ममता बनर्जी की पार्टी में मचा घमासान, टूट की अटकलों से गरमाई सियासत
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ममता बनर्जी की पार्टी में मचा घमासान, टूट की अटकलों से गरमाई सियासत

टीएमसी में बगावत और टूट की अटकलें तेज हैं। 61 विधायक बैठक से अनुपस्थित रहे, जबकि ममता बनर्जी ने बीजेपी पर पार्टी तोड़ने की कोशिश का आरोप लगाया।


पश्चिम बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बड़े राजनीतिक संकट की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत के संकेत सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या टीएमसी भी महाराष्ट्र की शिवसेना की तरह किसी बड़े विभाजन की ओर बढ़ रही है।

मंगलवार को पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों की खबरों ने जोर पकड़ा, जब कई विधायकों की नाराजगी और अलग गुट बनाने की चर्चाएं सामने आईं। हालांकि टीएमसी नेतृत्व लगातार किसी भी तरह के विभाजन की संभावना को खारिज कर रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने पार्टी के अंदर बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है।

विधायक दल की बैठक में अधिकांश विधायक रहे गायब

टीएमसी में बगावत की अटकलों को तब बल मिला जब रविवार को पार्टी नेतृत्व द्वारा बुलाई गई विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक में अधिकांश विधायक शामिल नहीं हुए।पार्टी के 80 विधायकों में से 61 विधायक बैठक से अनुपस्थित रहे, जिसके चलते बैठक को स्थगित करना पड़ा। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष की चर्चाओं को और तेज कर दिया।

दो विधायकों की निष्कासन कार्रवाई से बढ़ा विवाद

सोमवार को टीएमसी ने उलूबेरिया पूर्व से विधायक Ritabrata Banerjee और एंटली से विधायक Sandipan Saha को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने कोलकाता के ईएम बाइपास क्षेत्र के एक होटल में करीब 50 विधायकों के साथ कई बैठकें की थीं। इन बैठकों के बाद पार्टी के भीतर संगठित विद्रोह की आशंका और गहरा गई।पार्टी नेताओं का आरोप है कि दोनों निष्कासित विधायक अन्य विधायकों के संपर्क में हैं और पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

अलग गुट बनाने की चर्चाएं

टीएमसी के निलंबित नेता Riju Dutta ने दावा किया है कि 50 से अधिक विधायक कोलकाता के एक होटल में मिले थे और अलग गुट बनाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।उनका आरोप है कि यह समूह खुद को "असली तृणमूल" के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहा है और विधानसभा में पार्टी नेतृत्व में बदलाव चाहता है।दत्ता ने यह भी दावा किया कि कुछ टीएमसी सांसद भी भाजपा में जाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

विपक्ष के नेता पद को लेकर भी खींचतान

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि टीएमसी के कुछ विधायक विधानसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए रितब्रत बनर्जी का समर्थन करने पर विचार कर रहे हैं।यदि ऐसा होता है तो यह पार्टी नेतृत्व के लिए सीधी चुनौती मानी जाएगी।

फर्जी हस्ताक्षर विवाद से बढ़ा संकट

टीएमसी के भीतर संकट को और गहरा करने वाला एक और विवाद विपक्ष के नेता के चयन से जुड़ा है।रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया है कि विपक्ष के नेता के रूप में Sobhandeb Chattopadhyay के समर्थन में विधानसभा को भेजे गए प्रस्ताव में 14 विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी हैं।

दोनों नेताओं का दावा है कि 6 मई को हुई विधायक दल की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया था और बाद में कुछ विधायकों से कथित रूप से एक तैयार दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए गए।इन आरोपों के बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर सीआईडी जांच शुरू कर दी गई है।

अभिषेक बनर्जी को भी सीआईडी का समन

मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee को भी तलब किया है और विधानसभा में जमा मूल प्रस्ताव पुस्तिका की मांग की है।सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जांच एजेंसी से दो सप्ताह का समय मांगा है।जांचकर्ताओं ने कई विधायकों से भी पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि कुछ विधायकों ने संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है।

ममता बनर्जी ने भाजपा पर लगाए आरोप

बढ़ते विवाद के बीच टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भाजपा पर उनकी पार्टी को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।ममता बनर्जी का कहना है कि कई विधायकों ने उन्हें बताया है कि पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के जरिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है तथा पार्टी गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा टीएमसी में टूट कराने की कोशिश कर रही है और विधायकों को निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी का समर्थन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

कोलकाता में प्रदर्शन की चेतावनी

ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर कोलकाता में धरना देंगी। यदि उन्हें अनुमति नहीं मिली तो वह इसे दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में उठाएंगी।उन्होंने कहा कि भाजपा डर और दबाव की राजनीति के जरिए टीएमसी को कमजोर करना चाहती है, लेकिन उनकी पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है।

क्या टीएमसी में शिवसेना जैसा विभाजन संभव?

फिलहाल टीएमसी नेतृत्व किसी भी तरह की टूट की संभावना को नकार रहा है। लेकिन बड़ी संख्या में विधायकों का बैठक से दूर रहना, दो विधायकों का निष्कासन, अलग गुट बनाने की चर्चाएं और फर्जी हस्ताक्षर विवाद ने पार्टी के भीतर गंभीर असंतोष की ओर संकेत जरूर किया है।

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह केवल अस्थायी राजनीतिक संकट है या फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम सामने आने वाला है। फिलहाल ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी को एकजुट बनाए रखने की है।

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