
हाईकोर्ट के फैसले से घिरीं गिरिबाला सिंह, CBI कभी भी कर सकती है गिरफ्तार
ट्विशा शर्मा मौत मामले में हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। CBI अब गिरफ्तारी और गहन जांच की तैयारी में है।
भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। हाईकोर्ट ने बुधवार देर रात 17 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी पक्ष को राहत देना उचित नहीं था।
कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मृतका ट्विशा शर्मा के शरीर पर फांसी के अलावा कई अन्य चोटों के निशान मिले थे, जिनका आरोपी पक्ष संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
गुरुवार सुबह गिरिबाला सिंह के घर पहुंची CBI टीम
हाईकोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार सुबह CBI की टीम गिरिबाला सिंह के घर पहुंची और पूछताछ शुरू की। सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने घर में हाई-इंटेंसिटी 3D कैमरा लगाकर फर्स्ट फ्लोर समेत पूरे मकान की 360 डिग्री रिकॉर्डिंग की। दीवारों की ऊंचाई और घटनास्थल की संरचना का तकनीकी परीक्षण भी किया जा रहा है।CBI अब गिरिबाला सिंह को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है, क्योंकि अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद गिरफ्तारी से मिली कानूनी सुरक्षा समाप्त हो चुकी है।
इससे पहले मामले में आरोपी बनाए गए पति समर्थ सिंह को अदालत में पेश करने के बाद CBI ने अपनी हिरासत में ले लिया था। कोर्ट ने उसे 29 मई तक CBI रिमांड पर भेजा है, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी ट्विशा की मौत
ट्विशा शर्मा की 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या, दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए 24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम द्वारा ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया। मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां भाई मेजर हर्षित ने मुखाग्नि दी।
हाईकोर्ट ने आरोपी पक्ष के व्यवहार पर भी उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की गई, जिसे जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आईं कई अहम बातें
हाईकोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मृतका के शरीर पर फांसी के अलावा भी चोटों के निशान पाए गए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं।अदालत ने इसे मामले का महत्वपूर्ण पहलू बताते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में गहन और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
गर्भपात के दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप
कोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं कि पति और सास उस पर गर्भपात कराने का दबाव डाल रहे थे। साथ ही दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगातार सामने आए हैं।व्हाट्सऐप चैट्स और पारिवारिक बातचीत का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड और साक्ष्यों की गहराई से जांच करने पर मामले की तस्वीर ट्रायल कोर्ट की टिप्पणी से अलग दिखाई देती है।
हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं था।ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और साक्ष्यों का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया। आरोपी पक्ष चोटों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जांच में पूरा सहयोग नहीं किया गया।मीडिया में बयान देकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की गई।पोस्टमॉर्टम में फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी मिले।गवाहों ने गर्भपात के दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।अग्रिम जमानत केवल विशेष परिस्थितियों में दी जानी चाहिए।
ट्रायल कोर्ट के आदेश को किया रद्द
हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि 15 मई 2026 को 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश न्यायोचित नहीं था। इसी के साथ अदालत ने वह आदेश रद्द (Quash) कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।
CBI और राज्य सरकार की दलीलें
राज्य सरकार और CBI की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत में कहा कि गर्भावस्था के बाद पति और सास ट्विशा के चरित्र पर संदेह कर रहे थे।गर्भपात कराने का दबाव बनाया जा रहा था।ट्विशा ने अपने परिवार को मानसिक प्रताड़ना की जानकारी दी थी।आरोपी प्रभावशाली हैं और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।मामले में हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) जरूरी है।
ट्विशा के पिता की ओर से क्या दलील दी गई?
ट्विशा के पिता की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा व्हाट्सऐप चैट्स में मानसिक प्रताड़ना के स्पष्ट संकेत हैं। पति गर्भ में पल रहे बच्चे पर शक करता था।ट्विशा कई बार मायके ले जाने की गुहार लगा चुकी थी।परिवार को घटना और जांच की पूरी जानकारी नहीं दी गई।CCTV फुटेज से छेड़छाड़ और जल्दबाजी में जमानत देने के आरोप भी लगाए गए।
आरोपी पक्ष ने क्या कहा?
गिरिबाला सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील ने अदालत में दलील दी कि ट्विशा ने आत्महत्या की थी। घटना के तुरंत बाद उसे AIIMS ले जाया गया था।पुलिस ने उसी दिन मोबाइल और DVR जब्त कर लिए थे।व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य आरोप पति पर हैं, सास पर नहीं।अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए असाधारण परिस्थितियां जरूरी होती हैं, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं।
आगे क्या हो सकता है?
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले में कई बड़े घटनाक्रम संभव हैं:
गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी
अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद CBI अब गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर सकती है।
हिरासत में पूछताछ
CBI डिजिटल सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सऐप चैट्स, CCTV फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट का मिलान कर रही है।
अन्य लोगों से पूछताछ
आने वाले दिनों में डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों, मर्ग पंचनामा तैयार करने वालों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प
आरोपी पक्ष के पास अब सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल करने का विकल्प खुला है। वे हाईकोर्ट के आदेश पर रोक और दोबारा जमानत की मांग कर सकते हैं।CBI की जांच अब किन बिंदुओं पर केंद्रित है? CBI यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 12 मई की रात वास्तव में क्या हुआ था? घटना के बाद समर्थ सिंह की गतिविधियां क्या थीं? फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था? डिजिटल सबूत और बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं या नहीं? मामला आत्महत्या का है या किसी दबाव अथवा साजिश का परिणाम?
एजेंसी अब तक ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और मायके पक्ष के परिजनों के बयान दर्ज कर चुकी है। पारिवारिक विवाद, फोन कॉल, व्यवहार और घटनाक्रम का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है।मामले की गंभीरता और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब यह जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।

