
मियाद खत्म होते ही बड़ा खेल; नटराजन का पत्ता कटने से बिना वोट जीती BJP
तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित। नाम वापसी की मियाद खत्म होते ही RO ने सौंपे प्रमाण पत्र; सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस।
Madhya Pradesh Rajyasabha Election: मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव की तस्वीर आज दोपहर 3 बजे पूरी तरह साफ हो गई और बिना एक भी वोट डाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीनों सीटों पर एकतरफा क्लीन स्वीप कर लिया है. नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा खत्म होने के बाद मैदान में केवल तीन ही उम्मीदवार शेष बचे थे, जिसके चलते रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर जीत का आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंप दिया.
मध्य प्रदेश की इन तीन सीटों से भाजपा के दिग्गज नेता तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट अब आधिकारिक तौर पर राज्यसभा सांसद बन चुके हैं. नव-निर्वाचित सांसदों के स्वागत के लिए बीजेपी प्रदेश कार्यालय में भव्य तैयारियां की जा रही हैं, जहां विधायक दल की बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री इनका स्वागत करेंगे. इस एकतरफा जीत ने मध्य प्रदेश की सियासत में बीजेपी के दबदबे को एक बार फिर साबित कर दिया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को ऐन वक्त पर मैदान से बाहर होना पड़ा.
क्यों आई ऐसी स्थिति? हैदराबाद कोर्ट के मामले पर उलझा कांग्रेस का गणित
मध्य प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव उस समय पूरी तरह एकतरफा हो गया, जब स्क्रूटनी (जांच) के दौरान कांग्रेस की इकलौती उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया.
विवाद की मुख्य कड़ियाँ:
बीजेपी की आपत्ति: भाजपा ने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है.
RO का फैसला: रिटर्निंग ऑफिसर ने स्क्रूटनी के दौरान भाजपा की आपत्ति को कानूनी रूप से सही पाया और नियमों का उल्लंघन मानते हुए नटराजन का पर्चा निरस्त कर दिया.
कांग्रेस की दलील: कांग्रेस ने इस फैसले पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई है. पार्टी का कहना है कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, बल्कि उन्हें केवल हैदराबाद की अदालत से एक सामान्य नोटिस मिला था. पार्टी के अनुसार, चूंकि मामला अभी प्रक्रिया में था, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करने का कोई कानूनी दायित्व नहीं बनता था.
सड़क पर प्रदर्शन, चुनाव आयोग से झटका; अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर कांग्रेस
नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में भारी उबाल आ गया था. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ राज्य भर में तीखे विरोध प्रदर्शन किए और सड़क पर उतरे. मामला तुरंत केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) के पास ले जाया गया, लेकिन वहां भी कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिली. आयोग ने भी 'आपराधिक जानकारी छिपाने' के आधार को सही मानते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय को बरकरार रखा.
चुनाव आयोग से बड़ा झटका लगने के बाद, कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन ने अब देश की शीर्ष न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया है. कांग्रेस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है. हालांकि, आज तकनीकी रूप से चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो जाने और बीजेपी उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र मिल जाने के बाद, अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले और रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले की समीक्षा किस तरह करता है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं.
Next Story

