कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय? सिद्धारमैया ले सकते हैं बड़ा फैसला
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कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय? सिद्धारमैया ले सकते हैं बड़ा फैसला

कर्नाटक में कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज है। सिद्धारमैया के इस्तीफे और डीके शिवकुमार के नए मुख्यमंत्री बनने की अटकलें बढ़ गई हैं।


कर्नाटक कांग्रेस में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री Siddaramaiah अगले कुछ दिनों में बड़े राजनीतिक फैसले ले सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यदि कांग्रेस हाईकमान नेतृत्व परिवर्तन पर अंतिम मुहर लगाता है, तो सिद्धारमैया पार्टी नेतृत्व के फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनसे पद छोड़ने का संकेत दिया है ताकि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सके। हालांकि कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

यदि सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं, तो यह कर्नाटक की राजनीति के एक ऐतिहासिक अध्याय का अंत माना जाएगा। AHINDA राजनीति के प्रमुख चेहरे सिद्धारमैया पहले ही राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री देवराज उर्स का 7 वर्ष 239 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दो कार्यकालों में वे आठ वर्ष से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वित्त मंत्री के रूप में 17 बजट पेश करने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।

गुरुवार को हो सकता है बड़ा ऐलान

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया गुरुवार को मंत्रियों के साथ नाश्ते की बैठक और कांग्रेस विधायकों से चर्चा के बाद अपने फैसले का ऐलान कर सकते हैं। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें नए नेता के चयन पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि इसके बाद सिद्धारमैया राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।

सामाजिक न्याय एजेंडे पर बढ़ी चर्चा

इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सिद्धारमैया के लंबे समय से लंबित सामाजिक न्याय एजेंडे पर भी चर्चा तेज हो गई है। उनके पहले कार्यकाल में शुरू कराई गई जातीय जनगणना रिपोर्ट अब तक लागू नहीं हो सकी थी। दूसरे कार्यकाल में सत्ता में लौटने के बाद भी रिपोर्ट को लागू करने की बजाय सरकार ने विभिन्न समुदायों के विरोध और पार्टी स्तर पर चर्चा के बाद नया सामाजिक-आर्थिक और जातीय सर्वे कराने का फैसला लिया।

सूत्रों के अनुसार कर्नाटक पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाई है और आयोग अपनी सामाजिक, शैक्षणिक तथा आर्थिक सर्वे रिपोर्ट बुधवार (27 मई) तक सरकार को सौंप सकता है। ऐसी भी अटकलें हैं कि किसी राजनीतिक बदलाव से पहले यह रिपोर्ट सिद्धारमैया को सौंप दी जाएगी। राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके कार्यकाल की अंतिम बड़ी प्रशासनिक और AHINDA-केंद्रित विरासत मान रहे हैं।

अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की कोशिश

सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया अपने करीबी नेताओं के साथ भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनका फोकस अपनी राजनीतिक विरासत सुरक्षित रखने, अपने समर्थक गुट के हितों की रक्षा करने और सत्ता संरचना में AHINDA प्रतिनिधित्व बनाए रखने पर है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं, तो सिद्धारमैया उनके साथ राजनीतिक तालमेल कैसे बनाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिद्धारमैया सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बजाय सत्ता और संगठन दोनों में प्रभाव बनाए रखना चाहेंगे।

कांग्रेस के 80 से अधिक विधायक राजनीतिक रूप से सिद्धारमैया के समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में वे चाहते हैं कि उनके करीबी नेताओं और AHINDA सामाजिक गठबंधन — यानी अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित समुदाय से जुड़े विधायकों — को नई सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। इसमें कैबिनेट पद और संगठनात्मक जिम्मेदारियां शामिल हो सकती हैं।

पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं सिद्धारमैया

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सिद्धारमैया सरकार के पीछे रहकर रणनीतिक भूमिका निभा सकते हैं। माना जा रहा है कि वे सरकार के फैसलों पर प्रभाव बनाए रखते हुए AHINDA हितों की रक्षा और अपनी कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना चाहेंगे।इसके अलावा यह भी चर्चा है कि वे संभावित डीके शिवकुमार सरकार में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखते हुए कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे ताकि भविष्य के चुनावों से पहले पार्टी में एकता बनी रहे।

सिद्धारमैया और उनके समर्थकों के लिए क्या प्रस्ताव?

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया है। राहुल गांधी का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में सिद्धारमैया के अनुभव और नेतृत्व की जरूरत है। वहीं सिद्धारमैया के करीबी नेता — जैसे सतीश जारकीहोली, सी. महादेवप्पा और ज़मीर अहमद खान— उन पर दबाव बना रहे हैं कि पद छोड़ने से पहले AHINDA नेताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।राजनीतिक चर्चाओं में सत्ता संतुलन के नए फार्मूले पर भी विचार हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक पिछड़ा वर्ग, दलित, अल्पसंख्यक और लिंगायत समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए चार उपमुख्यमंत्री पदों की मांग उठ रही है।

इसके साथ ही सिद्धारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र और मंत्री प्रियांक खड़गे के संभावित उपमुख्यमंत्री बनने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कई दौर की बैठकों के बाद अब बेंगलुरु में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

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