जख्म भी जिंदा, हौसला भी कायम, पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी
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जख्म भी जिंदा, हौसला भी कायम, पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी

पहलगाम हमले की पहली बरसी पर जहां देश आतंक के खिलाफ संकल्प दोहरा रहा है, वहीं पीड़ित परिवार अब भी अपनों के खोने के दर्द से उबर नहीं पाए हैं।


22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि “भारत कभी भी किसी भी रूप में आतंकवाद के आगे नहीं झुकेगा”। वहीं हरियाणा के करनाल में एक पिता आज भी अपने बेटे की दर्दनाक मौत के गम से उबर नहीं पाया है। इसके साथ ही कानपुर के रहने वाले शुभम द्विवेदी की पत्नी ने भी गम और गुस्से का इजहार किया है।

एक साल बाद भी ताजा है जख्म

पिछले साल इसी दिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा Lashkar-e-Taiba ने हमला किया था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इनमें 26 वर्षीय नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शामिल थे।उनके पिता राजेश नरवाल, जो करनाल में सरकारी कर्मचारी हैं, बताते हैं कि बीता एक साल उनके लिए बेहद दर्दनाक रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार अब तक इस गम से उबर नहीं पाया है। “हम अभी भी शोक में हैं, इस दर्द को सह पाना आसान नहीं है।

लेफ्टिनेंट विनय अपनी पत्नी हिमांशी के साथ हनीमून पर पहलगाम गए थे, जब आतंकियों ने उन्हें बेहद करीब से गोली मार दी। उनकी पत्नी की अपने पति के शव के पास बैठी तस्वीर पूरे देश में वायरल हुई थी, जिसने लोगों को झकझोर दिया था।

पहलगाम आतंकी वारदात में कानपुर के रहने वाले शुभम द्विवेदी भी शिकार हुए थे। उनकी पत्नी ने कुछ इस तरह अपनी भावना व्यक्त की है। शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी कहती हैं, "...पाकिस्तान के लिए मेरा गुस्सा बहुत निजी है; उन्होंने मेरी ज़िंदगी पर उस मोड़ पर वार किया, जहाँ मेरी ज़िंदगी ही खत्म हो गई। अब बस एक इंसान ज़िंदा है। यह सिर्फ़ मेरे साथ नहीं, बल्कि उन सभी 26 लोगों के साथ हुआ है; न सिर्फ़ उन 26 लोगों के साथ, बल्कि हर आतंकी हमले के पीड़ित के परिवार के साथ भी। हम हमेशा यही कहेंगे कि पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए, न ही कुछ और, यहाँ तक कि खेल भी नहीं। असलियत की बात करें तो, भू-राजनीति (geopolitics) में उठाए जाने वाले कदमों को समझने के लिए आप और मैं बहुत छोटे हैं। भू-राजनीति हमारी समझ से कहीं ज़्यादा बड़ी है


पीएम मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को याद कर रहा हूं। उन्हें कभी नहीं भुलाया जाएगा।” उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश दुख और संकल्प में एकजुट है और आतंकवाद के मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।

कश्मीर में कड़ी सुरक्षा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम

हमले की बरसी पर कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को प्रमुख स्थानों और पर्यटन स्थलों पर तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धांजलि सभाओं में राजनेताओं, सामाजिक संगठनों, पीड़ित परिवारों और स्थानीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

फिर लौट रही है रौनक

हमले के बाद कुछ समय के लिए पहलगाम के करीब 50 पर्यटन स्थलों को बंद करना पड़ा था, लेकिन अब स्थिति सामान्य होती दिख रही है। अनंतनाग जिले का यह ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ एक बार फिर पर्यटकों से गुलजार है।देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं और सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा जता रहे हैं। असम से आए पर्यटक नवोजीत सरकार ने कहा, “जो होना था, हो चुका। अगर हम डरकर यहां न आएं, तो यह गलत होगा। कश्मीर आना हर भारतीय का सपना होता है।” पंजाब के पर्यटक अंकुर माहेश्वरी ने भी स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें अपने प्रवास के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

आतंक के खिलाफ जनता का विरोध

हमले के बाद कश्मीर में लोगों ने सड़कों पर उतरकर आतंकवाद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जो पिछले तीन दशकों में इस तरह का अभूतपूर्व जन आंदोलन था।जम्मू-कश्मीर सरकार ने 28 अप्रैल 2025 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर हमले पर शोक व्यक्त किया और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया।

पर्यटन में सुधार के संकेत

हाल के महीनों में पर्यटन उद्योग में सुधार के संकेत मिले हैं। सरकार और प्रशासन के प्रयासों के चलते पर्यटकों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को राहत मिल रही है।

स्मारक बना यादों का प्रतीक

पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे काले संगमरमर से एक स्मारक बनाया गया है, जिसमें हमले में मारे गए 25 पर्यटकों और एक स्थानीय व्यक्ति के नाम अंकित हैं। यह स्मारक बैसरन घाटी की उस दर्दनाक घटना की याद दिलाता है।

ऑपरेशन सिंदूर और जवाबी कार्रवाई

हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस अभियान में कई आतंकी ढांचे तबाह किए गए।तीन महीने बाद श्रीनगर के पास पहाड़ियों में मुठभेड़ के दौरान तीनों आतंकियों को मार गिराया गया। वहीं राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच जारी रखते हुए दिसंबर में सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेसिस्टेंट फ्रंट (The Resistance Front) को भी शामिल किया गया।

दर्द और संकल्प साथ-साथ

पहलगाम हमले को एक साल बीत चुका है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, उनके लिए यह दर्द आज भी जिंदा है। वहीं दूसरी ओर, देश आतंकवाद के खिलाफ अपने संकल्प पर अडिग है और कश्मीर धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटता नजर आ रहा है।

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