
कंकाल मामले से गरमाई ओडिशा विधानसभा, कांग्रेस का वॉकआउ
ओडिशा में बहन का कंकाल बैंक ले जाने की घटना पर विधानसभा में हंगामा हुआ, विपक्ष ने सरकार पर विफलता के आरोप लगाए और वॉकआउट किया।
ओडिशा के क्योंझर में एक व्यक्ति द्वारा अपनी बहन का कंकाल बैंक ले जाने की घटना ने गुरुवार को विधानसभा में भारी हंगामा खड़ा कर दिया। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने विशेष सत्र के दौरान विरोध जताते हुए कुछ समय के लिए वॉकआउट किया। यह सत्र लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी पर केंद्रित था।
सत्र की शुरुआत होते ही कांग्रेस विधायक तख्तियां लेकर सदन के वेल में पहुंच गए और भाजपा सरकार को घेरने लगे। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े विधेयकों को बाधित किया।
कंकाल मामले पर सदन में टकराव
विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी ने हंगामे के बावजूद कार्यवाही जारी रखी, जिससे नाराज होकर कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट किया। विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस घटना को बेहद संवेदनशील बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह घटना ओडिशा के लिए शर्मनाक है, जहां एक परिवार को अपनी महिला सदस्य की मौत साबित करने के लिए कंकाल निकालकर बैंक ले जाना पड़ा।
बीजेडी का सरकार पर हमला
नवीन पटनायक ने भाजपा की “डबल इंजन सरकार” पर तंज कसते हुए इसे अमानवीय शासन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को महिलाओं की गरिमा और सशक्तिकरण पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण विधेयक का उनकी पार्टी ने समर्थन किया था और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
पटनायक ने बताया कि उनकी पार्टी ने 2019 और 2024 के चुनावों में 33% लोकसभा सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया था और ओडिशा में महिला सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए गए।
परिसीमन पर भी सियासी घमासान
उन्होंने परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इससे ओडिशा के राजनीतिक अधिकार कमजोर होंगे। इस पर सियासी बहस और तेज हो गई।
सत्ता पक्ष का पलटवार
बीजेडी पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेताओं ने ‘दाना मांझी’ मामले का जिक्र किया, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी पत्नी का शव कंधे पर ले जाना पड़ा था। उन्होंने पटनायक पर आरोप लगाया कि वे अब “घड़ियाली आंसू” बहा रहे हैं।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राम चंद्र कदम ने कहा कि एक गरीब आदिवासी व्यक्ति को अपनी बहन का कंकाल निकालकर मौत का प्रमाण देना पड़ा, जो सरकार की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आदिवासी अधिकारों के संरक्षण के लिए पेसा कानून लागू न करने का भी आरोप लगाया।

