मालवीय नगर अग्निकांड: PM मोदी ने जताया गहरा दुख, मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का किया ऐलान
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मालवीय नगर अग्निकांड: PM मोदी ने जताया गहरा दुख, मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का किया ऐलान

जांच में सामने आया है कि होटल के पास सिर्फ 6 कमरों का लाइसेंस था, लेकिन वहां अवैध रूप से 25 से ज्यादा कमरे बनाए गए थे। बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था और बेसमेंट के गेट पर ताला लगा होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए।


बुधवार सुबह दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर के एक नामी होटल-कम-रेस्तरां में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते पूरी इमारत को तबाही के मंजर में बदल दिया। इस खौफनाक अग्निकांड में 40 से अधिक लोग हताहत हुए हैं, जिनमें से 21 लोगों की जिंदा जलकर और दम घुटने से मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि लगभग इतने ही लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएमओ की तरफ से जारी बयान में मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया गया है।

फिर खुली पोल

इस भयानक हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में चल रहे अवैध कमर्शियल निर्माण और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की पोल खोलकर रख दी है। यह दिल दहला देने वाला हादसा मालवीय नगर के 'फ्लोरिश स्टे' (Flourish Stay) नाम के एक होटल और रेस्तरां में हुआ। बुधवार सुबह करीब 8 बजकर 48 मिनट पर जब लोग सोकर उठे ही थे, तभी अचानक पूरी इमारत आग की लपटों और काले जहरीले धुएं के गुबार में घिर गई। दिल्ली पुलिस ने होटल मालिक और प्रबंधन के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC 304) समेत कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मैक्स अस्पताल में इलाज कराने आए परिजनों के साथ हुआ हादसा

इस हादसे की सबसे दुखद और संवेदनशील बात यह है कि इस होटल में ठहरे अधिकांश लोग वे थे, जिनके सगे-संबंधी और परिजन पास में ही स्थित प्रसिद्ध मैक्स अस्पताल (Max Hospital) में गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे थे। इलाज के सिलसिले में देश और विदेश के अलग-अलग कोनों से आए ये लोग इस उम्मीद में यहाँ रुके थे कि अस्पताल पास होने के कारण उन्हें सहूलियत होगी। लेकिन किसे पता था कि जिस इमारत को उन्होंने महफूज समझकर चुना था, वही उनके लिए मौत का कुआं साबित होगी। मृतकों और घायलों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश अफ्रीकी देशों के बताए जा रहे हैं। ये लोग मेडिकल टूरिज्म के तहत दिल्ली आए हुए थे।

6 कमरों का लाइसेंस, ठूस रखे थे 25 से ज्यादा कमरे

हादसे के बाद जो प्रशासनिक और कानूनी कमियां सामने आई हैं, वे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। शुरुआती जांच और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस 'फ्लोरिश स्टे' होटल के पास केवल 6 कमरों का ही बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) लाइसेंस था। लेकिन ज्यादा मुनाफा कमाने के अंधाधुंध लालच में नियमों को ताक पर रखकर इस छोटी सी इमारत के भीतर 25 से ज्यादा कमरे बना दिए गए थे।

पूरी इमारत को कंक्रीट का एक ऐसा डिब्बा बना दिया गया था जिसमें वेंटिलेशन या आपातकालीन निकास (Emergency Exit) का कोई रास्ता नहीं था। सबसे खतरनाक बात यह थी कि पूरी बहुमंजिला इमारत से बाहर निकलने का सिर्फ एक ही संकरा रास्ता था। जब आग लगी, तो वह रास्ता पूरी तरह धुएं और लपटों से ब्लॉक हो गया, जिससे लोगों को भागने का मौका ही नहीं मिला।

बाहर लगा था ताला, अंदर जिंदा जल रहे थे लोग

इस अग्निकांड की जो सबसे भयानक और रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई, वो बेसमेंट की थी। चश्मदीदों के मुताबिक, जब इमारत में आग भड़की, तो कुछ लोग बेसमेंट में भी मौजूद थे। हैरानी और घोर लापरवाही की बात यह है कि बेसमेंट के बाहरी मुख्य गेट पर बाहर से ताला लटका हुआ था। अंदर फंसे लोग चीख रहे थे, दरवाजा पीट रहे थे, लेकिन बाहर ताला होने के कारण वे समय पर बाहर नहीं आ सके और अंदर ही जिंदा जलने और दम घुटने को मजबूर हो गए। सुरक्षा मानकों की ऐसी क्रूर अनदेखी ने कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।

तीसरी मंजिल से जान बचाने के लिए कूदे लोग, स्थानीय लोगों ने दिखाई बहादुरी

जैसे ही आग की लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंचीं, इमारत के अंदर अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की जद्दोजहद में लोगों को जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने तीसरी मंजिल की खिड़कियों से नीचे छलांग लगानी शुरू कर दी। इस खौफनाक मंजर को देखकर आसपास के स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े।

स्थानीय निवासियों ने सूझबूझ और इंसानियत का परिचय देते हुए अपने घरों से गद्दे, रजाई और चादरें निकालकर नीचे सड़क पर बिछाईं, ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों को गंभीर चोट न आए और उनकी जान बचाई जा सके। कई लोगों को स्थानीय युवाओं ने अपनी जान पर खेलकर इमारत से बाहर निकाला। अगर स्थानीय लोग तुरंत सक्रिय न होते, तो मरने वालों का आंकड़ा और भी डरावना हो सकता था।

दमकल विभाग और पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन

दक्षिण दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि पुलिस कंट्रोल रूम को सुबह 8 बजकर 48 मिनट पर मालवीय नगर के 'फ्लोरिश स्टे' होटल में आग लगने की सूचना मिली थी। इस खबर के मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और दमकल विभाग की 8 गाड़ियों को तुरंत मौके पर रवाना किया गया।

फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त टीमों ने भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिशें शुरू कीं। इमारत के संकरे रास्तों और भीषण धुएं के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। दमकलकर्मियों ने क्रेन और सीढ़ियों की मदद से खिड़कियों को तोड़कर इमारत के भीतर से 40 से अधिक लोगों को बाहर निकाला। इन सभी को तुरंत पास के अस्पतालों और मैक्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने 21 लोगों को मृत घोषित कर दिया। बाकी घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

कैसे लगी आग? शॉर्ट सर्किट से भड़की लपटें

इमारत में आग कैसे लगी, इसको लेकर अभी विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जा रही है, लेकिन मौके पर पहुंचे आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने बताया कि शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि होटल के ठीक सामने बिजली के तारों का जो बड़ा जाल फैला हुआ था, उसमें भयंकर शॉर्ट सर्किट हुआ। शॉर्ट सर्किट के कारण निकली चिंगारियों ने तुरंत होटल के निचले हिस्से और रेस्तरां की रसोई (Kitchen) को अपनी चपेट में ले लिया। रसोई में गैस और ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग ने पल भर में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी बहुमंजिला इमारत को अपनी आगोश में ले लिया।

यह हादसा एक बार फिर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध होटलों, बेसमेंट के गलत इस्तेमाल और फायर सेफ्टी नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डिंग मालिकों पर कड़े सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक बेकसूर लोग चंद पैसों के लालच की भेंट चढ़ते रहेंगे?

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