Indore Water Tragedy:गंदे पानी से मासूम सिया की मौत, अगले दिन एक्टिव हुआ कार्ड
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Indore Water Tragedy:गंदे पानी से मासूम सिया की मौत, अगले दिन एक्टिव हुआ कार्ड

इंदौर में दूषित पानी ने लील ली एक और जिंदगी। 27 दिसंबर को सिया को दस्त की शिकायत हुई थी। आरोप है कि उसने दूषित पानी पिया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई।


Indore Water Tragedy: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली उल्टी-दस्त की बीमारी ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस त्रासदी में दो साल की मासूम सिया प्रजापति की भी मौत हो गई। सिया इस बीमारी से जान गंवाने वाली सबसे कम उम्र के बच्चों में से एक थी। उसकी मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। सिया के पिता सूरज प्रजापति अपनी बेटी को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं। वे कहते हैं,'हम अपनी बच्ची के साथ बिताए पल कैसे भूल सकते हैं?' परिवार सिया को प्यार से 'लड्डू' कहकर बुलाता था। घर में उसकी हंसी-खुशी से खेलते और खाते हुए वीडियो और तस्वीरें आज भी परिवार को रुला देती हैं। सूरज प्रजापति भगीरथपुरा में किराए के मकान में रहते हैं और पैंट सिलाई का काम करते हैं।

परिजनों के अनुसार, 27 दिसंबर को सिया को दस्त की शिकायत हुई थी। आरोप है कि उसने दूषित पानी पिया था, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। पहले उसे स्थानीय डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां इलाज के बाद कुछ सुधार हुआ। लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी हालत फिर से खराब हो गई। इसके बाद उसे सरकारी चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जब वहां भी सुधार नहीं हुआ तो सिया को शहर के सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया था। उसके लीवर में मवाद भर गया था, पेट में सूजन आ गई थी और उसे निमोनिया सहित कई गंभीर बीमारियां हो गई थीं। आखिरकार 10 फरवरी की सुबह सिया ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

सूरज प्रजापति बताते हैं कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और बहुत चंचल स्वभाव की थी। वे कहते हैं कि जब भी वे रात को काम से घर लौटते थे, सिया दौड़कर उनकी गोद में आ जाती थी। इन यादों को याद करते ही वे टूट जाते हैं। उनकी पत्नी भी बेटी की मौत के बाद बेहद दुखी हैं और लगातार रो रही हैं।

इलाज के दौरान परिवार को आयुष्मान कार्ड से जुड़ी परेशानी का भी सामना करना पड़ा। सूरज का कहना है कि अस्पताल में भर्ती के शुरुआती दिनों में उनका आयुष्मान कार्ड सक्रिय नहीं था। उन्होंने केवाईसी दस्तावेज जमा कर कार्ड एक्टिव कराने की कोशिश की और दो बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई। बेटी की मौत के अगले दिन उन्हें फोन आया कि उनका कार्ड सक्रिय हो गया है और वे शिकायत वापस ले लें।

हालांकि, उन्होंने बताया कि दोनों सरकारी अस्पतालों में सिया का इलाज मुफ्त में किया गया, लेकिन कुछ दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ीं। वे कहते हैं कि किसी भी तरह की आर्थिक सहायता उनकी बेटी को वापस नहीं ला सकती। अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि भगीरथपुरा में दूषित पानी से फैली इस बीमारी के कारण अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोगों की मौत अन्य बीमारियों से भी हुई थी, लेकिन मानवीय आधार पर सभी मृतकों के परिवारों को सहायता दी गई है। मध्य प्रदेश सरकार ने 20 से अधिक मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

इस पूरे मामले की न्यायिक जांच भी चल रही है। जांच की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता को सौंपी गई है। एक सदस्यीय आयोग इस बात की जांच कर रहा है कि दूषित पानी की सप्लाई कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, इस घटना के बाद सवालों के घेरे में आ गया है। भगीरथपुरा की यह त्रासदी प्रशासन और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। वहीं, सिया जैसी मासूम की मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

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