राम मंदिर विवाद: महाकुंभ के दान में बड़ा खेल? पैटर्न खंगाल रही SIT
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राम मंदिर विवाद: महाकुंभ के दान में बड़ा खेल? पैटर्न खंगाल रही SIT

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 6 दिन की जांच के बाद लखनऊ लौटी SIT। महाकुंभ 2025 के दान और आभूषणों के मूल्यांकन घोटाले पर जांच तेज, रिश्तेदारों की संपत्ति पर नजर।


Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय हेरफेर के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) शनिवार, 20 जून 2026 की देर शाम अयोध्या में 6 दिनों की मैराथन छानबीन पूरी कर लखनऊ लौट चुकी है। तीन सदस्यीय इस हाई-लेवल जांच टीम के रडार पर अब 100 से अधिक लोग हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी आज या कल में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप सकती है। इस बीच, जांच टीम ने 'महाकुंभ 2025' के दौरान आए दान और सोने-चांदी के आभूषणों के मूल्यांकन (Valuation) को लेकर कुछ ऐसे चौंकाने वाले एंगल खंगाले हैं, जिससे कई बड़े चेहरों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।


SIT जांच के 3 सबसे बड़े और नए खोजी एंगल
लखनऊ लौटी जांच टीम ने इस पूरे घोटाले की तह तक जाने के लिए तीन नए और बेहद गंभीर मोर्चों पर अपनी तफ्तीश केंद्रित की है:

1. महाकुंभ 2025 और प्राण-प्रतिष्ठा के चढ़ावे का 'पैटर्न'
एसआईटी की जांच में सबसे बड़ा और मुख्य फोकस पिछले साल 2025 में आयोजित हुए महाकुंभ के दौरान आए चढ़ावे पर है। जांच टीम यह कड़ाई से देखना चाहती है कि जब महाकुंभ के दौरान अयोध्या में करोड़ों श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही थी, तब मंदिर के दान-पात्रों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी दर्ज हुई या नहीं? इसके अलावा, जनवरी 2024 में हुई प्राण-प्रतिष्ठा के ठीक पहले और बाद के महीनों के चढ़ावे के 'ट्रेंड और पैटर्न' का भी मिलान किया जा रहा है ताकि वित्तीय विसंगतियों को पकड़ा जा सके।

2. संदिग्धों के रिश्तेदारों के बैंक खाते और संपत्तियों की जांच
कथित चोरी का यह खेल कितना बड़ा है, इसे समझने के लिए एसआईटी अब संदिग्ध कर्मचारियों के सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों की आर्थिक स्थिति खंगाल रही है।

प्रॉपर्टी और बिजनेस पर नजर: पुलिस को शक है कि कहीं कर्मचारियों ने चढ़ावे की ब्लैक मनी को अपने परिजनों या रिश्तेदारों के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने या नया व्यापार खड़ा करने में तो इस्तेमाल नहीं किया।

सुरक्षाकर्मी भी रडार पर: मंदिर परिसर में लंबे समय से तैनात पुराने कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था में लगे कुछ खास लोगों की भूमिका पर भी एसआईटी की पैनी नजर है।

3. सोने-चांदी के आभूषणों का 'मूल्यांकन घोटाला'
दान-पात्रों में सिर्फ नगदी नहीं, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा सोने, चांदी और हीरे के बेशकीमती आभूषण भी भारी मात्रा में अर्पित किए गए हैं। एसआईटी इस एंगल की गहराई से जांच कर रही है कि इन आभूषणों की कीमत का आंकलन कौन और कैसे करता था?

जांच का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कहीं आभूषण ज्यादा कीमत के आए और कागजों पर उनकी कम कीमत दिखाकर रसीद तैयार की गई? इसके बाद बची हुई बहुमूल्य धातुओं की अंदरखाने बंदरबांट कर ली गई। इस शक के दायरे में आभूषणों के मूल्यांकन के काम में लगे तमाम एक्सपर्ट्स और कर्मचारी आ चुके हैं।

चंपत राय समेत 4 बड़े कर्णधारों से हुई कड़ी पूछताछ
उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ाने वाले इस महा-विवाद में एसआईटी को कुल 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है, जबकि 7 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट देने का नियम था। इसी दबाव के बीच टीम ने अयोध्या में 6 दिनों तक डेरा डालकर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, गोपाल राव, चंदा काउंटिंग के प्रभारी डॉ. अनिल मिश्रा और रामशंकर उर्फ 'टिन्नू यादव' समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से आमने-सामने बैठाकर कड़ी पूछताछ की है।

इसके साथ ही, मंदिर में अब तक हुई स्टाफ भर्ती के सारे आधिकारिक दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए हैं, ताकि यह समझा जा सके कि दागी या लूपहोल वाले कर्मचारियों की बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किस आधार पर की गई थी।

चंदे के नाम पर एक और बड़ा फर्जीवाड़ा: फर्जी वेबसाइट्स एक्टिव
चढ़ावा चोरी के इस आंतरिक विवाद के बीच अयोध्या राम मंदिर के नाम पर चल रहा एक बाहरी डिजिटल घोटाला भी सामने आया है। कुछ साइबर ठगों ने राम मंदिर के नाम पर फर्जी लोगो और नकली वेबसाइट्स बना ली हैं, जिसके जरिए वे सीधे आम जनता से ऑनलाइन चंदा जुटाकर बड़ा गबन कर रहे हैं। एसआईटी और साइबर सेल अब इस समानांतर चंदा घोटाले के नेटवर्क को भी ध्वस्त करने में जुट गई है।


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