जनता सब देख रही है,कांग्रेस पर बरसीं के कविता, युवाओं को बताया गेमचेंजर
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'जनता सब देख रही है',कांग्रेस पर बरसीं के कविता, युवाओं को बताया गेमचेंजर

के कविता ने तमिलनाडु में विजय की जीत को TRS के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि युवा जागरूक हैं, केवल स्टारडम नहीं बल्कि मजबूत एजेंडा ही चुनावी सफलता दिलाता है।


तेलंगाना रक्षा सेना (TRS) की प्रमुख K Kavitha का मानना है कि C Joseph Vijay की चुनावी जीत ने न केवल तमिलनाडु बल्कि दूसरे राज्यों में भी राजनीतिक बदलाव की चर्चा को जन्म दिया है। तमिल समाचार चैनल पुथिया थलैमुरई को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार में कविता ने विजय को बधाई देते हुए कहा कि तेलंगाना के मतदाता उनकी जीत को उनकी पार्टी के पुनरुत्थान के मॉडल के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने कहा, “लोग मुझसे लगातार कहते हैं—‘जैसे विजय वहां जीते, वैसे ही आप यहां जीतेंगी। वहां TVK, यहां TRS।’ विजय की जीत ने निश्चित रूप से तेलंगाना में एक लहर पैदा की है।”हालांकि, कविता ने विजय की प्रशंसा के साथ एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी। उनका कहना था कि केवल स्टारडम के सहारे राजनीति में लंबे समय तक सफलता नहीं मिल सकती।

उन्होंने कहा, “यदि विजय के पास सही एजेंडा नहीं होता, तो वह चुनाव नहीं जीत पाते। मुझे उम्मीद है कि उन्होंने जिन युवाओं का समर्थन हासिल किया है, उनकी अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।”

युवा मतदाता हमेशा इंतजार नहीं करते

कविता ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए तेलंगाना में मुख्यमंत्री Revanth Reddy के नेतृत्व वाली सरकार का उदाहरण दिया।उनका कहना था कि युवा मतदाताओं ने ही कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया था, लेकिन बाद में वही युवा सरकार के प्रदर्शन से निराश हो गए।उन्होंने कहा, “युवाओं ने BRS के खिलाफ मतदान किया। गांव-गांव जाकर कांग्रेस के लिए प्रचार किया। लेकिन कांग्रेस ने ढाई साल के भीतर ही उन्हें निराश कर दिया। अगले 20 वर्षों तक कांग्रेस तेलंगाना में वापसी नहीं कर पाएगी।”

कविता के अनुसार, युवा मतदाता अधीर नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से जागरूक हैं। वे आसानी से समझ सकते हैं कि कोई सरकार सही दिशा में काम कर रही है या केवल वादे कर रही है।उन्होंने कांग्रेस के रोजगार संबंधी वादों पर सवाल उठाते हुए कहा, “हर साल दो लाख नौकरियों का वादा किया गया था। ढाई साल बाद भी केवल भर्ती अधिसूचनाएं आई हैं, नौकरियां नहीं। युवा बहुत समझदार हैं, वे पहचान लेते हैं कि कब उन्हें भ्रमित किया जा रहा है।”

‘जेन-ज़ी सिर्फ स्क्रॉल नहीं करती, सब देख रही है’

कविता ने इस धारणा को खारिज किया कि युवा राजनीति से दूर हो रहे हैं।उन्होंने कहा, “हम सोचते हैं कि वे सिर्फ मोबाइल स्क्रीन और इंस्टाग्राम में व्यस्त हैं। ऐसा नहीं है। वे सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय हैं और पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक खुलकर सच बोलते हैं।”उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी 18 से 29 वर्ष और 29 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चलाने की योजना बना रही है। इसके तहत युवाओं को कम उम्र से ही वित्तीय सहायता और उद्यमिता के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

कविता का कहना है कि उनका फोकस सरकारी नौकरियों के वादे पर नहीं, बल्कि युवाओं के विचारों में निवेश करने पर है।उन्होंने कहा, “कौन-सा बैंक किसी युवा को आसानी से ऋण देता है? मैं उनका समर्थन करना चाहती हूं, उन पर भरोसा करना चाहती हूं। दो लाख रुपये से लेकर 20 करोड़ रुपये तक, बिना बैंक के हस्तक्षेप के सहायता देना चाहती हूं। यदि उस निवेश से एक भी गूगल जैसी कंपनी निकलती है, तो पूरी मेहनत सफल हो जाएगी।”

महिलाओं और युवाओं पर रहेगा फोकस

कविता ने हाल ही में अपनी नई पार्टी TRS की स्थापना की थी। इससे पहले उन्हें उनके पिता K Chandrashekar Rao द्वारा स्थापित Bharat Rashtra Samithi (BRS) से निलंबित कर दिया गया था।उन्होंने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक यात्रा को व्यक्तिगत और प्रतीकात्मक दोनों बताया।कविता ने कहा, “मैं कभी संघर्ष छोड़ने वाली नहीं हूं। यदि मैं हार मान लूं, तो कम से कम 100 महिलाएं निराश हो जाएंगी।”

उन्होंने महिलाओं और युवाओं को अपना मुख्य राजनीतिक आधार बताते हुए कहा कि चुनावों में असली बदलाव लाने की ताकत इन्हीं वर्गों के पास होती है।“यदि एक महिला आपके पक्ष में आती है, तो पूरा परिवार आपके साथ आ सकता है। इसी तरह यदि एक युवा प्रभावित होता है, तो वह पूरे घर को प्रभावित कर सकता है,” उन्होंने कहा।उन्होंने यह भी बताया कि उनकी नजर 2028 के तेलंगाना विधानसभा चुनावों पर है और वह राज्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए वैश्विक नेताओं से बातचीत कर रही हैं।

दक्षिण भारत की पहचान और भाषा की राजनीति

कविता ने तमिलनाडु की द्रविड़ पार्टियों द्वारा लंबे समय से उठाए जा रहे हिंदी थोपने के विरोध का खुलकर समर्थन किया।उनका कहना था कि तेलंगाना को भी अपनी क्षेत्रीय पहचान और भाषा अधिकारों की रक्षा के लिए अधिक मुखर होना चाहिए।उन्होंने कहा, “तेलंगाना के लिए तमिलनाडु से सीखने के लिए बहुत कुछ है। विशेष रूप से संगम साहित्य और भाषाई विरासत को संरक्षित करने के उसके प्रयास प्रेरणादायक हैं।”

कविता ने केंद्र सरकार की NEET परीक्षा व्यवस्था की भी आलोचना की और कहा कि तेलंगाना को अपनी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए।

परिसीमन पर भी उठाए सवाल

परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर कविता ने M K Stalin द्वारा उठाई गई चिंताओं का समर्थन किया।उन्होंने कहा कि केवल जनसंख्या को प्रतिनिधित्व का आधार बनाना उचित नहीं होगा। इसके बजाय अमेरिका की सीनेट की तरह राज्यसभा में समान प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा, “हम ज्यादा योगदान देते हैं, लेकिन हमें कम मिलता है। इसके बावजूद दक्षिणी राज्य विकास में आगे हैं।”

2028 में खुद को विकल्प के रूप में पेश करने की तैयारी

कविता का मानना है कि एक दशक तक सत्ता में रहने के कारण BRS की साख कमजोर हुई है, कांग्रेस तेजी से विश्वसनीयता खो रही है और भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति तेलंगाना के सामाजिक ताने-बाने में ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पा रही।ऐसे में वह 2028 तक खुद को राज्य की एकमात्र विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, “मैं पूरी मेहनत से लोगों के बीच जाऊंगी, उन्हें बताऊंगी कि तेलंगाना में क्या हो रहा है और मुझे विश्वास है कि मैं उनका प्यार और भरोसा जीतूंगी।”

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