
‘2001 में चुनाव लड़ता तो CM बनता’, रजनीकांत की चुप्पी ने छेड़ी बहस
रजनीकांत ने कहा कि अगर वह 2001 में चुनाव लड़ते तो 100% मुख्यमंत्री बनते। विजय की राजनीति पर भी उन्होंने खुलकर प्रतिक्रिया दी।
दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति में एक सवाल लगातार बना रहा — क्या सुपरस्टार रजनीकांत कभी राजनीति में उतरकर मुख्यमंत्री बनेंगे? रविवार (17 मई) को चेन्नई स्थित पोएस गार्डन आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान रजनीकांत ने शायद पहली बार उस अधूरे राजनीतिक सफर का दर्द खुलकर महसूस कराया।
जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि अगर वह 2001 का विधानसभा चुनाव लड़ते, तो क्या मुख्यमंत्री बन जाते? रजनीकांत ने बिना देर किए जवाब दिया — “100 प्रतिशत।” लेकिन अगला सवाल आया कि क्या उन्हें लगता है कि उन्होंने वह मौका गंवा दिया? इस पर अभिनेता कुछ पल के लिए चुप हो गए, नजरें फेर लीं और बिना जवाब दिए अगले सवाल की ओर बढ़ गए। यही खामोशी पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे चर्चित पल बन गई।
एयरपोर्ट पर चुप्पी से शुरू हुआ विवाद
रजनीकांत ने कहा कि हाल के दिनों में उनके बयानों और चुप्पी को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, इसलिए उन्होंने मीडिया से बात करने का फैसला किया।विवाद की शुरुआत पांच दिन पहले चेन्नई एयरपोर्ट पर हुई थी, जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अभिनेता विजय मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इस सवाल पर रजनीकांत मुस्कुराए, हाथ जोड़कर आगे बढ़ गए और कोई जवाब नहीं दिया। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद राजनीतिक असहजता और प्रतिद्वंद्विता की चर्चाएं शुरू हो गईं।
‘मैं इतना सस्ता इंसान नहीं’
इन अफवाहों पर सफाई देते हुए रजनीकांत ने कहा कि उनकी हालिया मुलाकात M. K. Stalin से सिर्फ निजी संबंधों के कारण थी।उन्होंने कहा, “हमारी दोस्ती राजनीति से ऊपर है। मुझे थोड़ा दुख हुआ कि स्टालिन हार गए। कुछ लोगों ने कहा कि मैं विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने की रणनीति पर चर्चा करने गया था। ऐसी स्थिति में मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि रजनीकांत इतना सस्ता इंसान नहीं है।”
जब उनसे विजय को लेकर जलन की बात पूछी गई तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, “मैं राजनीति में ही नहीं हूं, तो विजय से जलन क्यों होगी? हां, अगर कमल हासन मुख्यमंत्री बन जाएं तो शायद मुझे जलन हो सकती है। विजय और मेरे बीच 25 साल का जनरेशन गैप है। हमारा मुकाबला अच्छा नहीं लगेगा।”
‘कौवा और बाज’ विवाद की कहानी
रजनीकांत और विजय के बीच राजनीतिक तुलना की चर्चा जुलाई 2023 में फिल्म Jailer के ऑडियो लॉन्च से शुरू हुई थी।उस कार्यक्रम में रजनीकांत ने कहा था, “पक्षियों में कौवा सबको परेशान करता है, लेकिन बाज किसी को परेशान नहीं करता। जब कौवा बाज को परेशान करता है तो बाज कुछ नहीं करता, वह अगले स्तर पर उड़ जाता है।”
हालांकि उन्होंने विजय का नाम नहीं लिया था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे विजय की ओर इशारा माना गया। विजय के समर्थकों ने आरोप लगाया कि रजनी फैंस उनके स्टार को ‘कौवा’ बता रहे हैं।इसके जवाब में नवंबर 2023 में फिल्म Leo की सक्सेस मीट में विजय ने बिना विवाद बढ़ाए कहा, “तमिल सिनेमा में सिर्फ एक पुराची थलैवर एमजीआर हैं, एक नडिगर थिलगम शिवाजी गणेशन हैं और सिर्फ एक सुपरस्टार रजनीकांत हैं। जहां तक मेरी बात है, आप सभी राजा हैं और मैं आपका थलापति यानी सेवक हूं।”कई लोगों ने विजय के इस बयान को संयमित लेकिन संकेतपूर्ण जवाब माना।
राजनीति में आने का ऐलान और फिर वापसी
रजनीकांत ने 31 दिसंबर 2017 को आधिकारिक तौर पर राजनीति में आने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह 2021 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।उनकी लोकप्रियता, फैन नेटवर्क और राजनीतिक माहौल को देखते हुए माना जा रहा था कि तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। लेकिन दिसंबर 2020 में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राजनीति में आने से इनकार कर दिया।
उस समय उन्होंने कहा था, “बहुत दुख के साथ कह रहा हूं कि मैं राजनीति में नहीं आ सकता। इस फैसले का दर्द सिर्फ मैं जानता हूं।” उन्होंने ब्लड प्रेशर से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को “भगवान की चेतावनी” बताया था।इसके बाद जुलाई 2021 में उन्होंने अपने संगठन ‘रजनी मक्कल मंद्रम’ को भंग कर दिया और साफ कहा कि अब उनकी राजनीति में आने की कोई योजना नहीं है।
विजय की राजनीति पर रजनीकांत की प्रतिक्रिया
रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रजनीकांत ने विजय की राजनीतिक सफलता की खुलकर तारीफ की।उन्होंने कहा, “52 साल की उम्र में विजय ने वह हासिल किया है जो एमजीआर या एनटीआर भी उस उम्र में नहीं कर पाए थे। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से आने के बावजूद डीएमके, एआईएडीएमके और बीजेपी जैसी ताकतवर पार्टियों को चुनौती देकर जीत हासिल की है। मुझे जलन नहीं, बल्कि आश्चर्य और खुशी दोनों हैं।”रजनीकांत के बयान में “आश्चर्य” शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
तमिलनाडु की राजनीति का अधूरा अध्याय
एमजीआर के बाद तमिलनाडु लंबे समय तक ऐसे फिल्म स्टार की तलाश में रहा जो राजनीति में भी उतनी ही बड़ी सफलता हासिल कर सके। रजनीकांत को हमेशा उस संभावित नेता के रूप में देखा गया जिसके पास लोकप्रियता, जनसमर्थन और सही समय — सब कुछ था।लेकिन हर बार जब राजनीति में उतरने का मौका आया, वह पीछे हट गए।
दूसरी ओर विजय ने वही रास्ता चुना जिससे रजनीकांत दूर रहे। उन्होंने राजनीतिक पार्टी बनाई, डीएमके, एआईएडीएमके और बीजेपी जैसी स्थापित पार्टियों को चुनौती दी और राजनीतिक सफलता हासिल की।इसी वजह से विजय की राजनीतिक यात्रा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर रजनीकांत राजनीति में उतरते, तो तमिलनाडु की तस्वीर कितनी अलग हो सकती थी और शायद यही कारण है कि रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे ज्यादा असर रजनीकांत के शब्दों ने नहीं, बल्कि उनकी खामोशी ने छोड़ा।

