध्यमों से सफेद किया गया। कई ऐसे उम्मीदवारों की शिकायतों के आधार पर चार्जशीट दायर की गई, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने नौकरी के लिए पैसे दिए लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं मिली।एजेंसी ने इस पूरे नेटवर्क को 2011-2016 के दौरान सत्ता के “संगठित दुरुपयोग” का मामला बताया है।

पहले राज्यपाल से मांगी गई थी मंजूरी

ED ने पहली बार 14 मई 2025 को तत्कालीन राज्यपाल से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। लेकिन 23 फरवरी 2026 को यह अनुरोध लौटा दिया गया।डीएमके सरकार ने उस समय कहा था कि इस मामले में मंजूरी देने का अधिकार राजभवन के पास नहीं, बल्कि राज्य सरकार के पास है।

अक्टूबर 2025 में तत्कालीन मुख्य सचिव ने भी राज्यपाल को सलाह दी थी कि ED सीधे मुख्य सचिव से संपर्क करे। अब एजेंसी ने नई सरकार से दोबारा अनुमति मांगी है और स्पष्ट किया है कि लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की स्वीकृति अनिवार्य है।

विजय सरकार के लिए शुरुआती परीक्षा

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब TVK-नीत सरकार ने हाल ही में सत्ता संभाली है और राज्य में डीएमके के लगभग एक दशक लंबे शासन का अंत हुआ है।डीएमके नेता पहले भी इस मामले को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार देते रहे हैं, जबकि ED लगातार यह दावा करती रही है कि पिछली सरकार में बालाजी के मंत्री बने रहने के कारण अभियोजन स्वीकृति में देरी हुई।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह मामला विजय सरकार के लिए भ्रष्टाचार विरोधी छवि और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर शुरुआती बड़ी परीक्षा बन सकता है।

अदालत में लंबित है मामला

ED ने अपने पत्र में मुकदमे के अंतिम परिणाम पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह जरूर कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़नी चाहिए।सेंटिल बालाजी फिलहाल डीएमके के सक्रिय नेता और विधायक हैं। सोमवार शाम तक उन्होंने इस ताजा घटनाक्रम पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया था।यह मामला फिलहाल विशेष पीएमएलए अदालत में लंबित है, जहां राज्य सरकार की मंजूरी मिलने तक सुनवाई रुकी हुई है।

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