
136 करोड़ की फर्जी गारंटी घोटाले में रिलायंस पावर के CFO गिरफ्तार
दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा ने 136 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी के जरिए SECI टेंडर घोटाले में रिलायंस पावर के CFO समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जांच जारी है।
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करते हुए रिलायंस पावर लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) से टेंडर हासिल करने के लिए 136 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने का आरोप है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में रिलायंस पावर लिमिटेड के सीएफओ अशोक कुमार पाल (50), ओडिशा स्थित बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल (54) और कोलकाता निवासी अमरनाथ दत्ता (50) शामिल हैं।
इस मामले की शुरुआत एसईसीआई के प्रबंधक बिबलेश मीणा की शिकायत से हुई, जिसके आधार पर 24 जून 2025 को ईओडब्ल्यू थाने में भारतीय न्याय संहिता और आईटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।
जांच में सामने आया कि रिलायंस पावर लिमिटेड की सहायक कंपनी रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड ने एसईसीआई के टेंडर के दौरान 68.20 करोड़ रुपये की दो फर्जी बैंक गारंटियां जमा की थीं। ये गारंटियां कथित तौर पर विदेशी बैंकों के नाम पर तैयार की गई थीं, जिससे कंपनी की वित्तीय विश्वसनीयता को मजबूत दिखाया जा सके।
आरोप है कि इस धोखाधड़ी को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने फर्जी ईमेल संचार और भारतीय स्टेट बैंक के नाम से जारी नकली स्ट्रक्चर्ड फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम (एसएफएमएम) पुष्टिकरण का इस्तेमाल किया। बाद में बैंक ने इन दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी बताया।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अशोक कुमार पाल ने पार्थ सारथी बिस्वाल और अमरनाथ दत्ता के साथ मिलकर बिचौलियों के जरिए मोटी रकम देकर ये फर्जी बैंक गारंटियां तैयार करवाई थीं।आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त सुबोध कुमार गोस्वामी के मुताबिक, आरोपियों ने विदेशी बैंकों के नाम पर नकली गारंटियों की व्यवस्था कर एसईसीआई का टेंडर हासिल करने की साजिश रची थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी गोस्वामी की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने जांच के बाद 15 अप्रैल को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में अदालत ने उन्हें 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी अशोक कुमार पाल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और वर्ष 2018 से रिलायंस एडीएजी समूह के साथ जुड़े हुए हैं।फिलहाल इस पूरे मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों और कड़ियों की तलाश में जुटी हुई है।

