
राजा रघुवंशी मर्डर केस: राज कुशवाहा की जमानत में 'सुप्रीम' अड़ंगा
राज कुशवाहा के अधिवक्ता फुयोसा योबिन ने बताया कि सेशन कोर्ट ने जमानत याचिका को 'गुण-दोष' (मेरिट) के बजाय 'तकनीकी आधार' पर खारिज किया है...
शिलॉन्ग: मेघालय की एक अदालत ने शुक्रवार को बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड के आरोपी राज कुशवाहा को राहत देने से इनकार करते हुए उसकी जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है। जहाँ एक ओर राज की अर्जी खारिज हुई है, वहीं दूसरी ओर मामले की अन्य आरोपी सोनम को मिली जमानत को नजीर बनाकर जेल में बंद तीन अन्य आरोपियों- विशाल चौहान, आनंद कुर्मी और आकाश राजपूत ने भी न्यायालय में जमानत के लिए अपने आवेदन पेश कर दिए हैं।
तकनीकी खामी बनी जमानत में बाधा
राज कुशवाहा के अधिवक्ता फुयोसा योबिन ने बताया कि सेशन कोर्ट ने जमानत याचिका को 'गुण-दोष' (मेरिट) के बजाय 'तकनीकी आधार' पर खारिज किया है। न्यायालय ने इस बात को गंभीरता से लिया कि वर्तमान आवेदन में पिछली जमानत अर्जी का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। नियमों की इस अनदेखी के कारण अदालत ने इसे प्रक्रियात्मक त्रुटि माना। बचाव पक्ष अब सोमवार को नए सिरे से जमानत के लिए अर्जी दाखिल करने की तैयारी कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का हवाला
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान शिलॉन्ग कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी राज के वकील ने याचिका में उसके आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा नहीं किया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस संदर्भ में अदालत ने अप्रैल 2025 के ऐतिहासिक 'मुनेश बनाम उत्तर प्रदेश' फैसले का जिक्र किया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अब जमानत के लिए ये शर्तें अनिवार्य हैं...
याचिकाकर्ता को अपने पिछले आपराधिक इतिहास का पूर्ण और स्पष्ट विवरण देना होगा।
यदि पूर्व में किसी भी मामले में संलिप्तता रही है तो उसकी वर्तमान स्थिति की जानकारी देना आवश्यक है।
गलत तथ्य पेश करने या जानकारी छिपाने पर जमानत याचिका स्वतः ही निरस्त कर दी जाएगी।
न्यायालय का मानना है कि इन शर्तों का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कानून के दुरुपयोग को रोकना है।
सोनम की रिहाई और पुलिस की घेराबंदी
हत्याकांड की मुख्य आरोपी मानी जा रही सोनम मंगलवार रात को जेल से रिहा हो चुकी है। वह वर्तमान में शिलॉन्ग के ही एक होटल में रुकी हुई है। चर्चा है कि वह अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए शहर से बाहर जाने की अनुमति के लिए कोर्ट में नई अर्जी लगा सकती है।
दूसरी ओर, शिलॉन्ग पुलिस सोनम की जमानत को मेघालय हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। शिलॉन्ग एसपी विवेक सियेम के अनुसार, पुलिस का तर्क है कि सोनम इस साजिश की मुख्य सूत्रधार है और उसके बाहर रहने से गवाहों को डराया या प्रभावित किया जा सकता है।
10 महीने की SIT जांच और कानूनी पेच
इंदौर के निवासी राजा रघुवंशी की हत्या की जांच पिछले 10 महीनों से विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। गौरतलब है कि निचली अदालत ने जब सोनम को जमानत दी थी, तब पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए थे। कोर्ट ने पाया था कि गिरफ्तारी के समय उचित धाराएं नहीं लगाई गईं और आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी नहीं दी गई। साथ ही, जांच की धीमी रफ्तार के कारण अब तक सभी गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं हो पाए हैं।
परिवार ने बनाई दूरी
राज कुशवाहा की स्थिति इस समय काफी विकट है। गिरफ्तारी के बाद उसका परिवार इंदौर से उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव चला गया है। फिलहाल कोई भी परिजन उससे मिलने जेल नहीं पहुंच रहा है। कोर्ट के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने से लेकर अन्य कानूनी औपचारिकताएं केवल उसके वकील ही पूरी कर रहे हैं। बचाव पक्ष ने लंबे समय तक जेल में रहने को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। लेकिन अपराध की जघन्यता को देखते हुए कोर्ट ने फिलहाल कोई नरमी नहीं दिखाई।

