सोने पर पीएम मोदी की अपील बेअसर? केरल में मांग बढ़ी
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सोने पर पीएम मोदी की अपील बेअसर? केरल में मांग बढ़ी

पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील और बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी के बाद केरल में गोल्ड की मांग बढ़ गई है। कारोबारी तस्करी और संकट की आशंका जता रहे हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “देश पहले” अपील, जिसमें लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की बात कही गई थी, उसका केरल के सर्राफा बाजारों में उल्टा असर देखने को मिला है।सोना खरीदने से परहेज की अपील के बाद राज्यभर में सोने की मांग अचानक बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने देश की अर्थव्यवस्था, सरकारी नीतियों और भारतीय समाज में सोने की सांस्कृतिक अहमियत से जुड़ी कई गहरी समस्याओं को उजागर कर दिया है।

सरकार का मकसद विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को कम करना था, लेकिन इसका असर उल्टा हुआ। लोगों में यह डर बैठ गया कि आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं या सरकार नई पाबंदियां लगा सकती है। इसी आशंका में बड़ी संख्या में ग्राहक ज्वेलरी दुकानों की ओर दौड़ पड़े।यह सब उस समय हुआ जब केंद्र सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को अचानक काफी बढ़ा दिया, जिसके बाद कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं।

सोने की कीमतों में बड़ा उछाल

सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। इसका असर तुरंत बाजार में दिखा।केरल में सोने की कीमत प्रति ग्राम 1,275 रुपये तक बढ़ गई और एक सोवरेन (8 ग्राम) सोने की कीमत 1.23 लाख रुपये तक पहुंच गई।व्यापारियों का कहना है कि इतिहास में पहली बार एक ही दिन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उनके मुताबिक, “पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक दिन में सोने की कीमत 1,275 रुपये प्रति ग्राम बढ़ी हो। उसी समय प्रधानमंत्री लोगों से कह रहे हैं कि एक साल तक सोना न खरीदें। फिर सरकार ने आयात शुल्क भी 15 प्रतिशत कर दिया। इन सब बातों को एक साथ देखें तो साफ लगता है कि यह सेक्टर बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है।”

व्यापार संगठनों की चेतावनी

सोने के व्यापार से जुड़े संगठनों ने असामान्य एकजुटता दिखाते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि नीतिगत संकेत और अचानक बढ़ी कीमतें पूरे उद्योग को अस्थिर कर सकती हैं।

“तस्करी को बढ़ावा मिलेगा”

केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन (KGSMA) ने कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला अपने मकसद को ही नुकसान पहुंचा सकता है।संघ का कहना है, “अगर आयात शुल्क 15 प्रतिशत किया जाता है तो इससे स्वाभाविक रूप से सोने की तस्करी को बढ़ावा मिलेगा।”

संघ ने पुराने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब पहले आयात शुल्क 15 प्रतिशत था, तब भारत में करीब 1,000 टन सोना आयात हुआ था। लेकिन जब शुल्क घटाकर 6 प्रतिशत किया गया, तब आयात 800 टन से नीचे आ गया।यानी सिर्फ आयात शुल्क बढ़ाने से सोने की मांग कम नहीं होती।

KGSMA के राज्य महासचिव एडवोकेट अब्दुल नासिर ने कहा, “अगर अब एक किलो सोना तस्करी के जरिए भारत लाया जाता है, तो उस पर 20 लाख रुपये से ज्यादा का मुनाफा हो सकता है।”उन्होंने कहा कि अगर यही सोना समानांतर बाजार में बेचा जाए और उस पर 3 प्रतिशत GST भी बच जाए, तो मुनाफा करीब 24 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।व्यापारियों का मानना है कि इतनी बड़ी कमाई तस्करी गिरोहों को और मजबूत करेगी, जबकि ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारी नुकसान में चले जाएंगे।

“एक साल तक सोना न खरीदना व्यावहारिक नहीं”

ऑल केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन (AKGSMA) ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की अपील पर सवाल उठाया।संघ ने कहा, “विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा को लेकर सरकार की चिंता समझी जा सकती है, लेकिन लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने को कहना व्यावहारिक नहीं है।”

संघ का कहना है कि आम लोगों के लिए सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि सबसे भरोसेमंद निवेश है।AKGSMA ने अपने बयान में कहा, “सोने को सिर्फ आभूषण के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह आम लोगों की सबसे विश्वसनीय संपत्ति है।”

केरल में सोने का सामाजिक और आर्थिक महत्व

केरल में सोना सिर्फ शादी-ब्याह या परंपरा का हिस्सा नहीं है। यह आर्थिक सुरक्षा का भी बड़ा साधन है।संघ ने कहा, “बीमारी, दुर्घटना, बच्चों की पढ़ाई या किसी भी आर्थिक संकट में आम परिवार सबसे पहले सोने पर ही भरोसा करते हैं। यही उनकी सबसे आसान और भरोसेमंद वित्तीय सुरक्षा होती है।”व्यापारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण आने वाले समय में सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

शादी वाले परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित

सोने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर शादी वाले परिवारों पर पड़ रहा है।अब लोग या तो कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं या हल्के डिजाइन वाले गहनों की तरफ जा रहे हैं।त्रिशूर के स्थानीय व्यापारी मैनुअल इम्माट्टी कहते हैं, “लोग शादी में सोना खरीदना पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। वे अब कम मात्रा में या हल्के गहने खरीद रहे हैं।”उनके मुताबिक युवा पीढ़ी पहले से ही भारी पारंपरिक गहनों की बजाय हल्के और मॉडर्न डिजाइन पसंद कर रही थी। बढ़ती कीमतें इस बदलाव को और तेज करेंगी।

उन्होंने कहा, “सोने की मांग खत्म नहीं होगी। लोग सोने को सिर्फ गहना नहीं, बल्कि ऐसी संपत्ति मानते हैं जिसे कभी भी नकदी में बदला जा सकता है। यही वजह है कि सोने का आकर्षण कभी खत्म नहीं होगा।”“ईंधन खपत कम करें, सिर्फ सोने को निशाना न बनाएं”व्यापार संगठनों ने सरकार को कुछ वैकल्पिक सुझाव भी दिए हैं।AKGSMA का कहना है कि अगर सरकार विदेशी मुद्रा बचाना चाहती है, तो उसे पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने पर ध्यान देना चाहिए।संघ ने कहा, “सिर्फ सोने को निशाना बनाकर समस्या का समाधान नहीं होगा। देश में कई और सेक्टर हैं जहां आयात पर भारी निर्भरता है।”

उल्टा पड़ गया सरकार का संदेश?

जमीन पर जो स्थिति दिखाई दे रही है, उससे लगता है कि सरकार की नीति और लोगों के व्यवहार के बीच सीधा संबंध हमेशा काम नहीं करता।सरकार की अपील से सोने की मांग घटने की बजाय लोगों में जल्दी खरीदने की होड़ बढ़ गई।कीमतों को स्थिर करने की कोशिश की बजाय आयात शुल्क बढ़ने से बाजार में और अस्थिरता आ गई और सबसे बड़ी बात — अनिश्चितता के इस माहौल ने सोने की “सुरक्षित निवेश” वाली छवि को और मजबूत कर दिया।AKGSMA ने कहा, “सोना किसी देश की आर्थिक ताकत का भी प्रतीक होता है।”

कारोबारियों की बढ़ी चिंता

व्यापारियों का कहना है कि आने वाले कुछ महीने इस उद्योग के लिए बेहद अहम होंगे।अगर कीमतें ऊंची बनी रहीं और सरकार का रुख सख्त रहा, तो बाजार लंबे समय तक मंदी की चपेट में आ सकता है। छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।फिलहाल केरल के सर्राफा बाजारों में भीड़ तो है, लेकिन माहौल असमंजस भरा है।ग्राहक खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन डर के साथ। व्यापारी बिक्री कर रहे हैं, लेकिन चिंता के साथ।

नीति, कीमत और परंपरा के बीच फंसा भारत का सोना कारोबार फिलहाल ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर नया संकेत बाजार को अलग दिशा में धकेल रहा है और भविष्य पूरी तरह अनिश्चित दिखाई दे रहा है।

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