वोट बचाने की तैयारी! कर्नाटक सरकार ने शुरू किया नया PRC सिस्टम
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वोट बचाने की तैयारी! कर्नाटक सरकार ने शुरू किया नया PRC सिस्टम

SIR प्रक्रिया के बीच कर्नाटक सरकार ने PRC जारी करने की नई व्यवस्था लागू की है, ताकि दस्तावेजों की कमी से किसी मतदाता का नाम सूची से न हटे।


देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। इसी बीच कर्नाटक सरकार द्वारा स्थायी निवास प्रमाणपत्र (Permanent Residence Certificate - PRC) जारी करने के लिए एक नया परिचालन ढांचा लागू करने का निर्णय राजनीतिक महत्व हासिल कर चुका है। हालांकि सरकार के आधिकारिक आदेश में SIR का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन सोमवार (29 जून) को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान के बाद इस कदम के उद्देश्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

सरकार का कहना है कि यदि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। ऐसे में नागरिकों को शीघ्रता से स्थायी निवास प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की गई है, ताकि वे जरूरत पड़ने पर इसे सहायक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर सकें।

SIR को लेकर चिंताओं के बीच जारी हुआ सरकारी आदेश

सोमवार को राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में स्थायी निवास प्रमाणपत्र और अन्य नागरिक सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध प्रणाली के अंतर्गत लाने के लिए व्यापक परिचालन ढांचा प्रस्तुत किया गया।इसके तहत ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में सुविधा केंद्र (Facilitation Centres) स्थापित किए जाएंगे। आवेदन सेवा सिंधु (Seva Sindhu), अटल जनस्नेही केंद्र, ग्रामा वन (Grama One), कर्नाटक वन (Karnataka One) और बेंगलुरु वन (Bengaluru One) केंद्रों के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

सरकार ने सभी उपायुक्तों (Deputy Commissioners) और स्थानीय निकाय अधिकारियों को सात दिनों के भीतर इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी आदेश के अनुसार इस पहल के मुख्य उद्देश्य हैं—

डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देना।

नागरिक सेवाओं को सरल बनाना।

निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवाएं उपलब्ध कराना।

स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्राप्त करने की पात्रता

स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित में से एक या अधिक आधार मान्य होंगे—

आवेदक का कर्नाटक में जन्म होना।

आवेदक, उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक का कम से कम 10 वर्षों से कर्नाटक में निवास।

कक्षा 12 या समकक्ष तक कम से कम 10 शैक्षणिक वर्षों की पढ़ाई कर्नाटक में की हो।

माता-पिता, कानूनी अभिभावक या जीवनसाथी का कर्नाटक का स्थायी निवासी होना।

कर्नाटक में आवासीय संपत्ति का स्वामित्व, कब्जा या वैध उपयोग।

मतदाता सूची, आधार कार्ड, राशन कार्ड या अन्य सरकारी अभिलेखों में नाम दर्ज होना।

आवेदक या उसके माता-पिता में से किसी एक द्वारा कर्नाटक में कम से कम 7 वर्षों तक सरकारी या सार्वजनिक सेवा की गई हो।

ऐसे व्यक्ति से विवाह, जो सामान्य रूप से कर्नाटक में निवास करता हो और स्थायी निवास प्रमाणपत्र रखता हो या इसके लिए पात्र हो।

कोई अन्य विश्वसनीय दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक या मौखिक साक्ष्य जो यह सिद्ध करे कि कर्नाटक ही आवेदक का मुख्य एवं स्थायी निवास स्थान है।

डी.के. शिवकुमार ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि यदि लोगों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं होंगे, तो उन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि यदि मतदाता गणना (Enumeration) फॉर्म भरते समय जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का खतरा रहेगा। ऐसी स्थिति में नागरिक स्थायी निवास प्रमाणपत्र प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करके अपने मतदान अधिकार की रक्षा कर सकते हैं।उनके इस बयान के बाद सरकार की नई PRC व्यवस्था को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाने लगा है।उन्होंने कहा, "जो भी व्यक्ति निवास प्रमाणपत्र चाहता है, उसे यह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराया जाएगा।"जब उनसे पूछा गया कि जिन लोगों के पास अपना घर नहीं है या निवास का प्रमाण नहीं है, उनका क्या होगा, तो उन्होंने कहा,

"यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो उसके भी दस्तावेज होंगे। यदि आपके पास आधार कार्ड, उस निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता सूची क्रमांक या अन्य पहचान दस्तावेज हैं, तो स्थानीय अधिकारियों को प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार दिया गया है। राज्य के प्रत्येक पात्र व्यक्ति को यह प्रमाणपत्र मिलेगा। यदि वे हमारे राज्य के निवासी हैं, तो उनके पास इनमें से कोई न कोई दस्तावेज अवश्य होगा। सरकार लोगों में जागरूकता अभियान भी चलाएगी। यह हमारी जिम्मेदारी है।"

राज्यभर में बनेंगे 49,320 सुविधा केंद्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व विभाग के माध्यम से उप तहसीलदारों (Deputy Tahsildars) को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार दिया गया है।उन्होंने कहा,"हर ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड में सुविधा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। पूरे राज्य में कुल 49,320 केंद्र बनाए जाएंगे। नागरिक आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन डाउनलोड भी कर सकेंगे। जिन्होंने जाति प्रमाणपत्र बनवाते समय अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराया है, वे उसे व्हाट्सएप के माध्यम से भी डाउनलोड कर सकेंगे।"

उन्होंने आगे कहा,"सरकार ने राज्य के 5.5 करोड़ लोगों तक घर-घर सहायता पहुंचाने का निर्णय लिया है। मैं प्रत्येक नागरिक से अपने मतदान अधिकार की रक्षा करने की अपील करता हूं। निर्वाचन आयोग जहां विज्ञापनों के माध्यम से जागरूकता फैला रहा है, वहीं राज्य सरकार भी लोगों तक आवश्यक जानकारी पहुंचाएगी।"

"पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति नहीं होने देंगे"

जब उनसे पूछा गया कि कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की तरह मतदाताओं के नाम हटने की स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, तो उन्होंने कहा,"इसी कारण हम इस विषय को गंभीरता से ले रहे हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं, विज्ञापनों के जरिए जानकारी दी जा रही है और अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि किसी भी व्यक्ति का मतदान अधिकार न छिने।"जब उनसे पूछा गया कि क्या एक महीने के भीतर 5.5 करोड़ लोगों तक पहुंचना संभव होगा, तो उन्होंने कहा, "हम पहले से ही 4.5 करोड़ गरीब लोगों को अन्न भाग्य योजना का लाभ दे रहे हैं।

हमारे पास 5.5 करोड़ लोगों का रिकॉर्ड है जिन्होंने जाति प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। यदि लोग यह मानकर निश्चिंत हो जाएं कि उनका वोट सुरक्षित है, तो वे अपना मतदान अधिकार खो सकते हैं। हर व्यक्ति—यहां तक कि मैं, डी.के. शिवकुमार भी—गणना फॉर्म भरकर जमा करूंगा। तभी मेरा मतदान अधिकार सुरक्षित रहेगा। अन्यथा मेरा भी मतदान अधिकार नहीं रहेगा।"

सरकारी रिकॉर्ड के एकीकरण पर विशेष जोर

सरकार के अनुसार आवेदनों का सत्यापन विभिन्न सरकारी डेटाबेस के माध्यम से किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—

परिवार संबंधी रिकॉर्ड

निवास संबंधी रिकॉर्ड

शैक्षणिक रिकॉर्ड

मतदाता सूची

सरकार का मानना है कि इससे नागरिकों को बार-बार एक ही दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंतिम स्थायी निवास प्रमाणपत्र तभी जारी किया जाएगा, जब संबंधित अधिकारी स्वतंत्र रूप से आवेदक की पात्रता का सत्यापन कर लेंगे।

क्या यह सरकार की जवाबी रणनीति है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आदेश SIR प्रक्रिया के प्रति कर्नाटक सरकार की प्रशासनिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि पर्याप्त दस्तावेज न होने के कारण पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं।

इसी पृष्ठभूमि में सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक सरकार ने यह नई व्यवस्था इसलिए लागू की है ताकि नागरिकों को शीघ्रता से स्थायी निवास प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जा सके और आवश्यकता पड़ने पर वे इसे सहायक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर अपने मतदान अधिकार की रक्षा कर सकें।

(यह लेख मूल रूप से 'द फेडरल कर्नाटक' में प्रकाशित हुआ था।)

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