
कर्नाटक कांग्रेस में मचा घमासान! सीएम सिद्दारमैया के करीबी नजीर अहमद पर गिरी गाज
कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार में जारी राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के राजनीतिक सचिव नजीर अहमद को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है।
कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी इस समय दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव को लेकर गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। इस विवाद की पहली बड़ी गाज मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के अत्यंत करीबी माने जाने वाले राजनीतिक सचिव और एमएलसी नजीर अहमद पर गिरी है। 13 अप्रैल को जारी एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार, नजीर अहमद को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव के पद से 'तत्काल प्रभाव से मुक्त' कर दिया गया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस कठोर कार्रवाई का मुख्य कारण दावणगेरे उपचुनाव में नजीर अहमद की संदिग्ध भूमिका है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार समर्थ शमनूर के खिलाफ काम किया है। यह सीट 94 वर्षीय दिग्गज कांग्रेस विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के बाद खाली हुई थी, और कांग्रेस ने उनके पोते समर्थ शमनूर को मैदान में उतारा है। समर्थ, कर्नाटक के खान और भूविज्ञान मंत्री एस एस मल्लिकार्जुन के बेटे हैं।
मुस्लिम समुदाय की नाराजगी
इस विवाद की जड़ टिकट बंटवारे में है। दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी है। क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के नेताओं और समर्थकों की मांग थी कि कांग्रेस इस बार इस समुदाय से किसी को टिकट दे। जब समर्थ शमनूर के नाम की घोषणा की गई, तब से ही पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर उठने लगे थे।
स्थानीय नेताओं का मानना था कि समुदाय के किसी नेता को मौका मिलना चाहिए था। इस असंतोष का पहला बड़ा संकेत तब मिला जब एक बागी कांग्रेस उम्मीदवार, सादिक पहलवान ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस कदम से पार्टी की मुसीबतें बढ़ गईं। हालांकि, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने खुद सादिक पहलवान को मनाने का जिम्मा उठाया और कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए राजी किया।
सादिक पहलवान के नामांकन वापस लेने के बावजूद, कांग्रेस के भीतर विद्रोह की आग पूरी तरह शांत नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि नजीर अहमद सहित दावणगेरे के कई प्रमुख मुस्लिम नेताओं ने पार्टी उम्मीदवार समर्थ शमनूर के लिए चुनाव प्रचार करने से पूरी तरह दूरी बना ली है। नजीर अहमद पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए दावणगेरे जाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने यह कड़ा फैसला लिया।
इस विवाद में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब आवास मंत्री और पार्टी के प्रमुख अल्पसंख्यक नेता बी जेड जमीर अहमद खान ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि टिकट को लेकर समुदाय में नाराजगी थी। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जमीर अहमद खान को भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तत्काल अपने आवास पर बुलाया है।
मीडिया से बात करते हुए जमीर अहमद खान ने कहा, "हां, यह सच है कि मुस्लिम नेताओं ने दावणगेरे टिकट की मांग की थी। 20 मार्च को कांग्रेस कार्यालय में हुई एक बैठक में, जिसमें प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार भी मौजूद थे, मैंने 200 से अधिक नेताओं के सामने खुले तौर पर मुस्लिम उम्मीदवार के लिए वकालत की थी।"
खान ने अपनी बात पर जोर देते हुए आगे कहा, "मैंने खुलेआम बैठक में कहा था: सर, कृपया हमें एक मुस्लिम उम्मीदवार दें। दावणगेरे किसी भी (मुस्लिम समुदाय से) व्यक्ति को दें। मैंने यह बात खुलेआम बैठक में कही थी, बंद कमरों के पीछे कुछ नहीं कहा गया।" उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर उनका सुझाया गया उम्मीदवार नहीं जीतता है, तो वह अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।
नजीर अहमद की छुट्टी और आगे की राह
नजीर अहमद को पद से हटाने के फैसले पर टिप्पणी करते हुए जमीर अहमद खान ने कहा कि उन्हें केवल इतना पता चला है कि अहमद ने इस्तीफा दे दिया है और वह इसका सटीक कारण नहीं जानते। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि सीएम ने अहमद को दावणगेरे जाने के लिए कहा था, और चूंकि वह नहीं गए, इसलिए यह फैसला लिया गया है।
कर्नाटक कांग्रेस के भीतर का यह घमासान सिद्दारमैया सरकार के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गया है। दावणगेरे दक्षिण में मुस्लिम समुदाय का वोट बैंक अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि पार्टी अपने नाराज नेताओं और मतदाताओं को मनाने में विफल रहती है, तो समर्थ शमनूर के लिए उपचुनाव जीतना काफी मुश्किल हो सकता है। यह संकट न केवल उपचुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि पार्टी के भीतर अल्पसंख्यक नेतृत्व और आलाकमान के बीच के विश्वास पर भी सवाल खड़े करता है। नजीर अहमद को हटाकर सिद्दारमैया ने एक कड़ा संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन यह विद्रोह की आग को ठंडा करेगा या और भड़काएगा, यह समय ही बताएगा।
(शीर्षक के अलावा, इस समाचार को 'द फेडरल' के कर्मचारियों द्वारा संपादित नहीं किया गया है और यह एक सिंडिकेटेड फीड से स्वतः प्रकाशित है।)

