
अब CM की कुर्सी पर ‘सम्राट’ राज,गैर-RSS पृष्ठभूमि से सत्ता के शिखर तक सफर
अब बिहार में सम्राट युग का दौर शुरू हो चुका है। वो बीजेपी के पहले सीएम बने। लेकिन उनके सियासी सफर का आगाज आरजेडी से हुआ था।
बिहार की राजनीति में आज एक नया अध्याय का आगाज हुआ। पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बना। सम्राट चौधरी ने सीएम पद की शपथ ली। बीजेपी इस मौके का दशकों से इंतजार कर रही थी। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता 14 अप्रैल को चुना गया था।
अलग पृष्ठभूमि, बीजेपी में मिली पहचान
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर पारंपरिक आरएसएस पृष्ठभूमि से नहीं रहा और न ही उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बीजेपी से की थी। इसके बावजूद उन्होंने बीजेपी में तेजी से अपनी पहचान बनाई और कई बड़े नेताओं को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष तक पहुंचे।उन्होंने राजनीति की शुरुआत लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी से की। इसके बाद जेडीयू में गए और करीब आठ साल पहले बीजेपी में शामिल हुए। हालांकि विधायक और मंत्री बनने का मौका पहले भी मिला, लेकिन असली राजनीतिक उभार उन्हें बीजेपी में ही मिला।
विरासत और शुरुआती पहचान
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति में एक मजबूत ओबीसी चेहरा रहे हैं।सम्राट ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 1999 में राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बने। उम्र विवाद के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा, लेकिन इसी घटना ने उन्हें राज्यभर में पहचान दिलाई।
दल बदलते हुए मजबूत हुआ कद
सम्राट चौधरी ने आरजेडी छोड़कर जेडीयू का दामन थामा और जीतन राम मांझी सरकार में मंत्री बने।बाद में जेडीयू में सीमित भूमिका मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर तेजी से आगे बढ़ता गया।
बीजेपी में उभार और आक्रामक राजनीति
2017 में बीजेपी में आने के बाद उन्होंने संगठन में मजबूत पकड़ बनाई। 2019 में उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया और 2023 में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।2022 में जेडीयू-आरजेडी गठबंधन बनने के बाद वे विपक्ष में प्रमुख चेहरा बने। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और ‘मुरेठा’ की कसम के जरिए राजनीतिक संदेश दिया।
डिप्टी सीएम से सीएम तक का सफर
नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने खुद को एक मजबूत प्रशासक और भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित किया।2025 के चुनाव के बाद उनका कद और बढ़ा और उन्हें नीतीश कुमार का संभावित उत्तराधिकारी माना जाने लगा।
बीजेपी में लंबे समय तक दूसरे नंबर पर रहने के बाद अब पार्टी ने बिहार में अपना मुख्यमंत्री चेहरा सामने रखा है। सम्राट चौधरी का यह सफर क्षेत्रीय राजनीति से उठकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की कहानी है, जो राज्य की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

