
अंतिम संस्कार के बाद जिंदा लौटा खदान विस्फोट में ‘मृत’ घोषित व्यक्ति, शव की पहचान पर उठे सवाल
9 फरवरी को राज्य सरकार ने घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान बंद कर दिया था, क्योंकि आकलन टीमों ने निष्कर्ष निकाला था कि खदान के अंदर फंसे लोगों के जीवित मिलने की कोई संभावना नहीं बची है
मेघालय के पूर्वी जैंतिया हिल्स में एक अवैध रैट-होल कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट में मृत घोषित किए गए 31 मजदूरों में शामिल एक खनिक अपने अंतिम संस्कार के कुछ दिनों बाद जीवित घर लौट आया।
यह विस्फोट 5 फरवरी को मिंसंगाट गांव के दूरस्थ थांग्स्कू क्षेत्र में स्थित अवैध खदान में हुआ था। बताया जा रहा है कि विस्फोट डायनामाइट के इस्तेमाल के कारण हुआ।
9 फरवरी को राज्य सरकार ने घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान बंद कर दिया था, क्योंकि आकलन टीमों ने निष्कर्ष निकाला था कि खदान के अंदर फंसे लोगों के जीवित मिलने की कोई संभावना नहीं बची है।
श्यामबाबू सिन्हा, जो असम के श्रीभूमि ज़िले के रताबाड़ी थाना क्षेत्र के निवासी हैं, विस्फोट में मारे जाने की खबर के तीन दिन बाद अचानक अपने गांव पहुंच गए। उनकी अचानक वापसी से परिवार और अधिकारी दोनों ही स्तब्ध हैं। अब उस शव की पहचान पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिसका उनके नाम पर अंतिम संस्कार किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि शव की पहचान की प्रक्रिया के बाद उसे परिजनों को सौंपा गया था, लेकिन अब उस प्रक्रिया की जांच की जा रही है। यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या यह अफरा-तफरी का नतीजा था, दस्तावेज़ों में लापरवाही थी या घटनास्थल पर और भी गंभीर चूकें हुईं?
इस बीच, विस्फोट की जांच तेज कर दी गई है। अवैध खनन नेटवर्क, संभावित साजिश और विस्फोटकों के असुरक्षित इस्तेमाल के आरोपों ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। जो मामला शुरुआत में एक दुखद हादसे के रूप में सामने आया था, वह अब तेजी से सबसे जटिल और रहस्यमय मामलों में से एक बनता जा रहा है।

