
राघव चड्ढा का BJP में शामिल होने का ऐलान, छोड़ा AAP का साथ
राघव चड्ढा का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भीतर एक बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तरह है। राघव ने दावा किया कि उनके साथ राज्यसभा के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन है।
भारतीय राजनीति के गलियारों से आज की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे चर्चित चेहरों में से एक और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा का दर्द और गुस्सा साफ नजर आया। उन्होंने न केवल पार्टी छोड़ी, बल्कि पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर गंभीर सवाल भी खड़े किए।
गलत पार्टी में सही आदमी
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने एक बेहद तीखी और चुटीली टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "मैं पिछले काफी समय से घुटन महसूस कर रहा था। मुझे अब अहसास हुआ है कि मैं एक गलत पार्टी में सही आदमी था।" चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा कि जिस उम्मीद और जिन बुनियादी मूल्यों के साथ इस पार्टी का गठन हुआ था, आज की 'आम आदमी पार्टी' उनसे कोसों दूर जा चुकी है। उन्होंने साफ कहा कि अब यह पार्टी अपने आदर्शों से भटक गई है और वह अब इसका हिस्सा बने रहकर अपने अंतर्मन से समझौता नहीं कर सकते।
दो-तिहाई सांसदों का साथ: AAP के लिए खतरे की घंटी
राघव चड्ढा का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भीतर एक बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तरह है। राघव ने दावा किया कि उनके साथ राज्यसभा के दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन है। उन्होंने बताया कि कुल 10 सांसदों में से 7 उनके साथ हैं और उन्होंने आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
इन बागी सांसदों में दिग्गज क्रिकेटर हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से हैं। यदि राघव का दावा सही साबित होता है, तो सदन में AAP का संख्या बल घटकर मात्र 3 ही रह जाएगा, जो पार्टी के लिए एक वैधानिक और राजनीतिक आपदा से कम नहीं है।
"पार्टी से दूर, जनता की ओर"
अपनी भविष्य की रणनीति पर बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा, "मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और सीधे जनता की ओर बढ़ रहा हूं।" हालांकि उन्होंने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे या अपनी नई राह चुनेंगे, लेकिन उनके लहजे से स्पष्ट था कि वह एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की तैयारी में हैं।
AAP के लिए सबसे कठिन समय
अरविंद केजरीवाल के लिए यह खबर एक व्यक्तिगत और राजनीतिक सदमे की तरह है। राघव चड्ढा को केजरीवाल का दाहिना हाथ माना जाता था। पंजाब में जीत की पटकथा लिखने वाले राघव का इस तरह से बागी होना और अपने साथ सांसदों की फौज ले जाना, AAP के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर रहा है। दिल्ली और पंजाब की सरकारों पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन आज की इस घटना ने 2026 की राजनीति का पूरा नक्शा बदल दिया है।

