
मुल्लापेरियार पर सख्त रुख, क्या TVK के केरल मिशन को लगेगा झटका?
मुल्लापेरियार नदी पर विजय सरकार ने नया बांध बनाने का विरोध किया है। इससे TVK के संभावित केरल विस्तार और वहां की राजनीति में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
जब तमिलनाडु के नए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने पहली बार विधानसभा को संबोधित किया, तो चर्चा उनके भाषण की सामग्री से ज्यादा उसके तरीके को लेकर हुई। उनके पूर्ववर्ती आर एन रवि अक्सर पिछली डीएमके सरकार से टकराव में रहे थे और एक बार तो भाषण के दौरान सदन से बाहर भी चले गए थे। लेकिन अरलेकर ने सरकार द्वारा तैयार किया गया पूरा भाषण बिना किसी बदलाव, विवाद या नाटकीयता के पढ़ा।
हालांकि, इस भाषण में एक ऐसी घोषणा थी जिसके प्रभाव तमिलनाडु से कहीं आगे तक जा सकते हैं। तमिलगा वेत्री कड़गम यानी टीवीके सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वह मुल्ला पेरियार के स्थान पर नया बांध बनाने की केरल की मांग का विरोध करेगी। सरकार मौजूदा बांध में जलस्तर बढ़ाने और उसके रखरखाव कार्यों को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। एक ही पैराग्राफ में विजय सरकार ने दक्षिण भारत के सबसे जटिल अंतरराज्यीय विवादों में से एक में अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया।
आजादी से भी पुराना है मुल्लापेरियार बांध
मुल्लापेरियार बांध का निर्माण 1895 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था। यह वर्तमान में केरल की सीमा में स्थित है, लेकिन इसका संचालन तमिलनाडु करता है। इस बांध का पानी तमिलनाडु के पांच दक्षिणी जिलों—थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम—की सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है।इन जिलों के किसानों के लिए यह बांध सिर्फ एक पुरानी संरचना नहीं, बल्कि उनकी कृषि व्यवस्था की जीवनरेखा है।
दूसरी ओर, केरल की चिंता अलग है। 130 साल से अधिक पुराने इस बांध का निर्माण चूने और सुरखी के मिश्रण से किया गया था। यह भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। केरल का तर्क है कि यदि बांध को कोई संरचनात्मक नुकसान हुआ तो उसके नीचे बसे कम से कम पांच जिलों में भारी तबाही आ सकती है, जिनमें राज्य की आर्थिक राजधानी कोच्चि वाला एर्नाकुलम जिला भी शामिल है।इसी कारण केरल लंबे समय से नए बांध के निर्माण की मांग करता रहा है।
तमिलनाडु और केरल के बीच वर्षों से गतिरोध
तमिलनाडु लगातार यह दावा करता रहा है कि बांध पूरी तरह सुरक्षित है और समाधान नए बांध में नहीं, बल्कि जलस्तर बढ़ाने में है।2014 में Supreme Court of India ने बांध का जलस्तर 142 फीट तक बढ़ाने की अनुमति दी थी। साथ ही संरचनात्मक मजबूती के बाद इसे 152 फीट तक बढ़ाने की संभावना भी जताई थी। लेकिन केरल ने मजबूतीकरण कार्यों का विरोध जारी रखा और नए बांध की मांग पर अड़ा रहा।नतीजतन, दशकों से यह विवाद किसी समाधान तक नहीं पहुंच पाया है।
अब TVK सरकार की नीति घोषणा ने तमिलनाडु का रुख औपचारिक रूप से दोहरा दिया है। लेकिन इसके साथ ही अभिनेता से नेता बने Vijay के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती भी पैदा हो गई है।
केरल में TVK के विस्तार की तैयारी
विधानसभा के इस सत्र से पहले ही TVK के केरल में विस्तार के संकेत मिलने लगे थे।वायनाड के सीमावर्ती कस्बे वेंगापल्ली में युवा पेशेवरों ने TVK के बैनर लगाए और पार्टी के आधिकारिक ऐप के जरिए सदस्यता अभियान शुरू किया। सितंबर 2025 से कोझिकोड, एर्नाकुलम, मलप्पुरम और अलाप्पुझा जैसे जिलों में TVK के नाम से व्हाट्सऐप समूह भी सक्रिय बताए जाते हैं।पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार पलक्कड़ और वायनाड में अनौपचारिक बैठकों का आयोजन भी किया गया है तथा अगले कुछ महीनों में विस्तार को लेकर औपचारिक घोषणा संभव है।
TVK के लिए केरल क्यों महत्वपूर्ण?
TVK ने अप्रैल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर शानदार शुरुआत की, लेकिन पूर्ण बहुमत से 10 सीटें पीछे रह गई। कांग्रेस के पांच विधायकों ने सरकार गठन में अहम भूमिका निभाई।10 मई को राहुल गांधी की शपथ ग्रहण समारोह में मौजूदगी ने इस गठबंधन को राजनीतिक मजबूती का संकेत दिया।उधर केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 140 में से 102 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की। कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीतीं।दो राज्यों में चुनावी सफलता, साझा सहयोगी और भौगोलिक निकटता—ये सभी कारक TVK के लिए केरल को स्वाभाविक विस्तार क्षेत्र बनाते हैं।
विजय की लोकप्रियता भी बड़ा कारण
केरल में विजय की लोकप्रियता किसी स्थानीय सुपरस्टार से कम नहीं है। उनकी फिल्मों को वहां भी उतनी ही उत्सुकता से देखा जाता है जितना तमिलनाडु में। फिल्म जिल्ला में उन्होंने Mohanlal के साथ काम किया था। वहीं थेरी में उनका किरदार जोसेफ कुरुविला केरल से जुड़ा हुआ था।इसके अलावा विजय की सामाजिक संस्था विजय मक्कल इयक्कम वर्षों से केरल में राहत कार्य, सामाजिक सेवा और कल्याणकारी कार्यक्रम चलाती रही है। यह संगठन कई मायनों में पहले से ही राजनीतिक कैडर की तरह काम कर रहा है।
मुल्लापेरियार विवाद बना सबसे बड़ी बाधा
समस्या यह है कि विजय के लाखों प्रशंसक उन्हीं इलाकों में रहते हैं जिन्हें केरल सरकार मुल्लापेरियार बांध से संभावित खतरे वाला क्षेत्र मानती है।एर्नाकुलम, इडुक्की और अन्य प्रभावित जिलों के निवासियों के लिए यह केवल राजनीतिक या भावनात्मक मुद्दा नहीं है। यह उनकी सुरक्षा और जीवन से जुड़ा प्रश्न है।ऐसे में यदि TVK नए बांध का विरोध करती है, तो केरल के एक बड़े वर्ग को यह संदेश जा सकता है कि पार्टी उनकी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है।
दूसरी ओर, तमिलनाडु में जल अधिकारों के मुद्दे पर नरम रुख अपनाना भी विजय सरकार के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है।यही वह दुविधा है जिसने TVK को दो अलग-अलग राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस भी बन सकती है चुनौती
केरल में कांग्रेस की हालिया प्रचंड जीत के बाद पार्टी के पास TVK जैसे नए खिलाड़ी को बढ़ावा देने की कोई स्पष्ट राजनीतिक मजबूरी नहीं है।
भविष्य में TVK उन्हीं युवा और महत्वाकांक्षी मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है जो फिलहाल कांग्रेस का समर्थन करते हैं। ऐसे में कांग्रेस TVK को सहयोगी के रूप में देखेगी या संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
अवसर भी, चुनौती भी
फिलहाल TVK ने केरल में विस्तार की औपचारिक घोषणा नहीं की है। पार्टी को अभी अपनी पहली सरकार को मजबूत करना है, गठबंधन को संभालना है और शासन से जुड़े वादों को पूरा करना है।फिर भी केरल में मौजूद मजबूत प्रशंसक आधार, कांग्रेस के साथ गठबंधन, वैचारिक समानता और भौगोलिक निकटता ऐसे कारक हैं जो भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को मजबूत बनाते हैं।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या मुल्लापेरियार बांध पर TVK सरकार की स्पष्ट घोषणा ने केरल में उसके संभावित राजनीतिक विस्तार को पहले से कहीं अधिक कठिन बना दिया है? यह सवाल आने वाले वर्षों में विजय की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

