दिल्ली में बदलाव का दावा या विरासत का बहाना, एक साल बाद भी अधूरे वादे
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दिल्ली में बदलाव का दावा या विरासत का बहाना, एक साल बाद भी अधूरे वादे

दिल्ली में बीजेपी सरकार के एक साल पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन यमुना सफाई, कूड़े के पहाड़, गड्ढों, प्रदूषण और पानी संकट को लेकर वादों और जमीनी हकीकत पर सवाल उठ रहे हैं।


बस एक बार मौका दीजिए, दिल्ली की सूरत और सीरत दोनों बदल देंगे। कुछ इस तरह से बीजेपी के नेता दिल्ली की 70 विधानसभाओं में अपील और तकरीर करते थे। बीजेपी का हर नेता चाहे छोटा हो या बड़ा वो बताने की कोशिश करता था कि दिल्ली की तस्वीर को आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने बदरंग कर दिया है। दिल्ली बीजेपी के नेता वैसे तो निशाना कांग्रेस पर भी साधते थे। लेकिन मुख्य तौर पर उनके एजेंडे में आम आदमी पार्टी की 10 साल की सरकार थी। वो बताते नहीं थकते थे कि आम आदमी पार्टी जो दिल्ली को गड्ढा मुक्त, यमुना सफाई, खराब सड़कों, कूड़े के पहाड़, गंदा पानी, वायु प्रदूषण से निजात दिलाने का दावा कर रही थी उसने पिछले 10 वर्षों में कुछ भी नहीं किया।

दिल्ली की जनता ने बीजेपी की बातों को सच माना और 27 साल के सूखे को खत्म कर दिया। यानी कि जब नतीजे सामने आए तो दिल्ली से आम आदमी पार्टी की विदाई हो गई और रेखा गुप्ता की अगुवाई में बीजेपी ने सरकार बनाई। अब जब रेखा गुप्ता सरकार के एक साल पूरे होने जा रहे हैं वैसी सूरत में यह सवाल बनता है कि क्या दिल्ली गड्ढा मुक्त हुआ, क्या दिल्ली वालों को वायु प्रदूषण से राहत मिली। क्या यमुना की सफाई हुई जिसमें दिल्ली सरकार क्रूज चलाने की तैयारी कर रही है। क्या कूड़े के पहाड़ खत्म हुए, क्या लोगों को गंदे पानी से निजात मिला। क्या लोगों को चलने के लिए बेहतर सड़कें मिल रही हैं।

सबसे पहले बात करेंगे यमुना नदी की। यमुना नदी को दिल्ली का लाइफ लाइन कहा जाता है। लेकिन आप आईटीओ के ब्रिज पर खड़े हो जाइए, निजामुद्दीन के ब्रिज पर खड़े हो जाइए या वजीराबाद के ब्रिज पर खड़े हो जाइए एक मिनट में सांस उखड़ने लगती है। दिल्ली सरकार की ड्रेजिंग मशीने यमुना में काम करती तो नजर आती हैं। लेकिन पिछले एक साल में सफाई के नाम पर ठोस ऐक्शन की जगह दिखावे नजर आएगा।

आम आदमी पार्टी के नेता जब सवाल करते हैं कि बीजेपी वाले यह बताएं कि यमुना जी कब साफ होंगी तो दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार की तरफ से जवाब आता है कि कम से कम आप सवाल ना करें तो बेहतर होगा। पिछले 10 वर्षों में आप ने क्या किया। जानकार कहते हैं कि दिल्ली की मौजूदा सरकार यमुना नदी की कॉस्मेटिक सर्जरी कर रही है। अब ऐसे तो काम नहीं बनेगा। यमुना ऐक्शन प्लान का माखौल उड़ाया जा रहा है। सरकार कहती है कि बड़े बड़े नालों और इंटरसेप्टर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी बड़े बड़े नालों ने निर्बाध तरीके से गंदा पानी दिल्ली की लाइफ लाइन को बदरंग कर कहा है।

दिल्ली की सरकार गंदे पानी के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को घेरा करती थी। बीजेपी के नेता कहा करते थे कि झुग्गी झोपड़ियों और कॉलोनियों को छोड़िए पॉश इलाके के लोग भी गंदा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। हकीकत यह है कि दिल्ली जल बोर्ड जो स्वच्छ पानी देने का दावा करती है उसकी कड़वी सच्चाई इन तस्वीरों में नजर आती है। यह तस्वीरें आम आदमी पार्टी के कार्यकाल की नहीं है बल्कि उस रेखा गुप्ता सरकार की है जो दिल्ली वालों के स्वास्थ्य की सबसे अधिक चिंता करती थी। जब इस विषय पर दिल्ली सरकार से सवाल होता है तो वो पलट कर कहते हैं कि दरअसल विपक्ष के सामने मुद्दा कहां है, यह तो विरासत में मिली वो सौगात है जिसके बोझ तले वो दबे हुए हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि दिल्ली में तो ट्रिपल इंजन की सरकार है यानी की केंद्र में, प्रदेश में और एमसीडी का बोलबाला है ऐसे में रेखा गुप्ता सरकार दोष मढ़ने का काम क्यों कर रही है। इस विषय पर जानकार कहते हैं कि यही तो सियासत है, दिल्ली की सरकार को पता है कि अगर काम नहीं हुआ तो आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को निशाने पर लेने का विकल्प मौजूद है।

यमुना की सफाई, गंदे पानी के बाद क्या दिल्ली सरकार दिल्ली की आबो हवा को दुरुस्त कर पायी है। दिल्ली में हवा की सेहत के लिए आमतौर पर हर एक सियासी दल पड़ोसी राज्यों और पराली को जिम्मेदार बताते हैं। लेकिन इस दफा जब दिल्ली की सरकार ने ग्रीन दीवाली का हवाला देते हुए जब ग्रीन क्रैकर्स को इजाजत दी तो उसकी कड़वी हकीकत सबको नजर आई। मसलन दीवाली के बाद से ही दिल्ली में एक्यूआई का खतरनाक स्तर पर बना रहा। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार दावा करती रही और दावा करती भी है कि पिछली सरकारों की तुलना में वायु की सेहत ज्यादा खराब नहीं है। इस दावे की आम आदमी पार्टी ने तस्वीरों के जरिए पोल खोला।

आम आदमी पार्टी ने बताया कि किस तरह पीएम 10 और पीएम 2.5 कणों को मापने वाली मशीन के सामने दिल्ली सरकार के टैंकर पानी का छिड़काव करते हैं और आंकड़ों के साथ गोलमोल करते हैं। शायद ही किसी ने दिल्ली की सड़कों पर स्प्रिंकलर्स को देखा होगा। यानी कि रेखा गुप्ता की सरकार खुद पीठ थपथपाने का काम कर रही है।

क्या दिल्ली को बीजेपी की सरकार में गड्ढामुक्त कर दिया है। इस हकीकत को आप इन दो तस्वीरों से समझ सकते है। पहला गड्ढ़ा दिल्ली के जनकपुरी इलाके का है जहां 25 साल के युवक गड्ढे में गिरा रात भर पड़ा रहा और उसकी मौत हो गई। वहीं यह दूसरी तस्वीर रोहिणी सेक्टर 32 की जहां एक मजदूर मेनहोल में गिरा और उसकी जान चली गई। ये तो सिर्फ दो हादसे हैं जिनकी रिपोर्टिंग हुई है।

इस विषय पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने तंज कसा। यह सवाल हो सकता है कि आप के नेताओं को भी सरकार बनाने का मौका मिला था, उन्होंने क्या किया। लेकिन सवाल इससे भी बड़ा है कि दिल्ली के गड्ढ़ों पर सियासत करने वाली बीजेपी के नेता वही बात क्यों बोल रहे हैं जिससे उनको परहेज था। रेखा गुप्ता की सरकार वही रटा रटाया जवाब देती है कि नाकामियों की ऐसी विरासत उन्हें मिली है जिसके निपटान में वो जुटे हुए हैं।

इन सबके बीच बड़ा सवाल कूड़े के पहाड़ का है। दिल्ली की तस्वीर सिर्फ कनॉट प्लेस या लुटियन जोन तो नहीं है। करीब 1400 वर्ग किमी में फैली दिल्ली की आबादी करीब 2 करोड़ है, हर रोज दिल्ली से 11, 500 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है और इस कूड़े को गाजीपुर, ओखला, भलस्वा जैसी साइट ले जाता है। आप दिल्ली में किसी भी कोने से दाखिल हों तो कूड़े के पहाड़ आपका स्वागत करते हैं। हाल ही में दिल्ली के सीएम रेखा गुप्ता से सवाल किया गया था कि सरकार बनने से पहले आप लोग कूड़े के इन पहाड़ों से निजात दिलाने का वादा किया करते थे। लेकिन उन वादों का क्या हुआ। रेखा गुप्ता ने कहा कि ओखला और भलस्वा में कूड़े के पहाड़ को इस साल के अंत तक खत्म कर देंगे। जहां तक गाजीपुर की बात है तो वहां पूरी तरह से कूड़े की सफाई में दो साल और लगेंगे। यानी कि दिल्ली सरकार ने एक और तारीख दे दी। कहने का अर्थ यह हुआ कि एक साल पहले बीजेपी ने दिल्ली की जनता से जो वादे किये थे वो आज भी फाइलों में कहीं दफ्न हैं।

अगर कोई सवाल करता है तो जवाब यही कि अजी एक ही साल तो हुए हैं। इस एक वर्ष में बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल विरासत में समस्याओं के जो पहाड़ हमें मिले हैं उसकी कटाई छंटाई में हम दिन रात लगे हैं। लेकिन गंदी यमुना, दिल्ली की खराब सड़कें, खराब आबोहवा, गड्ढे में गिरकर कीमती जान का खात्मा, गंदा पानी, दिल्ली की कहानी को बयां कर रहे हैं।

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