तेजस्वी यादव के आरोपों पर सम्राट चौधरी का जवाब, ‘बपौती की सोच छोड़िए’
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बिहार के सीएम सम्राट चौधरी पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने निशाना साधा।

तेजस्वी यादव के आरोपों पर सम्राट चौधरी का जवाब, ‘बपौती की सोच छोड़िए’

बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सत्ता जनता के आशीर्वाद से मिलती है, न कि किसी की बपौती है।


बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता किसी की बपौती नहीं है, बल्कि यह 14 करोड़ बिहारियों के आशीर्वाद से मिलती है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह पद जनता के साथ-साथ नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के समर्थन से मिला है।

तेजस्वी के बयान पर सम्राट का जवाब

दरअसल, तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि सम्राट चौधरी “लालू यादव की पाठशाला” से निकले हैं और वे “ऑरिजनल भाजपाई” नहीं हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि कुछ लोग अब भी “बपौती वाली सोच” में जी रहे हैं और उन्हें इससे बाहर निकलना चाहिए।

पुरानी राजनीति और जेल का जिक्र

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि 1994 में समता पार्टी का गठन हुआ था और उनके पिता इसके संस्थापक सदस्यों में थे। उन्होंने बताया कि वे 1995 में पार्टी से जुड़े, लेकिन उसी दौरान लालू प्रसाद यादव की सरकार ने उन्हें जेल भेज दिया।उन्होंने दावा किया कि सिर्फ उन्हें ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के 22 लोगों को भी जेल में डाला गया था। चौधरी के अनुसार, बाद में लालू यादव ने मिलर स्कूल मैदान में इस घटना के लिए माफी भी मांगी थी।

नीतीश कुमार की भूमिका पर बयान

सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर नीतीश कुमार नहीं होते तो लालू यादव कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार की भूमिका ही लालू यादव को सत्ता तक पहुंचाने में अहम रही। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में उन्हें जो संघर्ष झेलना पड़ा, उसी ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया।

भाजपा और एनडीए की एकजुटता पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें लगातार जिम्मेदारियां दीं—विपक्ष का नेता बनाया, प्रदेश अध्यक्ष बनाया, दो बार उपमुख्यमंत्री बनाया और अब मुख्यमंत्री बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी तरह का आंतरिक विरोध नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि पूरा एनडीए गठबंधन मिलकर बिहार के विकास के लिए काम कर रहा है।

उम्र और डिग्री विवाद पर सफाई

अपनी उम्र को लेकर उठे विवाद पर सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर वे 1995 में नाबालिग होते, तो उन्हें जेल नहीं बल्कि बाल सुधार गृह भेजा जाता। उन्होंने बताया कि इस मामले में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई हुई और वे अदालत के आदेशों का पालन कर रहे हैं।वहीं, अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठे सवालों पर उन्होंने यूजीसी का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी डिग्री को मान्यता मिलने के बाद ही उन्होंने हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल किया। साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि “डिग्री के मामले में आप काफी पीछे छूट गए हैं।”

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