संजय राउत के बयानों से टूटी शिवसेना? बागी सांसदों ने खोली अंदर की बात
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संजय राउत के बयानों से टूटी शिवसेना? बागी सांसदों ने खोली अंदर की बात

महाराष्ट्र राजनीति: उद्धव गुट के 6 सांसदों की बगावत पर सीएम फडणवीस और डिप्टी सीएम शिंदे का बड़ा बयान। बोले- ऑपरेशन सफल रहा, हम कोई मिशन अधूरा नहीं छोड़ते।


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Operation Tiger: महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में 'ऑपरेशन टाइगर' (Operation Tiger) अब अपने अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुका है। हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर के बाद, धाराशिव (उस्मानाबाद) से सांसद ओमराजे निंबालकर द्वारा भी उद्धव गुट का साथ छोड़ने और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने के आधिकारिक रुख के बाद महायुति सरकार के हौसले बुलंद हैं। इस बड़ी सियासी टूट की आहट पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पहली आधिकारिक और बेहद तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। दोनों नेताओं ने साफ संकेत दे दिया है कि उद्धव गुट में सांसदों की यह सेंधमारी पूरी तरह कामयाब हो चुकी है।

'ऑपरेशन सफल रहा, पेशेंट की रिपोर्ट आ जाएगी': देवेंद्र फडणवीस

शिवसेना (UBT) में मची इस भारी भगदड़ और सांसदों के पाला बदलने की खबरों पर जब मीडिया ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल किया, तो उन्होंने बेहद चुटीले और सधे हुए अंदाज में तंज कसा। फडणवीस ने मेडिकल कूटनीति की भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा:

"हमारा ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा है। अब बस कुछ ही समय की बात है, पेशेंट की आधिकारिक रिपोर्ट भी जल्द ही सबके सामने आ जाएगी।"

फडनवीस का यह बयान साफ करता है कि परदे के पीछे चल रही स्क्रिप्ट अब पूरी तरह तैयार है और दिल्ली से लेकर मुंबई तक नंबर गेम पूरी तरह महायुति के पक्ष में सेट हो चुका है।

'हम कोई ऑपरेशन अधूरा नहीं छोड़ते': एकनाथ शिंदे

वहीं, साल 2022 में विधायकों की ऐतिहासिक बगावत का नेतृत्व करने वाले और अब उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने पुराने आक्रामक अंदाज में उद्धव ठाकरे को ललकारा। उन्होंने 'ऑपरेशन टाइगर' की कामयाबी पर मुहर लगाते हुए कहा:

"शिवसेना और बालासाहेब के विचारों को आगे बढ़ाना ही हमारा लक्ष्य है। जहां तक इस ऑपरेशन की बात है, तो हर कोई जानता है कि हम जब भी कोई मिशन या ऑपरेशन हाथ में लेते हैं, तो उसे कभी भी अधूरा नहीं छोड़ते। यह काम भी अपने अंजाम तक पहुंचेगा।"

क्या है 'ऑपरेशन टाइगर' का पूरा घटनाक्रम और नंबर गेम?

इस सियासी भूचाल की इनसाइड स्टोरी और कानूनी दांव-पेंच को इन मुख्य बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है:

अपमानजनक भाषा बनी तात्कालिक वजह: हिंगोली सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर ने साफ किया कि वे 18 जून तक पार्टी में ही थे, लेकिन संजय राउत द्वारा लगातार 'गद्दार', 'बेईमान' और 'फ्रॉड' कहे जाने जैसी असंसदीय भाषा के कारण बागी सांसदों ने 'मातोश्री' का साथ छोड़ने का अंतिम फैसला लिया।

फंड की कमी और विकास की मजबूरी: सांसदों का आरोप है कि विपक्ष में रहने के कारण उनके क्षेत्रों में विकास कार्य ठप पड़े थे। सालाना 5 करोड़ रुपये का MPLAD फंड बेहद नाकाफी था, जिसके चलते जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए उन्होंने सत्ता पक्ष (महायुति) के साथ जाने का व्यावहारिक कदम उठाया।

दलबदल कानून का गणित: लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट के पास कुल 9 सांसद हैं। दलबदल कानून के तहत बिना सदस्यता गंवाए सुरक्षित बगावत करने के लिए दो-तिहाई यानी कम से कम 6 सांसदों की जरूरत थी।

6 बागियों का आंकड़ा पूरा: नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमराजे निंबालकर के अलावा संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे वे 6 नाम हैं जो पहले ही दिल्ली की बैठकों से दूरी बना चुके हैं। ओमराजे निंबालकर के ताजा रुख के बाद अब कानूनी तौर पर उद्धव गुट की इस टूट पर मुहर लगनी तय है और शिंदे गुट में विलय अब महज एक औपचारिक औपचारिकता रह गया है।

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