
'लेटरहेड पर जवाब दें', आरएसएस पर खड़गे का बड़ा हमला
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS से आय, पंजीकरण और संपत्तियों पर जवाब मांगा। जवाब नहीं मिलने पर कानूनी नोटिस की चेतावनी दी।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) उनके द्वारा पूछे गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो कानून के तहत संगठन को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।आरएसएस के पंजीकरण, आय के स्रोत, संपत्तियों और कानूनी अनुपालन को लेकर उठाए गए सवालों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। प्रियांक खड़गे ने हाल ही में आरएसएस से उसके वित्तीय स्रोतों, कानूनी स्थिति और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।
‘आधिकारिक लेटरहेड पर जवाब दें मोहन भागवत’
द फेडरल कर्नाटक को दिए एक विशेष साक्षात्कार में प्रियांक खड़गे ने एक बार फिर आरएसएस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने आरएसएस से कुल आठ महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं, जिनमें संगठन के पंजीकरण और आय के स्रोत से जुड़े प्रश्न भी शामिल हैं।
खड़गे ने कहा, "मैंने पहले ही एक पत्र लिखकर आठ महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मेरे सवालों का सीधा उत्तर देने के बजाय केवल चित्तापुर की घटना का जिक्र किया है। उन्हें मेरे सवालों का जवाब अपने आधिकारिक लेटरहेड पर देना चाहिए। अन्यथा हमें कानूनी तरीके से जवाब लेना आता है।"
‘इतने बड़े कार्यक्रम होते हैं, तो जवाबदेही भी हो’
गृह मंत्री ने कहा कि आरएसएस के लाखों स्वयंसेवक सड़कों पर उतरकर कार्यक्रम और रूट मार्च आयोजित करते हैं। ऐसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों की जवाबदेही किस विभाग के दायरे में आती है, यह सवाल पूछना पूरी तरह वैध है। उन्होंने कहा, "जब इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, तो यह किसके अधिकार क्षेत्र में आता है? क्या महिला एवं बाल विकास विभाग या कृषि विभाग ऐसे मामलों में सवाल पूछ सकता है? यह जिम्मेदारी गृह विभाग की है।"
शिकायतों के आधार पर मांगी गई जानकारी
प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि आरएसएस से पूछे गए सवाल किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि संगठन के खिलाफ मिली विभिन्न शिकायतों के आधार पर जांच के उद्देश्य से पूछे गए हैं।उन्होंने कहा कि फिलहाल केवल एक पत्र भेजा गया है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत जल्द ही एक रिमाइंडर पत्र भी भेजा जाएगा। यदि इसके बाद भी जवाब नहीं मिलता है तो औपचारिक नोटिस जारी किया जा सकता है।
‘धमकियों से नहीं डरता’
खड़गे ने यह भी दावा किया कि आरएसएस से जुड़े मुद्दे को उठाने के बाद उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल आ रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि इससे उनके कामकाज या फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।उन्होंने कहा, "जब से मैंने आरएसएस का मुद्दा उठाया है, मुझे लगातार धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। लेकिन मैं ऐसी धमकियों से बिल्कुल परेशान नहीं हूं। मेरा पूरा ध्यान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर है।"
राजनीतिक विवाद हुआ तेज
प्रियांक खड़गे के सवालों के बाद कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा और आरएसएस समर्थक इसे राजनीतिक हमला बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि किसी भी बड़े संगठन को कानून और पारदर्शिता के मानकों पर जवाबदेह होना चाहिए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आरएसएस इन सवालों का आधिकारिक जवाब देता है या नहीं, और यदि नहीं देता तो कर्नाटक सरकार आगे क्या कानूनी कदम उठाती है।

