लालू-राबड़ी का बड़ा दांव, Z-Plus सुरक्षा हटने के बाद बचे हुए सुरक्षाकर्मियों को भी लौटाया वापस
x

लालू-राबड़ी का बड़ा दांव, Z-Plus सुरक्षा हटने के बाद बचे हुए सुरक्षाकर्मियों को भी लौटाया वापस

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राजद (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पटना स्थित अपने 10 सर्कुलर रोड आवास से बचे हुए सुरक्षाकर्मियों को भी वापस भेज दिया है।


बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी बंगले और सुरक्षा को लेकर घमासान चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित अपने सरकारी आवास पर तैनात बचे-खुचे सुरक्षाकर्मियों को भी वापस भेज दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कुछ ही दिन पहले बिहार की सम्राट सरकार ने लालू परिवार की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उनकी 'जेड-प्लस' (Z-plus) सुरक्षा श्रेणी को वापस ले लिया था। सुरक्षा कवर घटाए जाने के बाद जो थोड़े-बहुत सुरक्षाकर्मी आवास के बाहर तैनात थे, शनिवार को लालू परिवार ने उन्हें भी जाने के लिए कह दिया। इसके बाद से यह हाई-प्रोफाइल आवास बिना किसी सरकारी सुरक्षा के रह गया है।

इस पूरी घटना के पीछे असली वजह पटना का वह ऐतिहासिक बंगला है, जो पिछले कई दशकों से लालू परिवार और राजद की राजनीति का मुख्य केंद्र रहा है। बिहार सरकार ने राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड का यह बंगला खाली करने का कड़ा निर्देश दिया है, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच विवाद बेहद गहरा गया है।

नंद किशोर राम को अलॉट हुआ लालू का 'सियासी किला'

बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 10 सर्कुलर रोड स्थित इस आलीशान बंगले को अब बिहार के मंत्री नंद किशोर राम को अलॉट कर दिया है। राज्य सरकार का तर्क है कि राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता (Leader of Opposition) होने के नाते पहले ही हार्डिंग रोड पर एक वैकल्पिक सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है।

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस में कहा गया है कि राबड़ी देवी को वैकल्पिक व्यवस्था दिए जाने के बावजूद उन्होंने अभी तक नए आवास में शिफ्ट होने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। सरकार ने लालू परिवार को यह बंगला खाली करने के लिए 15 दिनों की मोहलत दी है, जिसकी समयसीमा जून के मध्य (Mid-June) में खत्म हो रही है। यदि इस अवधि के भीतर बंगला खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन सख्त कदम उठा सकता है।

"बल बुला लो, लेकिन बंगला खाली नहीं करूंगी" – राबड़ी देवी

सरकार के इस नोटिस पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बेहद आक्रामक और विद्रोही रुख अख्तियार कर लिया है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने सम्राट सरकार को खुली चुनौती दी। राबड़ी देवी ने कहा, "वे हमें इस जगह से निकालने के लिए जितनी चाहें उतनी फोर्स (सुरक्षाबल) बुला सकते हैं, लेकिन मैं यह बंगला किसी भी कीमत पर खाली नहीं करूंगी।"

गौरतलब है कि 10 सर्कुलर रोड का यह बंगला सिर्फ एक सरकारी इमारत नहीं है, बल्कि यह पिछले तीन दशकों से बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा लैंडमार्क रहा है। राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इसी बंगले से सरकार चलाई थी। लालू प्रसाद यादव की हर राजनीतिक रणनीति, राजद की बड़ी बैठकें और कार्यकर्ताओं का हुजूम इसी पते पर जुटता रहा है। ऐसे में इस बंगले को छोड़ना लालू परिवार के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके की तरह देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का तीखा हमला: "बंगला किसी की बपौती नहीं"

लालू परिवार के इस इनकार के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्ष (RJD) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शेखपुरा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना नाम लिए लालू परिवार पर तीखा हमला बोला। सम्राट चौधरी ने कहा, "सरकारी बंगले या मुख्यमंत्री का आवास जनता की संपत्ति होते हैं। इसे किसी की व्यक्तिगत जागीर या पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) की तरह नहीं माना जा सकता।"

मुख्यमंत्री ने अपने शासन का उदाहरण देते हुए आगे कहा, "जब मैंने पहले अपना पद छोड़ा था, तो उसके महज 24 घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली कर दिया था। सरकारी आवास केवल आपके कार्यकाल के दौरान आधिकारिक उपयोग के लिए होते हैं, और जैसे ही आपका कार्यकाल समाप्त हो, इसे तुरंत सरकार को सौंप दिया जाना चाहिए।"

सुरक्षा हटाने और बंगला खाली कराने के पीछे की टाइमिंग

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू परिवार से पहले जेड-प्लस सुरक्षा छीनना और फिर दशकों पुराने बंगले को खाली कराने का नोटिस देना, आरजेडी को बैकफुट पर लाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। सुरक्षाकर्मियों को खुद से वापस भेजकर लालू-राबड़ी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे सरकार के सामने झुकने वाले नहीं हैं और वे जनता के बीच बिना सुरक्षा के भी रहने को तैयार हैं।

फिलहाल, शनिवार को संशोधित सुरक्षा व्यवस्था के तहत तैनात सभी कर्मियों को आवास से वापस भेज दिए जाने के बाद 10 सर्कुलर रोड पर सन्नाटा पसरा है, लेकिन राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। अब देखना यह होगा कि जून के मध्य में जब 15 दिनों की डेडलाइन खत्म होगी, तब क्या बिहार सरकार लालू परिवार को बेदखल करने के लिए बल का प्रयोग करेगी या यह मामला कोर्ट की चौखट तक पहुंचेगा।

Read More
Next Story