राम मंदिर: ट्रस्टियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक 800% महंगी जमीन खरीद
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राम मंदिर: ट्रस्टियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक 800% महंगी जमीन खरीद

अयोध्या राम मंदिर घोटाले में SIT का बड़ा एक्शन। ट्रस्टियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक। बाजार भाव से 800% महंगी जमीन खरीदने और आभूषणों के रिकॉर्ड में हेरफेर का खुलासा।


Ayodhya Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी और वित्तीय हेरफेर के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले तीन सदस्यीय एसआईटी ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर से जुड़े संदिग्ध लोगों को 'अयोध्या न छोड़ने' का कड़ा निर्देश जारी किया है। वहीं, न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, जांच का दायरा केवल चढ़ावे की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रस्ट द्वारा बाजार भाव से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर की गई जमीनों की खरीद भी अब रडार पर आ गई है।


'अयोध्या छोड़ने पर पाबंदी' और सीएमओ को डेली रिपोर्ट
एसआईटी इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेहद सतर्कता बरत रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच से जुड़ा हर डिजिटल डेटा और डेली प्रोग्रेस रिपोर्ट पूरी तरह सुरक्षित रखी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले, एसआईटी हर दिन की जांच रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) भेज रही है, ताकि शासन स्तर पर पल-पल की निगरानी रखी जा सके।

जमीन खरीद से लेकर आभूषणों तक: इन 3 मोर्चों पर फंसा ट्रस्ट
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो ट्रस्ट की पूरी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हैं:

1. 500% से 800% महंगी जमीन की खरीद
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब इस बात की गहराई से स्क्रूटनी कर रही है कि ट्रस्ट ने अलग-अलग चरणों में मंदिर के लिए जो निर्माण सामग्री और 71 एकड़ जमीन खरीदी, उसमें क्या खेल हुआ। आरोप है कि ट्रस्ट ने बाजार भाव से करीब 500 से 800 फीसदी अधिक कीमत चुकाकर जमीनें खरीदीं। बता दें कि समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने पहले भी इस मुद्दे को लेकर तीखे सवाल उठाए थे।

2. सोने-चांदी और हीरों के रिकॉर्ड में भारी हेरफेर
जांच में यह भी सामने आया है कि भगवान राम को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, कीमती पत्थरों और हीरों के आधिकारिक रिकॉर्ड में भारी विसंगतियां (Gaps) हैं। जब एसआईटी ने इन कीमती आभूषणों के स्टॉक और रसीदों को लेकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से सवाल किए, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

3. कुंभ मेले के दौरान निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल
सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ी अनियमितता कुंभ मेले के दो महीनों के दौरान हुई। उस समय रोजाना करीब 10 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे थे। दान पेटियां महज दो घंटे में नोटों से लबालब भर जाती थीं, लेकिन उस भारी-भरकम कैश को गिनने और सुरक्षित रखने का पूरा मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ।

अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका संदिग्ध, दर्ज हो सकती है FIR
एसआईटी को शुरुआती तफ्तीश में ही चढ़ावे की रकम को कम किए जाने (चोरी करने) के पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं। इसके बाद दो बड़े चेहरों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है:

लापरवाही और साजिश की जांच: एसआईटी ने इस पूरे मामले को लापरवाही और आपराधिक साजिश—दोनों ही एंगल्स से जांचा है। जांच टीम ने ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका को बेहद संदिग्ध माना है।

बैंक कर्मियों और गरणाकर्मियों पर गाज: पैसे गिनने की प्रक्रिया में शामिल टिन्नू यादव, कुछ चुनिंदा गणनाकर्मियों और बैंक कर्मचारियों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।

डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़: डिलीट किए गए CCTV फुटेज
जांच टीम के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल सबूत जुटाने की है। दरअसल, मंदिर परिसर का सीसीटीवी बैकअप सिस्टम केवल 45 दिनों का ही है, जिसके बाद पुराना डेटा ऑटो-डिलीट हो जाता है। इससे एसआईटी के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि यह गबन असल में कब शुरू हुआ था।

इसके अलावा, फॉरेसिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि सीसीटीवी फुटेज के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ (Tampering) की गई है और कुछ अहम हिस्सों को डिलीट किया गया है। एसआईटी अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से उस डिलीटेड डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही है।

याद दिला दें कि अयोध्या राम मंदिर में दान की हेराफेरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट की ही सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को इस 3 सदस्यीय हाई-लेवल एसआईटी का गठन किया था। इस टीम में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं, जो अब अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने जा रहे हैं।


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