वंदे मातरम पर BJP सख्त, ओवैसी बोले यह राष्ट्रगान के बराबर नहीं
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असदुद्दीन ओवैसी। फाइल फोटो।

वंदे मातरम पर BJP सख्त, ओवैसी बोले 'यह राष्ट्रगान के बराबर नहीं'

ओवैसी ने 'वंदे मातरम' और राष्ट्रगान को समान दर्जा देने का विरोध किया, जिस भाजपा ने इन्हें इतिहास की याद दिलाते हुए जिन्ना का रास्ता दिखा दिया...


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AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के उस फैसले पर आपत्ति जताई है, जिसमें 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान वैधानिक सुरक्षा देने की बात कही गई है। ओवैसी का कहना है कि इस गीत को राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता। क्योंकि यह एक देवी की स्तुति है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र किसी भगवान या देवी के नाम पर नहीं चलता है और न ही यह किसी एक भगवान या देवी का है।

ओवैसी का तर्क: 'धर्म और राष्ट्र एक नहीं'

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में ओवैसी ने कहा, "जन गण मन भारत और उसके लोगों का उत्सव मनाता है, किसी विशेष धर्म का नहीं। धर्म, राष्ट्र के बराबर (समान) नहीं है। वंदे मातरम लिखने वाले व्यक्ति ब्रिटिश राज के प्रति सहानुभूति रखते थे और मुसलमानों से नफरत करते थे। नेताजी बोस, गांधी, नेहरू और टैगोर सभी ने इसे खारिज कर दिया था।"

भारत के संविधान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रस्तावना (Preamble) "हम, भारत के लोग" से शुरू होती है न कि "भारत मां" से। यह "विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता" का वादा करती है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान का पहला प्रावधान, अनुच्छेद 1, "इंडिया, जो कि भारत है" को राज्यों के संघ के रूप में वर्णित करता है।

संविधान सभा का संदर्भ

ओवैसी ने उल्लेख किया कि संविधान सभा में कुछ सदस्य चाहते थे कि प्रस्तावना की शुरुआत किसी देवी के नाम से हो और उन्होंने विशेष रूप से 'वंदे मातरम' का आह्वान किया था। अन्य सदस्य चाहते थे कि इसकी शुरुआत "ईश्वर के नाम पर" हो और "इसके नागरिकों" को "उसके (स्त्रीलिंग) नागरिकों" से बदल दिया जाए। हालांकि, ओवैसी के अनुसार, ये सभी संशोधन खारिज कर दिए गए थे।

उन्होंने कहा, "इंडिया, जो कि भारत है, यहां के लोग हैं। राष्ट्र कोई देवी नहीं है, यह किसी भगवान या देवी के नाम पर नहीं चलता है और यह किसी एक भगवान या देवी का नहीं है।"

भाजपा का पलटवार: 'सांस्कृतिक एकीकरण का विरोध'

इस बीच, तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने सरकार के फैसले पर ओवैसी की आपत्तियों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि AIMIM नेतृत्व सांस्कृतिक एकीकरण के किसी भी रूप को धार्मिक विशिष्टता (Religious Exclusivism) के लिए खतरे के रूप में देखता है।

रामचंद्र राव ने कहा कि यह केवल ओवैसी तक सीमित नहीं है, जिन्ना ने भी इसी रास्ते का अनुसरण किया था। उन्होंने तर्क दिया कि जिन्ना ने कांग्रेस सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती चरण में वंदे मातरम पर आपत्ति नहीं जताई थी, और उनका विरोध कांग्रेस छोड़ने के बाद ही शुरू हुआ था।

राव ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "यह हमें क्या बताता है? एक बार जब राजनीति धार्मिक विशिष्टता पर निर्भर हो जाती है, तो हर सभ्यतागत प्रतीक को खतरे के रूप में चित्रित किया जाता है।"

एकीकरण और राष्ट्रीय एकजुटता पर सवाल

भाजपा नेता ने एक पैटर्न का सुझाव देते हुए कहा कि AIMIM न केवल वंदे मातरम का विरोध करती है, बल्कि समान नागरिक संहिता (UCC), तीन तलाक के खात्मे और एक साझा ढांचा बनाने के हर प्रयास का भी विरोध करती है। उन्होंने कहा, "यह सब एक ऐसी नेतृत्व मानसिकता से उपजा है जो सांस्कृतिक एकीकरण और राष्ट्रीय एकजुटता को अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता और धार्मिक विशिष्टता के लिए खतरों के रूप में देखती है।"

क्या है कैबिनेट का फैसला?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन में किसी भी प्रकार की बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना है। यह 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान ही वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है।

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