
'इतिहास में नहीं मिलता यादवों का जिक्र', ओम प्रकाश राजभर के बयान से सियासी उबाल
सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने यादव समाज के इतिहास पर विवादित टिप्पणी कर यूपी में सियासी उबाल ला दिया है। उन्होंने सपा और अखिलेश यादव पर पिछड़ों के हक छीनने का आरोप लगाया है।
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने यादव समाज को लेकर विवादित बयान देकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजभर का दावा है कि इतिहास में यादव समाज का उल्लेख नहीं मिलता और आरोप लगाया कि अतीत में यादव समुदाय के लोग मुगलों और अंग्रेजों की सेनाओं में शामिल होकर गैर-यादव पिछड़ों के खिलाफ लड़ते थे। उनका यह बयान उस विशेष सत्र के अगले दिन सामने आया, जिसमें उनकी अतुल प्रधान (Atul प्रधान) से तीखी बहस हुई थी।
राजभर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि गैर-यादव ओबीसी समाज को उनका अधिकार कब मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के लिए ओबीसी समाज का इस्तेमाल किया गया और इतिहास में उनके योगदान को नजरअंदाज किया गया। राजभर ने अपने समुदाय के इतिहास का जिक्र करते हुए महाराजा सुहेलदेव (Maharaja Suheldev) और रानी अवंती बाई लोधी (Rani Avanti Bai Lodhi) को प्रेरणा स्रोत बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि “गरीब-गुरबा की पीठ पर यादवों की लाठी के निशान हैं” और यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी की सत्ता के लिए समर्थन नहीं देंगे।
इससे पहले विधानसभा के विशेष सत्र में भी राजभर और सपा विधायक अतुल प्रधान के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। यह बहस गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक युवती की मौत के मामले पर शुरू हुई थी, जिस पर बोलते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब ऐसी घटनाएं यादव समाज से जुड़े लोगों द्वारा होती हैं, तब सपा नेतृत्व पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं जाता। राजभर ने सपा प्रमुख पर ओबीसी और मुस्लिम समाज को भी धोखा देने का आरोप लगाया।
राजभर के इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अतुल प्रधान ने उन्हें “बिना पेंदी का लौटा” और “राजनीतिक धोखेबाज” बताया। उन्होंने राजभर के विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र किया और कहा कि जब राजभर सपा में थे, तब वे Narendra Modi और Yogi Adityanath के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देते थे। सदन में यह बहस इतनी तीखी हो गई कि प्रधान के कुछ बयान कार्यवाही से हटा दिए गए।

