
‘पुष्पा कहां है?’ फाल्टा में शुभेंदु अधिकारी का बड़ा हमला
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर चुनावी गड़बड़ी के आरोपों के बाद पुनर्मतदान हो रहा है। बीजेपी 208वीं सीट जीतने की कोशिश में टीएमसी पर हमलावर है।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा पहली बार सत्ता हासिल करने और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी शिकस्त देने के 17 दिन बाद अब फाल्टा विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान होने जा रहा है। यह वही सीट है जहां 29 अप्रैल को निर्धारित मतदान के दौरान कथित तौर पर चुनाव प्रक्रिया बाधित हुई थी।
चुनाव आयोग ने गंभीर चुनावी गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किए जाने के आरोपों को देखते हुए फाल्टा के सभी 285 मतदान केंद्रों, जिनमें सहायक बूथ भी शामिल हैं, पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है। यह मतदान 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा, जबकि मतगणना 24 मई को की जाएगी।
बीजेपी की नजर 208वीं सीट पर
हालांकि फाल्टा का परिणाम राज्य की कुल चुनावी तस्वीर को प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन बीजेपी इस सीट को भी जीतकर अपनी सीटों की संख्या 208 तक पहुंचाना चाहती है।फाल्टा सीट पर 2011 से लगातार टीएमसी का कब्जा रहा है। 2021 के चुनाव में भी टीएमसी ने बीजेपी को 40 हजार से अधिक वोटों से हराया था।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संभाली कमान
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 16 मई को फाल्टा में एक रैली को संबोधित किया। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा के समर्थन में वोट मांगे और टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान पर जमकर निशाना साधा।
जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। चुनाव के दौरान वह काफी चर्चित रहे थे। अप्रैल में मतदान के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश से आए आईपीएस अधिकारी और चुनाव पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा को चुनौती देते हुए खुद की तुलना फिल्मी किरदार “पुष्पा” से की थी।जहांगीर ने कहा था, “अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं। मैं उनके सामने झुकने वाला नहीं हूं।” हालांकि 4 मई के बाद वह करीब 10 दिनों तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए।
‘पुष्पा कहां है?’—शुभेंदु का तंज
शुभेंदु अधिकारी ने अपनी रैली में सवाल किया, “पुष्पा कहां है?” उन्होंने कहा कि 2021 विधानसभा चुनाव के बाद मानवाधिकार आयोग ने 19 लोगों को “कुख्यात अपराधी” घोषित किया था।मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि चुनाव के दौरान जिन लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज हुई हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
टीएमसी पर हिंसा और बूथ कब्जाने के आरोप
विपक्ष में रहते हुए बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही है कि जहांगीर खान फाल्टा और डायमंड हार्बर क्षेत्र में हिंसा, वसूली, झड़पों और बूथ कब्जाने जैसी घटनाओं के पीछे रहे हैं। बीजेपी का दावा था कि इलाके में डर का माहौल था और कई लोगों को क्षेत्र छोड़ना पड़ा।हालांकि जहांगीर खान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जनता उनके काम को जानती है और टीएमसी ने क्षेत्र के विकास के लिए काम किया है।
फाल्टा की लड़ाई क्यों खास है?
फाल्टा विधानसभा सीट डायमंड हॉर्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जहां से अभिषेक बनर्जी 2014 से सांसद हैं।शुभेंदु अधिकारी कभी टीएमसी का हिस्सा थे, लेकिन अभिषेक बनर्जी के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था। ऐसे में फाल्टा में बीजेपी की जीत को सुवेंदु की व्यक्तिगत राजनीतिक जीत के तौर पर भी देखा जा रहा है।शुभेंदु ने हालिया चुनाव में ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर सीट पर हराकर लगातार दूसरी बार मात दी थी।
बीजेपी के तीखे हमले जारी
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी 18 मई को फाल्टा का दौरा किया और टीएमसी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि टीएमसी अब चुनाव प्रचार से बच रही है क्योंकि उसे पुलिस सुरक्षा नहीं मिल रही।उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर भी अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि “वीर” नेता दिखाई नहीं दे रहे हैं और बीजेपी उन्हें याद कर रही है।
बूथ एजेंट जुटाने में टीएमसी को परेशानी
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव से पहले टीएमसी बीजेपी का मजाक उड़ाते हुए कहती थी कि बीजेपी को बूथ एजेंट नहीं मिल रहे हैं। लेकिन 4 मई के बाद हालात बदल गए और अब खुद टीएमसी को बूथों के लिए कार्यकर्ता जुटाने में मुश्किल हो रही है।कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव बाद तनाव के चलते कई स्थानीय टीएमसी नेता छिपे हुए हैं। बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने भी कथित तौर पर कहा कि मैदान में केवल वही प्रचार करते नजर आ रहे हैं।
वाम दल के उम्मीदवार शंभू कुर्मी ने कहा कि टीएमसी सरकार गिरने के बाद ही उन्हें प्रचार करने का मौका मिला। उनके अनुसार, जहांगीर खान विपक्षी दलों को क्षेत्र में प्रचार नहीं करने देते थे।फाल्टा सीट पर कांग्रेस की ओर से अब्दुर रज्जाक चुनाव मैदान में हैं।

