केरल में ऑर्गन डोनेशन रैकेट का खुलासा, फर्जी दस्तावेज बनाकर चल रहा था खेल
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केरल में ऑर्गन डोनेशन रैकेट का खुलासा, फर्जी दस्तावेज बनाकर चल रहा था खेल

केरल में ऑर्गन डोनेशन रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने फर्जी दस्तावेज और नकली सिफारिशी पत्र बनाने वाले 5 आरोपियों को हिरासत में लिया।


केरल के पल्लिक्करा इलाके में पुलिस ने एक बड़े ऑर्गन डोनेशन रैकेट का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि यह गिरोह अंगदान प्रक्रिया के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर दाताओं और मरीजों की मदद कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को हिरासत में लिया है और कई ठिकानों पर छापेमारी की गई है।

पांच लोग हिरासत में, कई जगह छापे

पुलिस के मुताबिक, जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है उनमें एर्नाकुलम जिले के पेरिंगला निवासी नजीब कल्लथारा और उनकी पत्नी रशीदा, कुन्नाथुनाडु निवासी सनी वर्गीज और उनकी पत्नी सिनी वर्गीज, तथा पट्टिमट्टोम के चेलक्कुलम निवासी सनोज के पी शामिल हैं।इन आरोपियों को उनके घरों और पल्लिक्करा स्थित एक डिजिटल स्टूडियो पर छापेमारी के बाद हिरासत में लिया गया। पुलिस अब आसिफ नामक एक अन्य संदिग्ध की तलाश कर रही है, जिसे इस रैकेट का हिस्सा माना जा रहा है।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए चलता था रैकेट

पुलिस के अनुसार, अंगदान की प्रक्रिया में दाता और प्राप्तकर्ता के लिए कई स्तरों पर सत्यापन जरूरी होता है। इसके लिए पुलिस, स्थानीय निकाय, डॉक्टर, विधायक और सांसदों के प्रमाणपत्रों की आवश्यकता पड़ती है। आरोप है कि गिरोह इन सभी दस्तावेजों की फर्जी कॉपियां तैयार कर रहा था। एफआईआर के मुताबिक, यह गिरोह अगस्त 2023 से सक्रिय था। आरोपियों ने कोच्चि के दो निजी अस्पतालों के फर्जी लेटरहेड, नकली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट और कई नेताओं के नाम से फर्जी सिफारिशी पत्र तैयार किए।

नेताओं और अधिकारियों के नाम पर भी फर्जीवाड़ा

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पूर्व उदुमा विधायक सीएच कुन्हांबू, सांसद हिबी ईडन, पूर्व विधायक केपी मोहनन, पूर्व विधायक दलीमा जोजो, पूर्व केरल चीफ व्हिप एन जयराज और सांसद केआर राधाकृष्णन के नाम से भी फर्जी लेटरपैड तैयार किए थे।इसके अलावा अंबालापुझा डिप्टी एसपी और कुन्नमकुलम असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के नाम से भी नकली दस्तावेज बनाए गए। पुलिस का कहना है कि कई प्रसिद्ध डॉक्टरों की सिफारिशी चिट्ठियां भी फर्जी तरीके से तैयार की गई थीं।

छापेमारी में जब्त हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

पुलिस ने छापेमारी के दौरान कंप्यूटर, मोबाइल फोन और डीवीआर जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन उपकरणों की जांच से रैकेट के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिल सकती है।

दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं तार

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस रैकेट की पहुंच दूसरे राज्यों तक तो नहीं थी। साथ ही उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने अंगदान प्रक्रिया में इस गिरोह की मदद ली थी।मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की फर्जीवाड़ा और जाली दस्तावेज इस्तेमाल करने से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए हैं।

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