चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर सस्पेंस खत्म, ट्रस्ट ने बताया इस्तीफा दिया या नहीं!
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चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर सस्पेंस खत्म, ट्रस्ट ने बताया इस्तीफा दिया या नहीं!

राम मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन पिछले दिनों मंदिर परिसर के भीतर से चढ़ावे और नकदी की गिनती करने वाले स्टाफ द्वारा करोड़ों रुपए के गबन का मामला सामने आया था।


श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा सस्पेंस और कयासों का दौर आखिरकार खत्म हो गया है। राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे ताकतवर चेहरे और महासचिव चंपत राय और उनके सहयोगी ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस बड़ी खबर की आधिकारिक पुष्टि खुद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने कर दी है। इसके साथ ही अयोध्या से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक मचे सियासी गलियारों के बवंडर पर फिलहाल एक बड़ा विराम लग गया है।

पिछले कुछ समय से अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान और चांदी की चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ रहा था। इस विवाद के बीच कल दिनभर चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें सोशल मीडिया, टेलीविजन चैनलों और अखबारों की सुर्खियों में बनी रहीं। कल तक जिसे अफवाह और भ्रामक खबर बताया जा रहा था, आज उस पर ट्रस्ट की तरफ से आधिकारिक मुहर लगा दी गई है।

कल दिनभर चलता रहा इनकार और सस्पेंस का ड्रामा

शुक्रवार का पूरा दिन अयोध्या के लिए बेहद उथल-पुथल भरा रहा। सुबह से ही यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई कि राम मंदिर में चंदे की चोरी के आरोपों से आहत होकर और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय ने अपना पद छोड़ दिया है। मीडिया कर्मियों ने इस संबंध में जब खुद चंपत राय से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कई बार फोन करने के बाद भी फोन रिसीव नहीं किया। पत्रकारों द्वारा रिकॉर्डेड संदेश और मैसेज छोड़ने के बाद भी उनकी तरफ से कोई जवाब या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

इसके बाद मीडिया की टीमें कारसेवकपुरम स्थित उनके आवास 'भरत कुटी' पर पहुंच गईं। वहां मौजूद उनके सेवादार सुबोध मिश्रा और अन्य सहयोगियों ने कल दिनभर इस खबर को पूरी तरह से खारिज किया। सेवादारों का कहना था कि यह खबरें पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं और चंपत राय जी ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है। कारसेवकपुरम के एक अन्य व्यवस्था प्रभारी शिवदास सिंह ने भी कल मीडिया के सामने आकर इन खबरों को पूरी तरह नकार दिया था।

ट्रस्ट के भीतर मची खलबली

इस पूरे प्रकरण के बीच कल ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का एक बड़ा बयान सामने आया था, जो इस वक्त काफी चर्चा में है। गोपाल राव ने बेहद तल्ख लहजे में मीडिया से कहा था, "प्रचार माध्यमों को देखकर अब तो ऐसा लगता है कि लोग इस्तीफा लेकर ही मानेंगे।" उनके इस तीखे बयान से यह साफ लग रहा था कि ट्रस्ट के भीतर कल तक इस इस्तीफे को स्वीकार करने या उसकी घोषणा करने की कोई तैयारी नहीं थी और अंदरूनी तौर पर खलबली मची हुई थी।

दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी कल तक इस खबर पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें भी चंपत राय या डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी संगठन की तरफ से नहीं मिली है।

कमरे से बाहर नहीं निकले थे चंपत राय

चंपत राय के प्रमुख सेवादार सुबोध मिश्र ने कल शाम को मीडिया को बताया था कि चंपत जी भाई साहब पूरे दिन अपने कक्ष (कमरे) से बाहर ही नहीं निकले हैं। उन्होंने उन सभी दावों को भ्रामक बताया था जिनमें यह कहा जा रहा था कि चंपत राय ने मणिराम दास छावनी जाकर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सुबोध मिश्रा का तर्क था कि जब भाई साहब अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकले, तो इस्तीफा देने कौन और कहां गया? लेकिन आज कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के बयान ने साफ कर दिया कि पर्दे के पीछे इस्तीफा पहले ही लिखा जा चुका था।

क्यों देना पड़ा चंपत राय को इस्तीफा?

राम मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन पिछले दिनों मंदिर परिसर के भीतर से चढ़ावे और नकदी की गिनती करने वाले स्टाफ द्वारा करोड़ों रुपए के गबन और 200 किलो चांदी की चोरी का मामला सामने आया। इस मामले में पुलिस ने पहली ऑफिशियल एफआईआर (FIR) दर्ज की और रातों-रात 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार होने वाले आरोपियों में चंपत राय के बेहद करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम भी शामिल था। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव और लवकुश मिश्रा जैसे लोग भी पकड़े गए, जो मंदिर की तिजोरी और दानपात्रों के मैनेजमेंट का काम देखते थे। इन आरोपियों के पास से लाखों रुपए कैश बरामद हुए और यह बात सामने आई कि इन्होंने दान के पैसों से अयोध्या के आसपास बड़ी-बड़ी संपत्तियां खरीद डाली हैं।

इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट को आड़े हाथों ले लिया। सवाल उठाए जाने लगे कि जिन लोगों को रक्षक बनाया गया था, वही भक्षक कैसे बन गए? चंपत राय पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं था, लेकिन उनके सबसे करीबियों के इस महा-पाप में शामिल होने की वजह से उन पर नैतिक दबाव लगातार बढ़ रहा था। देश-विदेश के रामभक्तों की आस्था को जो ठेस पहुंची, उसी का नतीजा है कि आज चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को अपनी कुर्सियां गंवानी पड़ी हैं।

पारदर्शिता और डिजिटलाइजेशन की उठ रही मांग

चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे मंदिर की व्यवस्था को कैसे पारदर्शी बनाया जाए। एक्सपर्ट्स और भक्तों का मानना है कि अब कागजी रसीदों और पुराने वीआईपी सिस्टम को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।

लाइव एंट्री: मंदिर में आने वाले एक-एक ग्राम सोने, चांदी या कैश की तुरंत कंप्यूटर पर लाइव एंट्री होनी चाहिए।

डिजिटल रसीद: श्रद्धालु जैसे ही दान दे, उसके मोबाइल पर तुरंत बारकोड वाली डिजिटल रसीद पहुंच जानी चाहिए।

सीए फर्म से ऑडिट: हर तीन महीने में किसी बड़ी और बाहरी सीए (CA) फर्म से ट्रस्ट के खातों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

एआई कैमरों से निगरानी: तिजोरी और काउंटिंग रूम में 360-डिग्री एआई (AI) कैमरे लगाए जाने चाहिए ताकि कोई भी कर्मचारी हाथ की सफाई न दिखा सके।

चंपत राय का जाना इस बात का सबूत है कि भगवान के घर में हेराफेरी करने वालों को न तो जनता बख्शेगी और न ही वक्त। अब देखना यह होगा कि इस बड़े इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के नए महासचिव के रूप में किसकी एंट्री होती है और वो मंदिर की सुरक्षा और साख को कैसे वापस लौटाते हैं।

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