बेंगलुरु में PM रूट पर मिले डेटोनेटर, NIA-RAW ने शुरू की जांच
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बेंगलुरु में PM रूट पर मिले डेटोनेटर, NIA-RAW ने शुरू की जांच

बेंगलुरु में PM मोदी के काफिले के रास्ते के पास जिलेटिन स्टिक और डेटोनेटर मिलने के बाद NIA, NSG और RAW ने जांच शुरू कर दी है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेंगलुरु दौरे के दौरान उनके काफिले के रास्ते के पास जिलेटिन स्टिक मिलने से देश की सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। यह मामला अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है। रविवार 10 मई को पीएम मोदी के बेंगलुरु दौरे के दौरान कनकपुरा रोड स्थित तातागुनी इलाके के पास वडेराहल्ली गेट के नजदीक जिलेटिन स्टिक और डेटोनेटर बॉक्स बरामद किए गए। इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) ने जांच शुरू कर दी है।

हादसा या साजिश? हर एंगल से जांच

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह मामला महज लापरवाही का है या फिर प्रधानमंत्री की सुरक्षा को चुनौती देने की कोई संगठित साजिश थी।सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे आतंकी संगठन या राष्ट्रविरोधी तत्व तो नहीं हैं। फिलहाल NIA ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या विस्फोटक सामग्री जानबूझकर वहां रखी गई थी ताकि सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी को परखा जा सके या लोगों के बीच डर का माहौल बनाया जा सके।हालांकि एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि जिलेटिन स्टिक, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर खनन और निर्माण कार्यों में होता है, गलती से वहां छूट गई हों। लेकिन सवाल यह है कि प्रधानमंत्री के वीवीआईपी रूट पर इतनी संवेदनशील सामग्री सुरक्षा जांच में कैसे नहीं पकड़ी गई।

PM की सुरक्षा में चूक पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी होती है। दौरे से पहले मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग, डीजीपी और खुफिया एजेंसियों को विस्तृत जानकारी दी जाती है।प्रधानमंत्री के पूरे रूट पर एंटी-सबोटाज चेक (ASC) किए जाते हैं और हर इंच की जांच होती है। इसके बावजूद विस्फोटक सामग्री का मिलना सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक की ओर इशारा कर रहा है।प्रधानमंत्री की सुरक्षा की सीधी जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की होती है, जबकि स्थानीय पुलिस SPG के निर्देशों के अनुसार काम करती है।

फॉरेंसिक जांच में जुटीं एजेंसियां

मौके से बरामद विस्फोटक सामग्री के नमूनों को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जिलेटिन स्टिक किस कंपनी की हैं, उन्हें किसने खरीदा और उनके सीरियल नंबर क्या हैं।इसके अलावा डेटोनेटर बॉक्स और विस्फोटक सामग्री पर मिले फिंगरप्रिंट या अन्य सबूतों के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

एक संदिग्ध हिरासत में

मामले में पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। पूछताछ के दौरान कुछ अहम जानकारियां मिलने की बात सामने आई है और अब जांच उन्हीं सुरागों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला

ओदयारहल्ली इलाके में हुई यह घटना अब देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। जांच एजेंसियां इसे केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर विषय मान रही हैं।

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