
Interview: बीजेपी-कांग्रेस में फर्क नहीं दोनों दबाते हैं क्षेत्रीय आवाज : के कविता
के कविता ने विजय की जीत को TRS के लिए प्रेरणा बताया। युवाओं, महिलाओं, क्षेत्रीय पहचान और उद्यमिता के दम पर 2028 में विकल्प बनने का दावा किया।
तेलंगाना रक्षा सेना (TRS) की स्थापना के एक महीने बाद पार्टी प्रमुख के कविता ने साफ कर दिया है कि वह अपनी नई राजनीतिक यात्रा किसके लिए शुरू कर रही हैं और किन ताकतों के खिलाफ लड़ना चाहती हैं। भारत राष्ट्र समिति (BRS) से निलंबित किए जाने के बाद कविता अब युवाओं की उद्यमिता, महिलाओं के सशक्तिकरण, दक्षिण भारतीय क्षेत्रीय पहचान और केंद्र की केंद्रीकरणवादी राजनीति के विरोध को अपनी नई राजनीतिक पहचान का आधार बना रही हैं।
तमिल समाचार चैनल पुथिया थलैमुरई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कविता ने कहा कि नवंबर 2023 में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने वाले तेलंगाना के युवा मतदाता अब उससे निराश हो चुके हैं और एक विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं। उन्होंने तमिलनाडु में अभिनेता-राजनेता विजय की जीत का उल्लेख करते हुए कहा कि तेलंगाना के लोग TRS की तुलना तमिलनाडु विजय कड़गम (TVK) से कर रहे हैं।
BRS छोड़ने की वजह क्या थी?
जब उनसे पूछा गया कि वह BRS की वरिष्ठ नेता थीं, फिर अलग पार्टी बनाने की नौबत क्यों आई, तो कविता ने कहा कि यह उनका फैसला नहीं था।
उन्होंने कहा, "मैंने पार्टी नहीं छोड़ी, मुझे निलंबित किया गया। यह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए सार्वजनिक अपमान था जिसने वर्षों तक निस्वार्थ भाव से पार्टी के लिए काम किया। न कोई प्रक्रिया अपनाई गई, न कोई स्पष्टीकरण मांगा गया और न ही कोई संवाद हुआ।"
कविता ने बताया कि निलंबन के तुरंत बाद उन्होंने पार्टी पद और विधान परिषद सदस्य (MLC) पद दोनों से इस्तीफा दे दिया, जबकि उनके कार्यकाल के लगभग तीन वर्ष शेष थे।
उन्होंने कहा, "मैं सत्ता के लिए राजनीति में नहीं थी। मेरा उद्देश्य हमेशा तेलंगाना का विकास रहा है। जब मुझे निलंबित किया गया, तब मैंने तय किया कि अब अपने दम पर काम करूंगी।" "अच्छे सिपाही को खोना किसी भी पार्टी के लिए नुकसान" BRS के भीतर ऐसी स्थिति क्यों बनी, इस सवाल पर कविता ने कहा कि इसका जवाब पार्टी को देना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मैंने तेलंगाना आंदोलन से लेकर हर चुनाव में पार्टी के लिए काम किया। जहां तक मुझे याद है, मैंने कभी अपने पिता के अलावा किसी और के लिए वोट नहीं मांगा। अब पहली बार मैं अपने लिए वोट मांगूंगी।" कविता ने कहा कि किसी भी पार्टी के लिए एक समर्पित कार्यकर्ता को खोना अच्छा संकेत नहीं होता।
पुरुष प्रधान राजनीति में नई पार्टी बनाने का फैसला
नई पार्टी बनाने के फैसले पर कविता ने कहा कि राजनीति में महिलाओं को आज भी हाशिए पर रखा जाता है।उन्होंने कहा, "दुनिया भर में राजनीति पुरुषों के पक्ष में झुकी हुई है। अमेरिका जैसा आधुनिक देश भी अब तक महिला राष्ट्रपति नहीं चुन पाया है। इसलिए पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ लड़ना जरूरी है।" उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से एक कोने में धकेल दिया गया था, लेकिन उनका लक्ष्य तेलंगाना की जनता की सेवा करना है और राजनीति ही इसके लिए सबसे प्रभावी माध्यम है।
जेल जाने और अपमान झेलने के बावजूद क्यों नहीं टूटीं?
जब उनसे पूछा गया कि जेल जाने और पार्टी के भीतर अपमान झेलने के बावजूद वह राजनीति में क्यों बनी रहीं, तो कविता ने कहा कि राजनीति की शक्ति का उपयोग उन्होंने हमेशा लोगों की मदद के लिए देखा है, न कि खुद के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकारें समय-समय पर संघीय ढांचे को कमजोर करने और क्षेत्रीय दलों को सीमित करने की कोशिश करती रही हैं।
उन्होंने कहा, "मुझे गिरफ्तार करना भी उसी प्रयास का हिस्सा था। लेकिन तेलंगाना आंदोलन ने मुझे लोगों के लिए लड़ना सिखाया है। मैं हार मानने वाली नहीं हूं।"
क्या TRS विपक्षी वोटों का बंटवारा करेगी?
इस सवाल पर कविता ने कहा कि केवल भाजपा ही नहीं, कांग्रेस भी सत्ता में रहने के दौरान क्षेत्रीय नेतृत्व को दबाने का प्रयास करती रही है।उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत की राजनीति क्षेत्रीय पहचान पर आधारित रही है और यही उसकी ताकत है। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु में DMK, AIADMK और अब विजय की पार्टी है। आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी, चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण हैं। दक्षिण भारत की पहचान क्षेत्रीय दलों से बनी है।"कविता का मानना है कि तेलंगाना भी इसी राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है और यहां क्षेत्रीय दल हमेशा महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
'विजय की जीत से मिली नई उम्मीद'
तमिलनाडु में विजय की सफलता पर कविता ने कहा कि इससे तेलंगाना में भी नई उम्मीद पैदा हुई है।उन्होंने बताया, "लोग लगातार मुझसे कहते हैं वहां TVK है, यहां TRS है। जैसे विजय जीते, वैसे ही आप भी जीतेंगी।" हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विजय को उन युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा जिन्होंने उनका समर्थन किया है।
'कांग्रेस ने युवाओं को निराश किया'
कविता ने दावा किया कि तेलंगाना में BRS की हार के पीछे युवाओं की बड़ी भूमिका थी। उन्होंने कहा, "युवाओं ने गांव-गांव जाकर कांग्रेस के लिए प्रचार किया। लेकिन ढाई साल के भीतर कांग्रेस ने उन्हें निराश कर दिया।" उनका दावा है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर अपने वादे पूरे नहीं किए।
उन्होंने कहा,"हर साल दो लाख नौकरियों का वादा किया गया था। ढाई साल में सिर्फ 60 हजार भर्तियों की अधिसूचनाएं निकली हैं, नियुक्तियां नहीं हुई हैं।"
क्या सिर्फ स्टारडम से चुनाव जीते जा सकते हैं?
विजय की लोकप्रियता पर टिप्पणी करते हुए कविता ने कहा कि स्टारडम भीड़ जुटा सकता है, लेकिन चुनाव नहीं जिता सकता।उन्होंने कहा,"लोग वोट बहुत गंभीरता से देते हैं। यदि विजय के पास सही एजेंडा नहीं होता तो वह चुनाव नहीं जीतते।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई नेता वादों को पूरा नहीं करता तो जनता बहुत जल्दी उसकी हकीकत समझ जाती है।
'युवाओं के लिए नौकरी नहीं, उद्यमिता का मॉडल'
कविता का कहना है कि आजादी के बाद से हर सरकार नौकरियों का वादा करती रही है, लेकिन उनका फोकस नौकरी देने वालों को तैयार करने पर होगा।उन्होंने कहा,"मैं युवा सशक्तिकरण समूह बनाना चाहती हूं। जैसे महिलाओं के स्वयं सहायता समूह होते हैं, वैसे ही युवाओं को भी वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए।" कविता ने कहा कि वह 2 लाख रुपये से लेकर 20 करोड़ रुपये तक की सहायता बिना बैंक के हस्तक्षेप के देने की व्यवस्था बनाना चाहती हैं।
उन्होंने कहा, "अगर उस निवेश से एक भी गूगल जैसी कंपनी निकल आए, तो पूरा प्रयास सफल माना जाएगा।"
इंस्टाग्राम पीढ़ी को लेकर अलग सोच
18 से 20 वर्ष की उम्र के युवाओं को लेकर कविता ने कहा कि उन्हें केवल सोशल मीडिया उपयोगकर्ता मानना गलत है।उन्होंने कहा,"लोग सोचते हैं कि युवा सिर्फ स्क्रीन देखते रहते हैं। ऐसा नहीं है। वे आंदोलनों में सक्रिय हैं और सच बोलने से नहीं डरते।"उनके अनुसार नई पीढ़ी अधिक स्पष्टवादी है और सामाजिक मुद्दों को लेकर पहले की पीढ़ियों से ज्यादा मुखर है।
क्या जेन-ज़ी नई राजनीतिक क्रांति ला सकती है?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे आंदोलनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कविता ने कहा कि यह युवाओं के गुस्से की अभिव्यक्ति है।उन्होंने कहा, "भारत छात्र आंदोलनों और राजनीतिक क्रांतियों का देश रहा है। आपातकाल के दौरान भी छात्र आंदोलनों ने पूरे देश की राजनीति बदल दी थी।"हालांकि उन्होंने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऐसे आंदोलन राजनीतिक क्रांति में बदल पाएंगे या नहीं।
भाषा, हिंदी थोपने का मुद्दा और NEET
कविता ने कहा कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान TRS के प्रमुख मुद्दों में शामिल होंगे।उन्होंने आरोप लगाया कि UPSC और अन्य राष्ट्रीय व्यवस्थाओं में हिंदी को अनुचित लाभ मिलता है।उन्होंने कहा,"NEET के पेपर हर साल लीक होते हैं। अगर सरकार एक परीक्षा का पेपर सुरक्षित नहीं रख सकती तो देश की सुरक्षा कैसे संभालेगी?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नई शिक्षा नीतियों के जरिए हिंदी को दक्षिण भारत पर थोपने की कोशिश की जा रही है।
परिसीमन पर अमेरिकी मॉडल की वकालत
परिसीमन के मुद्दे पर कविता ने कहा कि केवल जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व तय करना उचित नहीं है।उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यसभा के लिए अमेरिका की सीनेट जैसा मॉडल अपनाया जाना चाहिए, जहां प्रत्येक राज्य को समान प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने कहा, "दक्षिण भारत राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है, लेकिन परिसीमन के बाद उसकी राजनीतिक ताकत कम हो सकती है।"
'महिलाओं और युवाओं पर रहेगा मुख्य फोकस'
कविता ने कहा कि उनकी राजनीति का मुख्य आधार महिलाएं और युवा होंगे। उन्होंने कहा, "तेलंगाना की महिलाएं चाहती हैं कि मैं सफल होऊं। वे कहती हैं कि जो समस्याएं वे झेलती हैं, उन्हीं के खिलाफ मैं आवाज उठा रही हूं।"कविता का दावा है कि बिना किसी बड़े संगठनात्मक ढांचे के भी महिलाएं खुद उनके पास आ रही हैं और समर्थन दे रही हैं।
2028 विधानसभा चुनाव पर नजर
कविता ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य 2028 का तेलंगाना विधानसभा चुनाव है।उन्होंने कहा कि वह राज्य के लिए एक बड़े सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन कार्यक्रम पर काम कर रही हैं और जल्द ही इसकी घोषणा करेंगी।उनका कहना है कि वह वैश्विक नेताओं के साथ बातचीत कर रही हैं ताकि तेलंगाना की आय बढ़ाने और राज्य को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने के रास्ते तलाशे जा सकें।
विजय से क्यों की जा रही है तुलना?
कविता ने कहा कि उन्हें विजय के चुनाव अभियान का सबसे अच्छा पहलू यह लगा कि उन्होंने अपने विरोधियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा, "मैं भी राजनीति में उसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करती हूं। लोग कहते हैं कि आप भी साफ बोलती हैं, विजय भी साफ बोलते हैं। शायद यही वजह है कि लोग TVK और TRS की तुलना कर रहे हैं।" कविता ने मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे यह तुलना पसंद है और उम्मीद है कि यह सच भी साबित होगी।"

