
भाजपा और अमित शाह का 'ऑपरेशन लोटस' बंगाल में फेल: कीर्ति आजाद
कीर्ति आजाद का दावा- बगावत के लिए जरूरी 19 सांसद नहीं जुटा पाई भाजपा; तीन बागी नाम वापस लेने को तैयार, ममता बनर्जी ही रहेंगी तृणमूल की निर्विवाद बॉस।
AI With Sanket: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी कथित बगावत और राजनीतिक संकट के बीच पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। 'द फेडरल' को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कीर्ति आजाद ने दावा किया कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के डर, ब्लैकमेलिंग और पैसों के लालच के दम पर टीएमसी को तोड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 'ऑपरेशन लोटस' यहाँ पूरी तरह फेल हो चुका है क्योंकि बगावत के लिए जरूरी आंकड़े भाजपा नहीं जुटा पाई है।
अमित शाह का 'ऑपरेशन लोटस' पहली बार हुआ फेल
सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि विपक्षी दलों को खत्म करना और 'ऑपरेशन लोटस' चलाना भाजपा का बुनियादी चरित्र बन चुका है। हमने इसे शिवसेना, एनसीपी, जदयू, बीजद और अकाली दल के साथ होते देखा है। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के बागी सांसदों की जो सूचियां मीडिया में तैर रही हैं, उनमें रोजाना नाम बदल रहे हैं। कभी दो नाम जुड़ते हैं, तो कभी हटा दिए जाते हैं। आजाद ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, "मुझे जानकारी मिली है कि शुरुआती सूची में शामिल तीन सांसद अब अपने नाम वापस लेना चाहते हैं। भाजपा के पास बगावत के लिए जरूरी 19 सांसदों का आंकड़ा नहीं है।" विरोधी खेमे पर दबाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जो सांसद अब पीछे हटना चाहते हैं, उन्हें जेल में डालने की धमकियां दी जा रही हैं और उनके घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई है।
सांसदों पर दबाव और सुरक्षा हटाने का आरोप
इंटरव्यू के दौरान कीर्ति आजाद ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि चूंकि उनके खिलाफ ईडी या सीबीआई का कोई मामला नहीं था, इसलिए उन्हें पहले रिश्वत देने की कोशिश की गई। जब वे नहीं झुके, तो एक सांसद के तौर पर मिलने वाली उनकी सुरक्षा (पीएसओ और होमगार्ड्स) को वापस ले लिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि बर्दवान-दुर्गापुर में उनके घर पर भाजपा के गुंडे हमला भी कर सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के पांच नए सांसदों पर हमले किए गए हैं, बंगाल में पार्टी के 5,000 कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया है और पुलिस कस्टडी में मौतों सहित कुल 25 लोगों की जान जा चुकी है।
संविधान बदलना और 'प्रसिडेंशियल सिस्टम' लाना है भाजपा का मकसद
भाजपा की इस पूरी रणनीति के पीछे के मुख्य उद्देश्य को उजागर करते हुए आजाद ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है। वे जनगणना के बाद जनसंख्या के आधार पर सीटों का परिसीमन (Delimitation) करना चाहते हैं, जिससे उत्तर भारत में सीटें बढ़ेंगी और जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिण भारत को नुकसान होगा। आजाद ने आरोप लगाया कि भाजपा का असली मकसद इस बहुमत के जरिए देश का संविधान बदलना और नरेंद्र मोदी को शीर्ष पर रखकर देश में 'प्रेसिडेंशियल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट' (अध्यक्षीय शासन प्रणाली) लागू करना है।
"ममता ही बंगाल हैं, अभिषेक भी अपने दम पर नहीं जीत सकते"
पार्टी के भीतर आंतरिक नेतृत्व के सवाल पर कीर्ति आजाद ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि टीएमसी में ममता बनर्जी ही निर्विवाद नेता हैं। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने यह पार्टी खुद सड़कों पर लड़कर बनाई है, उन्हें यह विरासत में नहीं मिली। यहाँ तक कि अभिषेक बनर्जी भी पूरी तरह अपने दम पर चुनाव जीतने का दावा नहीं कर सकते। बंगाल में अगर कोई भी जीतता है, तो वह सिर्फ ममता बनर्जी के नाम पर जीतता है। अगर 25 लोग पार्टी छोड़कर चले भी जाएं, तो ममता बनर्जी नए नेता पैदा करने की ताकत रखती हैं। ममता ही बंगाल हैं।"
(ऊपर दिया गया कंटेंट एक बेहतरीन AI मॉडल का इस्तेमाल करके वीडियो से ट्रांसक्राइब किया गया है। सटीकता, क्वालिटी और एडिटोरियल ईमानदारी बनाए रखने के लिए, हम 'ह्यूमन-इन-द-लूप' (HITL) प्रोसेस का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि AI शुरुआती ड्राफ्ट बनाने में मदद करता है, लेकिन हमारी अनुभवी एडिटोरियल टीम पब्लिश करने से पहले कंटेंट की सावधानीपूर्वक समीक्षा, एडिटिंग और उसे बेहतर बनाती है। 'द फेडरल' में, हम भरोसेमंद और जानकारीपूर्ण पत्रकारिता देने के लिए AI की कुशलता और इंसानी एडिटर्स की विशेषज्ञता को मिलाते हैं।)
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