झारखंड राज्यसभा चुनाव: परिमल नथवाणी जीते, कांग्रेस को झटका
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झारखंड राज्यसभा चुनाव: परिमल नथवाणी जीते, कांग्रेस को झटका

झारखंड राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित परिमल नथवाणी ने क्रॉस-वोटिंग के दम पर जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को मिली हार, इंडिया ब्लॉक के लिए बड़ा झटका।


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Jharkhand Rajyasabha Election: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में गुरुवार (18 जून) को एक बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने क्रॉस-वोटिंग के दम पर जीत दर्ज कर ली है। सत्ताधारी 'इंडिया' ब्लॉक के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव ने झारखंड की सियासत में हलचल मचा दी है और विपक्षी खेमे में सेंधमारी की पुष्टि कर दी है।


नतीजों का गणित: नथवाणी ने ऐसे किया कमाल
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने जीत के लिए जरूरी 28 वोटों का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को मात्र 20 वोट ही मिल सके। सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने 30 वोट हासिल किए और आसानी से अपनी सीट पक्की कर ली।

इस चुनाव में तीन वोट अमान्य (Invalid) घोषित किए गए, जिनमें से दो वोट भाजपा विधायकों के थे और एक वोट कांग्रेस विधायक का था।

क्रॉस-वोटिंग ने बदल दी बाजी
राज्यसभा चुनाव में इस जीत को एनडीए के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास केवल 24 विधायक थे, जो जीत के लिए जरूरी 28 वोटों के आंकड़े से 4 कम थे। इसके बावजूद परिमल नथवाणी का जीतना साफ तौर पर इंडिया ब्लॉक के भीतर हुई क्रॉस-वोटिंग का नतीजा है।

वहीं दूसरी ओर, जेएमएम और कांग्रेस वाले 'इंडिया' ब्लॉक के पास कुल 56 सदस्य थे, जो आसानी से दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त थे। लेकिन अंदरूनी बगावत के कारण कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का मुंह देखना पड़ा।

विधानसभा का अंकगणित और सियासी मायने
इस चुनाव परिणाम ने झारखंड की गठबंधन सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। जहां एक ओर जेएमएम अपने उम्मीदवार को जिताने में सफल रही, वहीं कांग्रेस का अपना उम्मीदवार न जीत पाना गठबंधन के भीतर 'विश्वास मत' और एकजुटता पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह क्रॉस-वोटिंग राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर की पटकथा लिख सकती है।


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