मेसी को लस्सी कहने वाली महिला की कहानी, आज लाखों की प्रेरणा
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मेसी को 'लस्सी' कहने वाली महिला की कहानी, आज लाखों की प्रेरणा

पुडुचेरी की सेल्वी अम्मा ने फुटबॉल जर्सी बेचने के अनोखे अंदाज से सोशल मीडिया पर पहचान बनाई। मुश्किलों के बीच सफलता की मिसाल पेश की।


सोशल मीडिया पर 'लक्ष्मी अम्मा' के नाम से मशहूर सेल्वी अम्मा आज इंटरनेट की नई सनसनी बन चुकी हैं। फुटबॉल जर्सी बेचने का उनका अनोखा अंदाज उन्हें लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय बना चुका है। फुटबॉल सितारों के नामों को अपनी खास शैली में बोलने वाले उनके वीडियो करोड़ों व्यूज बटोर चुके हैं और पुडुचेरी में स्थित उनकी छोटी-सी दुकान अब देश-विदेश से आने वाले ग्राहकों का पसंदीदा ठिकाना बन गई है।

ऑनलाइन दुनिया में सेल्वी अम्मा उस महिला के रूप में जानी जाती हैं, जिन्होंने अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को "लस्सी", स्पेन के युवा स्टार लामिन यामाल को "लक्ष्मी अम्मा" और इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉलर डेविड बेकहम को "बीकॉम" कहकर लोगों का दिल जीत लिया। हालांकि इन वायरल वीडियो के पीछे संघर्ष, कठिनाइयों और दृढ़ संकल्प से भरी एक लंबी कहानी छिपी हुई है।

फुटबॉल फीवर के बीच बनीं सोशल मीडिया स्टार

अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में चल रहे फीफा विश्व कप 2026 के दौरान दुनिया भर में फुटबॉल का उत्साह चरम पर है। इसी माहौल में सेल्वी अम्मा अप्रत्याशित रूप से सोशल मीडिया की चर्चित हस्ती बनकर उभरी हैं।शुरुआत में उन्होंने केवल अपनी दुकान के प्रचार के लिए वीडियो बनाना शुरू किया था, लेकिन उनकी सहजता, सादगी और स्वाभाविक बोलने का अंदाज लोगों को इतना पसंद आया कि वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गए।

वायरल वीडियो से मिली नई पहचान

फुटबॉल प्रेमियों के लिए लियोनेल मेसी, पाउलो डिबाला और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे नाम दुनिया के महान खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। वहीं सेल्वी अम्मा के लिए ये नाम उनकी दुकान में बिकने वाली जर्सियों का हिस्सा हैं, जो ग्राहकों को आकर्षित करने का माध्यम बन गए।उनके वीडियो तेजी से इंस्टाग्राम पर फैलने लगे और हर उम्र के लोगों ने उन्हें पसंद करना शुरू कर दिया। लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही लोग उनसे मिलने के लिए दूर-दूर से उनकी दुकान पहुंचने लगे।

सेल्वी अम्मा कहती हैं, "केरल, बेंगलुरु, सिंगापुर, फ्रांस और कई अन्य जगहों के लोगों ने मेरा समर्थन किया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि लोगों को मेरी बातें इतनी पसंद आएंगी।"उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने भी अपने यूट्यूब चैनल पर उनके वीडियो का जिक्र करते हुए उन्हें बेहद मनोरंजक बताया।

संघर्षों से भरा रहा जीवन

सोशल मीडिया ने उन्हें पहचान जरूर दिलाई, लेकिन उनकी सफलता की कहानी वायरल होने से बहुत पहले शुरू हो चुकी थी।कम उम्र में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद तब एक और बड़ा झटका लगा जब बेटे के जन्म के कुछ ही महीनों बाद उनके पति उन्हें छोड़कर चले गए। सेल्वी अम्मा बताती हैं, "जब मेरा बच्चा सिर्फ छह महीने का था, तब मेरे पति मुझे छोड़कर चले गए। मैं अपने बेटे को लेकर वापस आ गई। हर समय यही सोचती थी कि उसे कैसे पालूंगी और उसका भविष्य कैसे संवारूंगी।"

वह आगे कहती हैं, "मेरे साथ मेरा बच्चा था। मैं उसके लिए जीना चाहती थी। चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं, मुझे उनका सामना करना पड़ा क्योंकि मेरे बच्चे को मेरी जरूरत थी।"अपने बेटे का भविष्य बेहतर बनाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई जब उनके बेटे को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी मिली।

छोटे स्तर से शुरू किया कारोबार

कपड़ों का व्यवसाय शुरू करने से पहले सेल्वी अम्मा शारीरिक मेहनत वाले कई काम करती थीं। उम्र बढ़ने के साथ उन्हें एहसास हुआ कि लंबे समय तक ऐसा काम करना संभव नहीं होगा।उन्होंने कहा, "पहले मैं मेहनत-मजदूरी करती थी, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह मुश्किल होने लगा। इसलिए मैंने थोड़ी मात्रा में कपड़े खरीदकर घर से बेचना शुरू किया।"उन्होंने लगभग 50 पैंट और कुछ शर्ट के साथ कारोबार की शुरुआत की। पड़ोसी, दोस्त और आसपास के लोग उनसे कपड़े खरीदने लगे। धीरे-धीरे उन्हें लगा कि इसे एक बड़े व्यवसाय में बदला जा सकता है।घर से शुरू हुआ यह छोटा-सा कारोबार समय के साथ एक दुकान में बदल गया। आज लोग सिर्फ कपड़े खरीदने ही नहीं, बल्कि उनसे मिलने भी आते हैं।

51 साल की उम्र में खोली दुकान

सेल्वी अम्मा बताती हैं कि उन्होंने 51 वर्ष की उम्र में अपनी दुकान शुरू की थी और अब इसे तीन साल हो चुके हैं।उन्होंने कहा, "मेरा बेटा और परिवार मेरा पूरा सहयोग करते हैं। मैं कपड़े खरीदती हूं और उन्हें उचित कीमत पर बेचती हूं।"

सोशल मीडिया बना कारोबार का टर्निंग प्वाइंट

उनके व्यवसाय में सबसे बड़ा बदलाव सोशल मीडिया के जरिए आया। बिना किसी पेशेवर उपकरण या मार्केटिंग टीम के उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाना शुरू किया।उनका प्राकृतिक अंदाज लोगों को पसंद आया और देखते ही देखते उनके फॉलोअर्स बढ़ने लगे।वह कहती हैं, "मुझे परफेक्ट वीडियो बनाना नहीं आता। मैं बस स्वाभाविक रूप से बात करती हूं। लोगों ने कहा कि खुद को मत बदलिए, जैसे बोलती हैं वैसे ही बोलिए। लोगों को यही पसंद आता है।" उनकी जर्सियों का प्रचार करने की अनोखी शैली ही उनकी सबसे बड़ी मार्केटिंग ताकत बन गई और इसी के दम पर उन्होंने अलग-अलग राज्यों और देशों से ग्राहक जुटा लिए।

लोकप्रियता के बावजूद नहीं भूलीं सामाजिक जिम्मेदारी

बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद सेल्वी अम्मा अपने उत्पादों को सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।वह कहती हैं, "मैं नहीं चाहती कि लोगों को कपड़े खरीदने में परेशानी हो। मेरी शर्ट 350 रुपये से शुरू होती हैं। मैं M से लेकर 4XL तक सभी साइज रखती हूं ताकि हर कोई खरीद सके।"इतना ही नहीं, वह जरूरतमंद छात्रों की भी मदद करती हैं।"कई छात्र यहां आते हैं। कभी-कभी उनके पास पूरे पैसे नहीं होते। अगर 50 रुपये कम पड़ जाते हैं तो मैं उनकी मदद कर देती हूं, क्योंकि शिक्षा बहुत जरूरी है।"

मेहनत और जज्बे की मिसाल

सेल्वी अम्मा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि छोटे व्यवसाय सोशल मीडिया का उपयोग करके किस तरह नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।इंटरनेट ने भले ही उन्हें "लस्सी" कहकर मेसी की जर्सी बेचने वाली महिला के रूप में पहचान दिलाई हो, लेकिन उनकी सफलता की असली नींव संघर्ष, कड़ी मेहनत और अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन बनाने के अटूट संकल्प में छिपी है। आज सेल्वी अम्मा न केवल एक सफल व्यवसायी हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी हैं।

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